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गंगा किनारे नवनिर्मित इमारतें देख भौचक रह गई टीम
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 11 Jan 2016 01:31 AM IST
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गंगा किनारे दो सौ मीटर के दायरे में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ वाराणसी विकास प्राधिकरण ने क्या कार्रवाई की, कितने नए निर्माण हो गए, इन सबका सच जानने के लिए रविवार को हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय न्याय मित्र की टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया।
प्रतिबंध के बाद भी हेरिटेज जोन में नवनिर्मित बहुमंजिली इमारतों को देख टीम हैरान रह गई। उसने इस बारे में पूछा तो वीडीए के अफसर चुप्पी साध गए। निरीक्षण के दौरान टीम को शिकायतों से कई गुना ज्यादा अवैध निर्माण मिले हैं। मौके पर ही कुछ को नोटिस जारी किया गया तो कई नए निर्माणों को ध्वस्त कर कोर्ट को सूचित करने को कहा गया।
बता दें, वीडीए ने गंगा किनारे के चिह्नित अवैध निर्माणों को ढहाने के बारे में हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट दी थी। बताया था कि चिह्नित सभी अवैध निर्माणों को ढहा दिया गया है। इसी की हकीकत जानने हाईकोर्ट की टीम यहां आई थी। शनिवार को टीम ने वीडीए में पूरे दिन फाइलों को खंगालने के बाद रविवार को मौके का सच जानने के लिए नगवां से खिड़किया घाट तक का दौरा किया।
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इस दौरान टीम ने लगभग दो दर्जन से अधिक भवनों को अवैध पाते हुए उन्हें तत्काल ढहाने के निर्देश दिए। टीम के सदस्यों ने माना कि वीडीए अवैध निर्माण रोक पाने में नाकाम रहा है। अवैध निर्माणों की फेहरिस्त में रिहायशी मकान से होटल, रेस्टूरेंट और गेस्ट हाउस तक शामिल हैं।
न्यायमित्र मनीष गोयल के नेतृत्व में आकांक्षा शर्मा और रवि आनंद अग्रवाल वीडीए के आला अधिकारियों के साथ सबसे पहले करीब 11 बजे तुलसीघाट पहुंचे। वहां संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के मकान की वीडियोग्राफी कराई और मकान के भूतल और तीसरी मंजिल को देखा। वहीं अस्सी घाट किनारे और दो सौ मीटर केदायरे में अवैध ढंग से बने कई होटलों को ढहाने के निर्देश दिए। टीम ने जगन्नाथ मंदिर के समीप अभिलेख के अनुसार गंगा किनारे बने भवनों की रिपोर्ट मांगी। चौकीघाट पर चार मकानों को देखा। भैंसासुर और पंचगंगा घाट पर भी नए निर्माणों पर कार्रवाई की हिदायत दी।
मीरघाट पर बने रेस्टूरेंट और गेस्ट हाउस को देख पूछा कि ये कैसे बन गए। पुराना निर्माण बताए जाने पर टीम ने कहा कि इसकी ईंट की जांच कराकर रिपोर्ट भेजें। गेस्ट हाउस और रेस्तरां के लाइसेंस को भी देखा। मानमंदिर घाट पर हेरिटेज जोन में बने रश्मि गेस्ट हाउस पर टीम ने पूछा कैसे निर्माण हो गया, एफआईआर हुआ या नहीं। इस पर एएसआई के संरक्षण सहायक पीके त्रिपाठी ने बताया कि नोटिस कई बार भेजा गया लेकिन उसे रिसीव ही नहीं किया गया। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। मौके पर नोटिस चस्पा कराया और संचालक से शपथपत्र लेकर ढहाने के निर्देश दिए।
इस दौरान टीम ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दायरे में आने वाले भवनों की भी जांच कराने के निर्देश दिए। खिड़कियाघाट पर हुए नए निर्माण पर भी सवाल खड़ा किए। नगवां में गंगोत्री विहार कालोनी को देखने बाद रामनगर गंगा किनारे जल परिवहन के लिए प्रस्तावित मल्टी मॉडल टर्मिनल का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान वीडीए के उपाध्यक्ष डीके सिंह, सचिव एमपी सिंह, तहसीलदार डीके सिंह, अभियंता एससी सिंह, बीएन सिंह आदि मौजूद थे।
