Haldwani: बनभूलपुरा ही नहीं, कई जगह बिना रजिस्ट्री बेची जा रही है जमीन; जहां बहती थी नदी, वहां बन गया जंगल
हल्द्वानी शहर में कई ऐसे स्थान हैं जहां स्टांप पर जमीन खुर्द-बुर्द की ही गई है। मलिक का बगीचा से कुछ दूरी पर स्थित जंगलात की बागजाला की जमीन पर भी यही खेल हुआ। देखते-देखते गौला नदी में भी कच्चे और पक्के मकान बना लिए गए हैं।
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बनभूलपुरा के मलिक का बगीचा के अतिक्रमण ने बवाल मचाया है। शहर में कई ऐसे स्थान हैं जहां स्टांप पर जमीन खुर्द-बुर्द की ही गई है। मलिक का बगीचा से कुछ दूरी पर स्थित जंगलात की बागजाला की जमीन पर भी यही खेल हुआ। देखते-देखते गौला नदी में भी कच्चे और पक्के मकान बना लिए गए हैं। ये मकान राजपुरा से लेकर हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से आगे तक बने है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन के पास भी ऐसा ही किया गया है। इसके बावजूद सरकारी महकमे आंख बंद किए हुए हैं या केवल रस्मी कार्रवाई कर ड्यूटी पूरी कर ली गई है।
तराई पूर्वी वन प्रभाग के गौला रेंज के अंतर्गत बागजाला में 1978 में 66 हेक्टेयर वन भूमि जमीन लीज पर दी गई थी। इनकी लीज अवधि खत्म होने के बाद नवीनीकरण नहीं कराया गया। बताया जाता है कि कई लीज धारकों ने स्टांप पर दूसरे लोगों को जमीन बेची। इसी बीच हल्द्वानी के करीब होने के कारण लोगों की निगाह लग गई और देखते-देखते 37 हेक्टेयर और भूमि पर कब्जा कर लिया गया। इसी तरह 103 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर लोग बस गए हैं। लंबे समय से इलाके में रहने वाले लोग बताते हैं कि वर्ष-2005 में करीब सौ परिवार रहते थे। बाद में यह संख्या बढ़कर ढाई सौ तक हुई। मौजूदा समय में यहां करीब पांच सौ से अधिक परिवार रह रहे हैं। इसमें दोनों समुदाय के लोग शामिल हैं।
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जांच कमेटी बनी मगर कुछ हुआ नहीं
पिछले साल जुलाई में डीएम ने वन विभाग की जमीन बेचने के मामले में जांच कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी डीएफओ हल्द्वानी की अध्यक्षता में बनाई गई। इसी मामले को लेकर डीएफओ हल्द्वानी ने तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ पत्र भेजा। इसमें डीएम के पत्र का हवाला बताया कि वन विभाग की सरकारी भूमि को खुर्द-बुर्द कर अवैध तरीके से एक निश्चित योजना के तहत विशेष समुदाय को बेचे जाने की बात कही गई थी। इसी के तहत वन भूमि के संबंध में कई जानकारी मांगी गई थी। इसमें कितने लोगों को लीज पर भूमि दी गई थी? इसकी अवधि क्या थी। इसके अलावा लीज खत्म होने के बाद भी उक्त भूमि पर लगातार भवन बन रहे थे। यहां पर बाहरी लोगों को मकान बेचने का गौलापार के लोगों ने विरोध भी दर्ज कराया था। इसी तरह रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत हल्द्वानी से सटे दूसरे इलाकों में वन भूमि को स्टांप पर बेचा गया।
जहां बहती थी नदी, वहां बन गया कंक्रीट का जंगल
राजपुरा में नदी वाले इलाके में भी कब्जा कर मकान बनाए गए हैं। श्मशान घाट के पास भी ऐसा ही किया गया है। हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास भी नदी के अंदर भवनों का निर्माण किया गया। देखते-देखते सैकड़ों परिवार बस गए। बिजली की लाइन तक पहुंच गई। काठगोदाम इलाके में भी यही हुआ है। इन इलाकों में कहां से आकर लोग बस गए, कौन खरीद फरोख्त कर रहा है, कौन बसावट को बढ़ावा दे रहा है, इसे जानने और ठोस कार्रवाई करने के बजाय सरकारी महकमे आंख बंद किए रहे। बीच में जब कभी दबाव बढ़ा तो छिटपुट कार्रवाई कर विभाग ने रस्मअदायगी कर दी।
बागजाला में जो अवैध निर्माण है, उसकी बेदखली के नोटिस दिए गए थे। बीच में जो निर्माण कार्य हुआ था उसे ध्वस्त भी किया गया है। वन विभाग पुलिस और प्रशासन का सहयोग लेते हुए अवैध अतिक्रमण हटाएगा। नदी क्षेत्र में अवैध निर्माण के मामले को भी दिखवाया जाएगा। -हिमांशु, डीएफओ तराई पूर्वी वन प्रभाग