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'अच्छा कलाकार वहीं जो विनम्र हो'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 27 Jul 2014 02:05 PM IST
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जब क्लासिकल डांस की ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी तो गुरु ने सबसे पहला पाठ यही सिखाया था की अपने आप को हमेशा विनम्र रखो। सिर झुका कर दूसरे को प्रणाम करो, चाहे वह आपसे छोटा हो या बड़ा।
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आजकल के छात्रों में नम्रता की कमी आ गई है। यह कहना है पद्मश्री नवाजी जा चुकी नृत्यांगना लीला सैमसन का। भरतनाट्यम में विश्व भर में नाम हासिल किया।
लीला आजकल सेंट्रल संगीत नाटक अकादमी और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन की चेयरपर्सन हैं। लीला टैगोर थिएटर में रविवार शाम को भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी।
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शनिवार को उन्होंने बताया जब वह 9 वर्ष की थीं, तभी से उन्होंने चेन्नई स्थित कल्चरल अकादमी ‘कला क्षेत्र’ में जाना शुरू कर दिया था। उनकी मां का आर्ट और म्यूजिक से बहुत लगाव था।
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इस कारण उन्होंने लीला को इस क्षेत्र से जोड़ा। भरतनाट्यम मेरी जिंदगी है और इसने मुझे पूरी तरह बदल दिया। मैंने गुरु रुक्मणि देवी से भरतनाट्यम सीखा। युवाओं को पढ़ाते हुए मुझे बहुत अच्छा लगता है।
लीला सैमसन की जिंदगी बनी फिल्म दिखाई
शनिवार शाम गवर्नमेंट म्यूजियम में लीला सैमसन के भरतनाट्यम पर आधारित फिल्म संचारी दिखाई गई। निर्देशक अरुण खोपकर द्वारा निर्देशित इस फिल्म में भरतनाट्यम को एक अलग तरीके से दिखाने की कोशिश की गई।
निर्देशक ने इस फिल्म की शूटिंग रॉक गार्डन के विभिन्न हिस्सों में की थी। फिल्म में सैमसन की जिंदगी और चेन्नई में उनके द्वारा कलाक्षेत्र से भरतनाट्यम सीखना और वहा छात्रों को नृत्यांगना के तौर पर पढ़ाना शामिल है।