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अनुराग यादव
डीएम, लखनऊ
अक्सर लोगों में घटनाओं और मुद्दों को लेकर गुस्सा होता है। वे सुधारों के लिए कुछ करना चाहते हैं, लेकिन कर नहीं पाते। उन्हें वो प्लेटफॉर्म नहीं मिलता, जहां अपने सामाजिक सरोकारों की जिम्मेदारी निभा सकें।
मैं उन्हें वही प्लेटफार्म देना चाहता हूं। जैसे अगर कोई सोचता है कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा का स्तर ठीक नहीं है और वह उस स्कूल में मुफ्त में हफ्ते में एक या दो दिन पढ़ाना चाहता है तो उसे वह मौका मिले।
एक ऐसी वेबसाइट बनाने का इच्छुक हूं, जहां हर कोई अपने रूटीन कामों से अलग समाज को समृद्ध बनाने के लिए अपनी ईमानदार कोशिश के साथ जुड़े और काम करे।
अगर आपके मन में वाकई कुछ अच्छा करने का जज्बा है तो आप आगे आइए, मैं मदद करूंगा।
लखनऊ सांस्कृतिक मायनों में धनी है। यहां की तहजीब, खानपान, पहनावा, बोली सब कुछ खास है। नई पीढ़ी को इनके बारे में बताने और पर्यटकों को लुभाने के लिए हेरिटेज वॉक का प्लान है।
कैसरबाग, इमामबाड़ा, रूमी गेट समेत दूसरी सांस्कृतिक धरोहरों को फिर से सहेजना और संवारना है।
हफ्ते में एक या महीने में दो बार इन स्थानों पर अवध की संस्कृति से जुड़े थीम बेस्ड कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा ताकि घर वाले-बाहर वाले, नए-पुराने सभी अपनी सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू हो सकें।
सर्कुलर रिंग रोड की तरह होगा मेट्रो का रूट
जिस तरह से राजधानी का विकास हो रहा है, उसे देखते हुए मेट्रो की योजना एकदम सटीक है। कोशिश है कि मेट्रो का रूट सर्कुलर रिंग रोड की तरह विकसित हो ताकि जो नया शहर विकसित हो रहा है, वह मुख्य शहर से बेहतर तरीके से कनेक्ट हो। मेट्रो काफी हद तक शहर की ट्रैफिक टेंशन को खत्म कर देगी।
विकास के काम को देना है रफ्तार
शहर में विकास को रफ्तार देना मेरी प्राथमिकताओं में है। अलीगंज, सीतापुर रोड और अर्जुनगंज फ्लाईओवर का काम जल्द से जल्द पूरा कराना है।
लोहिया पथ को छह से आठ लेन का करना है। हाईकोर्ट में निर्माण कार्यों को भी पूरा कराना है। जेपी सेंटर और जनेश्वर मिश्र योजना से जुड़े काम के लिए भी युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं।
राहत दी इस रोड ने
शहर के निरीक्षण के दौरान कई इलाकों में घूमा। इस दौरान देखा कि फैजुल्लागंज के पास बंधे के किनारे सीतापुर रोड तक जाने वाली सड़क खस्ताहाल है।
वह दूसरी सड़कों पर ट्रैफिक का लोड कम करने में काफी मददगार हो सकती थी। मैंने तत्काल ही उसके निर्माण का काम शुरू कराया। अब ये लगभग पूरा हो चुका है।
इससे ढाई से तीन लाख लोगों को मदद मिलेगी। धरना स्थल को विधानसभा पर लाना और कानून व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती था। उसे पूरा करने की कोशिशों को ठीकठाक कामयाबी मिली।