फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   cmap director anil tripathy interview

गोमती को गंदा नहीं करेंगे सूखे फूल

Mon, 12 May 2014 12:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 12 May 2014 12:56 PM IST
विज्ञापन
cmap director anil tripathy interview

मंदिरों और घरों में भगवान को चढ़ाए जाने वाले फूल अब बेकार नहीं जाएंगे और न गोमती की गंदगी बढ़ाएंगे, बल्कि ये फूल रिसाइकिल होकर मंदिरों को महकाने के काम आएंगे।

विज्ञापन


शिरडी के साईं मंदिर में एनजीओ और मंदिर के पदाधिकारियों की मदद से एक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। शिरडी में चढ़े फूलों से साईं सुगंध ब्रांड नाम से अगरबत्ती और गुलाब जल बनाई जा रही है।
विज्ञापन


इसकी बिक्री से होने वाली आय इस काम में जुटे स्थानीय लोगों को रोजगार देने में काम आ रही है। शिरडी के बाद हमारी कोशिश इस प्रोजेक्ट को लखनऊ के बड़े मंदिरों तक ले जाने की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस काम के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जाएगी। इसी के साथ सीमैप हर्बल दवाओं की मार्केटिंग व ब्रांडिंग पर भी जोर दे रहा है।

हर्बल दवा का क्षेत्र प्राइवेट कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। लोगों में हर्बल दवाओं के उपयोग के लिए रुझान बढ़ रहा है। सीमैप लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए गुणवत्ता वाली दवाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

हर्बल दवा को मिलेगा नया मुकाम
संस्थान ने मलेरिया के इलाज के लिए हर्बल दवा विकसित की है। दवाओं के विकास के लिए वैज्ञानिक अश्वगंधा, कालमेघ, शतावर जैसे औषधीय पौधों पर काम शुरू कर चुके हैं।

आयुर्वेद इंडस्ट्री को ध्यान में रखकर इनकी नई वैराइटी विकसित की जा रही है। नई वैराइटी से मेंथा की सफलता को दोहराया जा सकेगा। इस समय औषधीय और सुगंध पौधों में मेंथा का उत्पादन सबसे ज्यादा हो रहा है।

दूसरे औषधीय पौधों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। रिसर्च की गुणवत्ता और तकनीक हस्तांतरण को भी प्रभावी बनाया जाएगा।

ऑनलाइन खरीदिए औषधीय फूल
रॉ मैटेरियल की बिक्री के लिए चैनल विकसित करने से लेकर वैज्ञानिक तकनीक तक सीमैप उपलब्ध कराएगा। इससे किसानों को नगद धनराशि और लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानक की गुणवत्ता की दवाओं का फायदा मिल सकेगा।


सीमैप ने छह साल से बंद पड़े मानव उपवन को दोबारा खोल दिया है। यहां लोगों को औषधीय पौधों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

जल्द ही औषधीय पौधों को संस्थान के बिक्री काउंटर पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके साथ ही ऑनलाइन इन पौधों के गुणों को जानने और ऑर्डर देने की सुविधा दी जाएगी। ऑर्डर तैयार होने पर इसकी डिलीवरी के लिए सूचना भी ईमेल और फोन के जरिए दी जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed