KVSY Fraud: सुलगते सवाल...जो मांग रहे जवाब, पूरे प्रदेश में फैली हो सकती हैं घोटाले की जड़ें, पढ़ें पूरा मामला
Kanpur News: कन्या विवाह सहायता योजना में हुए फर्जीवाड़ा के खुलासे के बाद शासन ने जांच कमेटी बनाई है। आशंका है कि घोटाले की जड़ें पूरे प्रदेश में फैली हो सकती हैं। यदि जांच में अफसरों की लापरवाही सामने आई, तो उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।
विस्तार
कानपुर में उप्र भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से निर्माण श्रमिकों के लिए चलाई जा रही कन्या विवाह सहायता योजना में हुए करोड़ों के फर्जीवाड़े के तार पूरे प्रदेश में फैले हो सकते हैं। इसे देखते हुए अब मामले की पूरे प्रदेश में जांच कराई जा रही है। इस वित्तीय वर्ष में आए आवेदनों और भुगतान की जांच की जाएगी। जांच के लिए शासन ने कमेटी भी बना दी है।
बता दें श्रम विभाग के पोर्टल और तकनीकी खामियों को दूर करने में मदद करने वाले मास्टर माइंड उदित मिश्रा ने पूरी साजिश रची थी। इसके बाद अपनी प्रेमिका नैंसी ठाकुर, विभाग में संविदा पर सहायक लेखाकार विनय दीक्षित, अंकित मिश्रा, मो. यासीन और ललित कश्यप के साथ मिलकर सवा करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया था।
फर्जी अभ्यर्थियों से आवेदन करा विभाग के पोर्टल से उनके खातों में रुपये ट्रांसफर किए थे। इसके बाद उदित ने सारे रुपये अपने खाते में वापस मंगा लिए थे। क्राइम सेल ने सभी को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया है। हालांकि अभी भी कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना बाकी है। इसके अलावा फर्जीवाड़ा जिस तरह से अंजाम दिया गया है।
भुगतान की फिर से जांच और सत्यापन शुरू कराया
वह विभाग के किसी कर्मचारी या अफसर की मदद के बगैर संभव नहीं है। ऐसे में बोर्ड ने इस वित्तीय वर्ष में योजना से जुड़े सभी दावों, भुगतान की फिर से जांच और सत्यापन शुरू कराया है। इसकी पुष्टि बोर्ड के सचिव ने भी की है। ऐसे में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
सुलगते सवाल...जो मांग रहे जवाब
एक: लॉगइन आईडी, ओटीपी कैसे हुई शेयर
बोर्ड की ओर से भेजे गए पत्र में बताया गया था कि 30 जनवरी को फिर से परीक्षण किया गया। इसमें पता चला कि 463 में से 201 श्रमिकों को भुगतान कर दिया गया है। यह भुगतान अपर श्रमायुक्त कानपुर कल्पना श्रीवास्तव की आईडी डीएलसी तीन केएनपी से बोर्ड के वेबपोर्टल पर लॉगिन कर किया गया। लॉगिन के दौरान ओटीपी भी आया था। इसकी पुष्टि बीएसएनएल के रिकॉर्ड से भी हो चुकी है। सवाल यह उठता है कि आरोपियों तक लॉगिन आईडी और ओटीपी कैसे पहुंचा।
दो: श्रम प्रवर्तन अफसरों ने रिजेक्ट क्यों नहीं किए आवेदन
आवेदन आने के बाद अपर/उप/सहायक श्रमायुक्त के स्तर से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को आवंटित किए जाते हैं। पता चला है कि आवेदन अलग-अलग अफसरों के लॉगिन में आए थे। एक अफसर ने 77 आवेदन पत्रों को रिजेक्ट कर दिया था, तो इन खातों में भुगतान नहीं हो सका था। बाकी फर्जी आवेदन क्यों नहीं रिजेक्ट किए गए। ऐसा होता तो बाकी लोगों के खातों में भी भुगतान न होता।
तीन: 30 जनवरी को भुगतान, फिर भी नहीं दर्ज कराई एफआईआर
30 जनवरी को 201 अपात्रों के खातों में दोबारा 55-55 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। लेकिन विभाग के अफसरों ने दूसरे दिन 31 को एफआईआर नहीं कराई। विभाग के उच्च अफसरों को भी जानकारी नहीं दी। एक फरवरी को देर रात एफआईआर कराई गई। सवाल यह है कि एक दिन का इंतजार क्यों किया गया।
चार: कानपुर को ही क्यों बनाया गया निशाना
क्राइम सेल ने खुलासा किया है कि प्रेमी जोड़े, श्रम विभाग के एक आउट सोर्स सहायक लेखाकार ने अन्य साथियों की मदद से फर्जीवाड़ा किया है। मास्टरमाइंड विभाग के पोर्टल से जुड़ी खामियों को दूर करता था। बड़ा सवाल यह है कि पोर्टल लखनऊ से संचालित होता है। आरोपी की पहुंच पूरे प्रदेशभर में रही होगी लेकिन उसने कानपुर को क्यों निशाना बनाया। कहीं यहां के किसी कर्मचारी या अफसर से मिलीभगत तो नहीं थी।
ये छह तो अस्त्र के तौर पर हुए इस्तेमाल
विभाग में इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बाद खलबली मची हुई। क्राइम सेल के खुलासे के बाद विभाग के एक अफसर का कहना है कि जो आरोपी पकड़े गए हैं, वो तो केवल अस्त्र के तौर पर इस्तेमाल हुए हैं।
पूरे वित्तीय वर्ष में आए आवेदनों की होगी जांच
उप्र भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की सचिव किरण मिश्रा ने बताया कि कानपुर में ही अभी इस तरह का मामला प्रकाश में आया है, लेकिन बोर्ड पूरे प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में योजनाओं से जुड़े आए आवेदनों, भुगतान आदि का फिर से जांच कर रहा है। छह सदस्यीय टीम बनाई गई है। शासन ने भी कमेटी बना दी है।