नई दिशा देती है साहित्यकारों की चर्चा

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 26 Nov 2013 02:23 PM IST
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कोई समाज हो, हमेशा विचार ही समाज को तैयार करते हैं। जैसे विचार होंगे वैसा ही समाज होगा। चाहे अदब फाउंडेशन का लिट्रेचर फेस्ट हो या चंडीगढ़ प्रशासन का बुक फेयर और लिटरेरी सोसायटी का चंडीगढ़ लिट फेस्ट।
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चंडीगढ़ लिट फेस्ट-2013 में आए लेखकों और साहित्यकारों की चर्चा ने सबको नई दिशाए दी हैं। चाहे कार्टूनिस्ट कृष्ण शास्त्री की व्यंग्य कला हो या फिर कश्मीरी लाल जाकिर की गंभीर सोच। सभी ने अमिट छाप छोड़ी है।
चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी के विवेक अत्रे ने बताया कि सांस्कृतिक आयोजनों की उत्पत्ति को देखें तो साहित्य ही दिखाई देगा। साहित्य, नाटक तो होते रहते थे पर ऐसे फेस्ट नहीं हुए।
सिटी ब्यूटीफुल का टेस्ट अलग है। यहां सांस्कृतिक आयोजनों में जितनी भीड़ होती है उतनी ही भीड़ साहित्य के फेस्ट में। बुक फेयर में लोगों की भागीदारी एजूकेशन लेवल के साथ-साथ बुक रीडिंग हैबिट की भी जानकारी देती है।

विवेक अत्रे ने कहा कि इसका उद्देश्य था बच्चों में किताबों के प्रति रुचि जगाना। बच्चों के सामने अशोक वाजपेयी, ईश्वर देसाई जैसे लेखक मौजूद रहे।

इसमें महिलाओं की स्थित, ट्रेवल और तहलका का मुद्दा भी उठा। अत्रे ने कहा कि सोसायटी हरेक प्रकार के व्यक्ति से बनती है। लिट फेस्ट का लाभ सोसायटी हो होगा। 
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