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प्रतिबंध के बाद भी हेरिटेज जोन में नवनिर्मित बहुमंजिली इमारतों को देख टीम हैरान रह गई। उसने इस बारे में पूछा तो वीडीए के अफसर चुप्पी साध गए। निरीक्षण के दौरान टीम को शिकायतों से कई गुना ज्यादा अवैध निर्माण मिले हैं। मौके पर ही कुछ को नोटिस जारी किया गया तो कई नए निर्माणों को ध्वस्त कर कोर्ट को सूचित करने को कहा गया।
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बता दें, वीडीए ने गंगा किनारे के चिह्नित अवैध निर्माणों को ढहाने के बारे में हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट दी थी। बताया था कि चिह्नित सभी अवैध निर्माणों को ढहा दिया गया है। इसी की हकीकत जानने हाईकोर्ट की टीम यहां आई थी। शनिवार को टीम ने वीडीए में पूरे दिन फाइलों को खंगालने के बाद रविवार को मौके का सच जानने के लिए नगवां से खिड़किया घाट तक का दौरा किया।
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इस दौरान टीम ने लगभग दो दर्जन से अधिक भवनों को अवैध पाते हुए उन्हें तत्काल ढहाने के निर्देश दिए। टीम के सदस्यों ने माना कि वीडीए अवैध निर्माण रोक पाने में नाकाम रहा है। अवैध निर्माणों की फेहरिस्त में रिहायशी मकान से होटल, रेस्टूरेंट और गेस्ट हाउस तक शामिल हैं।
न्यायमित्र मनीष गोयल के नेतृत्व में आकांक्षा शर्मा और रवि आनंद अग्रवाल वीडीए के आला अधिकारियों के साथ सबसे पहले करीब 11 बजे तुलसीघाट पहुंचे। वहां संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के मकान की वीडियोग्राफी कराई और मकान के भूतल और तीसरी मंजिल को देखा। वहीं अस्सी घाट किनारे और दो सौ मीटर केदायरे में अवैध ढंग से बने कई होटलों को ढहाने के निर्देश दिए। टीम ने जगन्नाथ मंदिर के समीप अभिलेख के अनुसार गंगा किनारे बने भवनों की रिपोर्ट मांगी। चौकीघाट पर चार मकानों को देखा। भैंसासुर और पंचगंगा घाट पर भी नए निर्माणों पर कार्रवाई की हिदायत दी।
मीरघाट पर बने रेस्टूरेंट और गेस्ट हाउस को देख पूछा कि ये कैसे बन गए। पुराना निर्माण बताए जाने पर टीम ने कहा कि इसकी ईंट की जांच कराकर रिपोर्ट भेजें। गेस्ट हाउस और रेस्तरां के लाइसेंस को भी देखा। मानमंदिर घाट पर हेरिटेज जोन में बने रश्मि गेस्ट हाउस पर टीम ने पूछा कैसे निर्माण हो गया, एफआईआर हुआ या नहीं। इस पर एएसआई के संरक्षण सहायक पीके त्रिपाठी ने बताया कि नोटिस कई बार भेजा गया लेकिन उसे रिसीव ही नहीं किया गया। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। मौके पर नोटिस चस्पा कराया और संचालक से शपथपत्र लेकर ढहाने के निर्देश दिए।
इस दौरान टीम ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दायरे में आने वाले भवनों की भी जांच कराने के निर्देश दिए। खिड़कियाघाट पर हुए नए निर्माण पर भी सवाल खड़ा किए। नगवां में गंगोत्री विहार कालोनी को देखने बाद रामनगर गंगा किनारे जल परिवहन के लिए प्रस्तावित मल्टी मॉडल टर्मिनल का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान वीडीए के उपाध्यक्ष डीके सिंह, सचिव एमपी सिंह, तहसीलदार डीके सिंह, अभियंता एससी सिंह, बीएन सिंह आदि मौजूद थे।