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'उस समय केपरी ट्रेड सेंटर सिनेमा हॉल था'

Fri, 09 Aug 2013 11:01 AM IST
देहरादून/इंटरनेट डेस्क
देहरादून/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 09 Aug 2013 11:01 AM IST
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interview of ruskin bond

रस्किन बांड

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लेखक
जन्म - 19 मई 1934, जामनगर कसौली, हिमाचाल प्रदेश
शिक्षा-दीक्षा - जॉन विशप कॉटन शिमला, हेम्पटनकोर्ट मसूरी
पहली पुस्तक - द रूम ऑन द रूफ वर्ष 1956 में प्रकाशित हुई। और 1957 में इंग्लैंड में जॉन लेवन राइस मेमोरियल पुरस्कार
वर्ष - 1992 में भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार
वर्ष - 1999 में पदमश्री से सम्मानित किए गए।
वर्ष 2003 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने डाक्ट्रेट की मानद उपाधि से विभूषित किया।
अभी तक सौ से अधिक पुस्तक, लघु कहानियां, एंथालॉजी लिख चुके हैं। उनके उपन्यास सुसैनाज सेवन हजबेंड पर विशाल भारद्वाज ने सात खून माफ फिल्म बनाई। और श्याम बेनेगल ने हिंदी सीरियल एक था रस्टी बनाया गया।

अंग्रेजी के जाने-माने उपन्यासकार रस्किन बांड का बचपन शिमला, जामनगर और देहरादून में बीता। लेकिन देहरादून में बिताए गए दिनों की यादें आज भी उनके जेहन में तरोताजा है। और लेखक बनने का सपना ही उन्होंने देहरादून में बुना था।
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बांड बताते है कि उनके दादा देहरादून में ही रहते थे। उनकी मां की शादी यही देहरादून में हुई थी। वे बताते हैं कि देहरादून में एस्ले हॉल मुख्य बाजार होता था। क्लेमेंटाउन में खूब चहल-पहल होती थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के युद्धबंदियों को जिनमें जर्मन और अमेरिकन होते थे। उन्हें क्लेमेंटाउन में रखा जाता था। और वे लोग सिनेमा देखने के लिए बाजार आते थे।
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कई बार पैदल दोस्तों के साथ आए
तब बाजार में खूब रौनक लगी रहती थी। देहरादून में बचपन में गुजारे दिनों में 1948 की घटना अच्छी तरह याद है। वे कहते है कि वे हालीवुड सिनेमा जो मौजूदा समय में केपरी ट्रेड सेंटर के नाम से जाना जाता है। वहां अंग्रेजी मूवी देखने गए थे। फिल्म शुरू हुए दस मिनट ही बीते थे। और खबर आ गई कि महात्मा गांधी की हत्या हो गई। सिनेमा हॉल समेत बाजार एक हफ्ते के लिए बंद हो गए। वे बताते है कि देहरादून से कई बार पैदल दोस्तों के साथ आए।

ruskin bond


उनके करीब दोस्त में राज कुंवर के अलावा एचपीएस आहलूवालिया, नरेंद्र सिंह है। नरेंद्र सिंह धामावाला में रहते थे। सेंटजार्ज कालेज मसूरी से सीनियर कैंब्रिज करने के बाद वे लंदन चले गए। लंदन में वे आज शराब के सबसे बड़े व्यापारी है। बांड कहते हैं कि देहरादून में तत्कालीन अंग्रेजी शासक मनोरंजन के लिए आते थे। एंटरटेनमेंट के मसूरी और देहरादून में अच्छे साधन थे।

रस्किन बांड की प्रसिद्घ रचनाएं
रूम ऑफ द रूफ, द ब्लू अंब्रेला, द हिडेन पूल, द एडवेंचर ऑफ रस्टी, रोड्स टू मसूरी, मसूरी एंड लंढौर, डेज ऑफ वाइन एंड रोजेज, अ पैसेज थ्रू इंडिया, हिमालयन लीफ एंड फ्लॉवर, मसूरी ज्वैल ऑफ द हिल्स, एंग्री रिवर, हनुमान टू द रेस्क्यू, स्ट्रेंज मैन-स्ट्रेंज प्लेसेज, टेल्स एंड लीजेंड्स ऑफ इंडिया, द इंडिया आई लव, द रोड टू द बाजार।

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