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प्रवासी पक्षियों की आमद से गुलजार हुई झीलें और सरोवर
mahoba
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:32 PM IST
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देसी-विदेशी परिंदों को खूूब भाता है बुंदेलखंड का सौंदर्य
- फोटो : amarujala
महोबा। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का विख्यात विजय सागर पक्षी विहार और बेलासागर झील इन दिनों मेहमान पक्षियों के आतिथ्य सत्कार में डूबा हुआ है। जिले की झीलों में सुदूर ठंडे देशों से आए हजारों प्रवासी पक्षियों ने अपना डेरा डाल लिया है। इस समय अलग नस्लों के रंग-बिरंगे पक्षी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेहमान पक्षियों की चहचहाहट से सरोवर और झीलें गुलजार हो गई हैं।
ठंडे देशों में बर्फ जमा होने से बुंदेलखंड में हर साल लाखों विदेशी पक्षी झील और सरोवर में डेरा जमा लेते हैैं। सुदूरांचलों से आए परदेशी परिंदों के लिए जिले की झीलें और सरोवर सबसे मुफीद जगह बन गए हैं। आसमान पर फिलहाल एक से एक आकर्षक परिंदे उड़ान भरते दिखाई दे रहे है। विभिन्न प्रजातियों के ढेरों पक्षी यहां की नैसर्गिक सौंदर्य में खोये हुए दिखाई देते है।
तकरीबन 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले बेलासागर सरोवर व विख्यात विजय सागर झील में शीत ऋतु में हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों ने डेरा जमा लिया है। बेलासागर सरोवर का प्राकृतिक नजारा हंसों, सारसों, जल-बत्तखों और प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति से आकर्षक नजर आ रहा है। वहीं पक्षियों की संगीतमय चहचहाहट से पूरा इलाका गूंज रहा है। करीब 15 सालों से यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों में अब तक 10 प्रकार की प्रजातियां देखी गई है। साइबेरिया, चीन, तिब्ब्त आदि देशों के पक्षियों के झुंड के झुंड यहां पर दिसंबर माह की शुरूआत में ही अपनी आमद दर्ज करा देती हैं। मेहमान पक्षियों के आने से सरोवरों की रमणीयता बढ़ जाती है। साइबेरिया और मध्य यूरोप से आए पक्षियों को देखने के लिए खासी भीड़ जुट रही हैं। लालसर और कालासर करीब 8,000 किमी की दूरी तय करके यहां आते हैैं।
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इंसेट
ठंड में फिर आए परदेसी
खानपान की तलाश में परदेस जाने की मजबूरी सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, पक्षी भी भोजन की तलाश में दूर देश का सफर करते है। दूसरे देशों का सफर करने वाले प्रवासी पक्षी कहलाते हैैं। सर्दियां शुरु होते ही उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के कई इलाकों में प्रवासी पक्षियों का आना शुरु हो जाता हैं। यहां पर मेहमान पक्षी आते तो हैैं लेकिन अपने वतन बमुश्किल 25 फीसदी लौट पाते हैं।
इंसेट
क्यों आते हैं यहां मेहमान पक्षी
परदेसी परिंदे जाड़ों में बुंदेलखंड की तरफ रुख कर लेते हैं क्योंकि इस समय ठंडे देशों में झील, तालाब और नदियों की सतह पर बर्फ जम जाती है। ठिठुरन वाली ठंड के कारण इन पक्षियों का खाना बनने वाले जलीय जीव या तो मर जाते हैं या जमीन में छिपकर शीत-निद्रा में चले जाते हैं। सर्दियों के खत्म होने के बाद ही वह जागते हैं। ऐसी स्थिति में पक्षियों के लिए अपना खाना खोजना बहुत मुश्किल हो जाता है इसलिए प्रवासी पक्षी भोजन की तलाश में बुंदेलखंड की तरफ रुख करते हैं।
इंसेट
किन प्रजातियों के पक्षी आते है
सर्दियों में यहां पर आने वाले कई किस्म के मेहमान पक्षी शामिल होते हैैं। साईबेरियाई क्रेन, छोटी बत्तखें, सुनहरी बटान, बाबलिक, कालासर, लालसर, सफेद वैग्टेल, आर्कटिक कुरकी, अबाबील, भांडीक, आर्करिक, कुदकी, महाबक, गबर, आर्कटिक लुटान, टिहरी आदि मेहमान पक्षी हजारों किमी की दूरी तय करके यहां आते हैं।
इंसेट
दूसरे देश के लिए कब भरते हैं उड़ान
बुंदेलखंड के तटीय इलाकों, नदियों और झीलों के आसपास इन दिनों ऐसे पक्षियों का जमावड़ा बढ़ता रहा है। ज्यादातर प्रवासी पक्षी रात के समय ही उड़ान भरते हैैं इसलिए उनके बड़े-बड़े झुंडों की ओर हमारा ध्यान जाता ही नहीं है। ज्यादातर मेहमान पक्षी नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में उड़ान भरते हैं।
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ठंडे देशों में बर्फ जमा होने से बुंदेलखंड में हर साल लाखों विदेशी पक्षी झील और सरोवर में डेरा जमा लेते हैैं। सुदूरांचलों से आए परदेशी परिंदों के लिए जिले की झीलें और सरोवर सबसे मुफीद जगह बन गए हैं। आसमान पर फिलहाल एक से एक आकर्षक परिंदे उड़ान भरते दिखाई दे रहे है। विभिन्न प्रजातियों के ढेरों पक्षी यहां की नैसर्गिक सौंदर्य में खोये हुए दिखाई देते है।
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तकरीबन 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले बेलासागर सरोवर व विख्यात विजय सागर झील में शीत ऋतु में हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों ने डेरा जमा लिया है। बेलासागर सरोवर का प्राकृतिक नजारा हंसों, सारसों, जल-बत्तखों और प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति से आकर्षक नजर आ रहा है। वहीं पक्षियों की संगीतमय चहचहाहट से पूरा इलाका गूंज रहा है। करीब 15 सालों से यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों में अब तक 10 प्रकार की प्रजातियां देखी गई है। साइबेरिया, चीन, तिब्ब्त आदि देशों के पक्षियों के झुंड के झुंड यहां पर दिसंबर माह की शुरूआत में ही अपनी आमद दर्ज करा देती हैं। मेहमान पक्षियों के आने से सरोवरों की रमणीयता बढ़ जाती है। साइबेरिया और मध्य यूरोप से आए पक्षियों को देखने के लिए खासी भीड़ जुट रही हैं। लालसर और कालासर करीब 8,000 किमी की दूरी तय करके यहां आते हैैं।
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ठंड में फिर आए परदेसी
खानपान की तलाश में परदेस जाने की मजबूरी सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, पक्षी भी भोजन की तलाश में दूर देश का सफर करते है। दूसरे देशों का सफर करने वाले प्रवासी पक्षी कहलाते हैैं। सर्दियां शुरु होते ही उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के कई इलाकों में प्रवासी पक्षियों का आना शुरु हो जाता हैं। यहां पर मेहमान पक्षी आते तो हैैं लेकिन अपने वतन बमुश्किल 25 फीसदी लौट पाते हैं।
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क्यों आते हैं यहां मेहमान पक्षी
परदेसी परिंदे जाड़ों में बुंदेलखंड की तरफ रुख कर लेते हैं क्योंकि इस समय ठंडे देशों में झील, तालाब और नदियों की सतह पर बर्फ जम जाती है। ठिठुरन वाली ठंड के कारण इन पक्षियों का खाना बनने वाले जलीय जीव या तो मर जाते हैं या जमीन में छिपकर शीत-निद्रा में चले जाते हैं। सर्दियों के खत्म होने के बाद ही वह जागते हैं। ऐसी स्थिति में पक्षियों के लिए अपना खाना खोजना बहुत मुश्किल हो जाता है इसलिए प्रवासी पक्षी भोजन की तलाश में बुंदेलखंड की तरफ रुख करते हैं।
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किन प्रजातियों के पक्षी आते है
सर्दियों में यहां पर आने वाले कई किस्म के मेहमान पक्षी शामिल होते हैैं। साईबेरियाई क्रेन, छोटी बत्तखें, सुनहरी बटान, बाबलिक, कालासर, लालसर, सफेद वैग्टेल, आर्कटिक कुरकी, अबाबील, भांडीक, आर्करिक, कुदकी, महाबक, गबर, आर्कटिक लुटान, टिहरी आदि मेहमान पक्षी हजारों किमी की दूरी तय करके यहां आते हैं।
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दूसरे देश के लिए कब भरते हैं उड़ान
बुंदेलखंड के तटीय इलाकों, नदियों और झीलों के आसपास इन दिनों ऐसे पक्षियों का जमावड़ा बढ़ता रहा है। ज्यादातर प्रवासी पक्षी रात के समय ही उड़ान भरते हैैं इसलिए उनके बड़े-बड़े झुंडों की ओर हमारा ध्यान जाता ही नहीं है। ज्यादातर मेहमान पक्षी नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में उड़ान भरते हैं।