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स्कूल का देखें ट्रैक, तब कराएं दाखिला
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sun, 10 Nov 2013 12:10 PM IST
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हर माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने की सोचते हैं। नामी स्कूल में पढ़ाने की ललक में वे घर से बहुत दूर के स्कूल में दाखिला करवा देते हैं।
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यह बच्चे के लिए ठीक नहीं है। दूर होने की वजह से बच्चा भी थक जाता है। वह घर पर स्वस्थ मन से पढ़ाई नहीं कर पाता। हमेशा घर के नजदीक अच्छा स्कूल तलाशना चाहिए।
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अच्छे स्कूल का चयन करते वक्त सबसे पहले पता करें कि वहां अच्छे शिक्षक हैं या नहीं। कोई बिजनेस ग्रुप उस स्कूल को चला रहा है या फिर शिक्षा के प्रति समर्पित लोग।
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शहर में इतने सारे एजूकेशन ग्रुप आ गए लेकिन मिशनरी स्कूलों में दाखिले के लिए अब भी क्रेज है। इसकी कई वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण तो यहां का अनुशासन और पढ़ाई है।
ये शहर के बीच में होने की वजह से ज्यादा लोगों की पहुंच में हैं। वर्षों से लोगों का विश्वास बना हुआ है। एक टेस्टेड प्रक्रिया है।
मिशनरी के अलावा भी बहुत से नए स्कूल खुल रहे हैं। वहां बिल्डिंग है तो अच्छे शिक्षक नहीं। संसाधन और अनुशासन की भी कमी देखने को मिलती है। कई बड़े स्कूल कुछ साल तो बहुत अच्छे चलते हैं और बाद में लोगों का मोहभंग हो जाता है।
दाखिले का आधार
-बच्चे की पर्सनालिटी को सबसे ज्यादा अहमियत होती है।
-संवाद क्षमता जांचने के लिए ग्रुप में बातचीत करवाते हैं।
-शिक्षक और मनोवैज्ञानिक उनकी बातचीत के आधार पर व्यक्तित्व की परख करते हैं।
-माता-पिता से बात करके यह पता करने की कोशिश होती है कि घर का माहौल कैसा है।
-संयुक्त परिवार है या एकल परिवार। कोई बच्चे को समय दे पाएगा या नहीं।
-अभिभावक खुद कितना पढ़े-लिखे हैं। वे स्कूल के साथ कितना सहयोग कर पाएंगे।
अनुशासन तो घर में ही नहीं रह गया
निश्चित तौर पर मिशनरी स्कूल अनुशासन के लिए जाने जाते हैं लेकिन कभी-कभी लगता है कि इसमें कुछ कमी आ रही है। इसकी वजह पूरा सामाजिक बदलाव है। घर में ही अनुशासन नहीं दिखता। हमारे पास खुद माता-पिता अपने बच्चों की शिकायत लेकर आते हैं। कहते हैं कि यह बात नहीं सुनता। आप ही इसको कुछ समझाइए।
मिडिल क्लास और गरीब भी पढ़ते हैं हमारे यहां
यह धारणा गलत है कि मिशनरी स्कूलों में आर्थिक रूप से संपन्न लोगों के बच्चे ही पढ़ते हैं। ज्यादातर मिडिल क्लास से बच्चे आते हैं। हम गरीब बच्चों को भी पढ़ाते हैं और उन्हें फीस में छूट भी देते हैं। पिछले साल हमने कुल 12 लाख रुपए की छूट फीस में दी थी। जहां तक दाखिले में वेतन का कॉलम होने की बात है तो वह एक सामान्य प्रक्रिया है। जैसे अन्य जानकारियां ली जाती हैं वैसे ही यह भी एक जानकारी है।