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UP Election 2022 : यूपी की राजनीति में कैसे हुई श्रीकृष्ण की एंट्री, इसके सियासी मायने क्या हैं?
सार
श्रीराम के बाद अब उत्तर प्रदेश और देश की सियासत में श्रीकृष्ण की एंट्री हो चुकी है। फिलहाल भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच श्रीकृष्ण को लेकर जुबानी जंग चल रही है।
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कई दशक से अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने को लेकर राजनीतिक घमासान मचा हुआ था। राम मंदिर बनाने के पक्ष में भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल जैसे कई हिंदूवादी संगठन ने आंदोलन किया। कई चरणों की सुनवाई, बहस और जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने नौ नवंबर 2019 को राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया। एक साल बाद यानी पांच अगस्त 2020 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास किया। पहली ईंट रखी और अब मंदिर का निर्माण कार्य भी तेजी से शुरू हो गया है।
इस तरह से भगवान श्रीराम को लेकर लंबे समय से चली आ रही राजनीति अब लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन इस बीच सियासत में भगवान श्रीकृष्ण की एंट्री हो गई। वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में हर किसी के जेहन में यही सवाल उठने लगा कि आखिर राजनीति में श्रीकृष्ण की क्या जरूरत थी? कैसे और किसने राजनीति में श्री कृष्ण की एंट्री करवाई और अब इसके सियासी मायने क्या हैं?
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इस तरह से भगवान श्रीराम को लेकर लंबे समय से चली आ रही राजनीति अब लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन इस बीच सियासत में भगवान श्रीकृष्ण की एंट्री हो गई। वह भी तब, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में हर किसी के जेहन में यही सवाल उठने लगा कि आखिर राजनीति में श्रीकृष्ण की क्या जरूरत थी? कैसे और किसने राजनीति में श्री कृष्ण की एंट्री करवाई और अब इसके सियासी मायने क्या हैं?
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पहले ये जान लीजिए कि कैसे राजनीति में श्रीकृष्ण की एंट्री हुई?
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य।
- फोटो : प्रयागराज
ये बात जानने के लिए हमें एक महीने पहले जाना होगा। बात एक दिसंबर 2021 की है। सुबह 11 बजे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, 'अयोध्या, काशी भव्य मंदिर निर्माण जारी है। मथुरा की तैयारी है। जयश्रीराम, जयशिवशम्भू, जयश्रीराधेकृष्ण।'
यहीं से यूपी की सियासत में मथुरा और श्री कृष्ण की एंट्री हो गई। डिप्टी सीएम ने खुद नहीं सोचा होगा कि उनका ये ट्वीट आगे कहां तक जाएगा। देखते ही देखते राष्ट्रीय मीडिया में इसकी चर्चा होने लगी। राजनीतिक पंडित इसका मतलब निकालने लगे। कहा जाने लगा कि अयोध्या की तरह मथुरा में मंदिर और मस्जिद को लेकर जो विवाद चल रहा है, उसे भाजपा सरकार खत्म करवाकर वहां श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनवाएगी। यूपी ही नहीं, पूरे देश के लोग इस मुद्दे पर बात करने लगे। यहां से राजनीति में श्रीकृष्ण की जो धमाकेदार एंट्री हुई, वो आज भी जारी है।
डिप्टी सीएम के बाद एक-एक करके योगी कैबिनेट के कई मंत्रियों, भाजपा के नेताओं ने मथुरा में भव्य श्रीकृष्ण मंदिर बनवाने की बात कही। सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने श्री सीएम योगी को पत्र लिखा और श्री कृष्ण की भव्य मंदिर बनवाने की मांग की। महीने का अंत होते-होते 30 दिसंबर को सीएम योगी ने इस पर खुद बयान दे दिया। फर्रुखाबाद में एक जनसभा के दौरान बोले, 'हमने वादा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर का काम शुरू होगा। अब काशी विश्वनाथ धाम भी बन रहा है। अब मथुरा-वृंदावन को कैसे छोड़ा जा सकता है? वहां भी काम शुरू हो गया है।'
यहीं से यूपी की सियासत में मथुरा और श्री कृष्ण की एंट्री हो गई। डिप्टी सीएम ने खुद नहीं सोचा होगा कि उनका ये ट्वीट आगे कहां तक जाएगा। देखते ही देखते राष्ट्रीय मीडिया में इसकी चर्चा होने लगी। राजनीतिक पंडित इसका मतलब निकालने लगे। कहा जाने लगा कि अयोध्या की तरह मथुरा में मंदिर और मस्जिद को लेकर जो विवाद चल रहा है, उसे भाजपा सरकार खत्म करवाकर वहां श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनवाएगी। यूपी ही नहीं, पूरे देश के लोग इस मुद्दे पर बात करने लगे। यहां से राजनीति में श्रीकृष्ण की जो धमाकेदार एंट्री हुई, वो आज भी जारी है।
डिप्टी सीएम के बाद एक-एक करके योगी कैबिनेट के कई मंत्रियों, भाजपा के नेताओं ने मथुरा में भव्य श्रीकृष्ण मंदिर बनवाने की बात कही। सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने श्री सीएम योगी को पत्र लिखा और श्री कृष्ण की भव्य मंदिर बनवाने की मांग की। महीने का अंत होते-होते 30 दिसंबर को सीएम योगी ने इस पर खुद बयान दे दिया। फर्रुखाबाद में एक जनसभा के दौरान बोले, 'हमने वादा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर का काम शुरू होगा। अब काशी विश्वनाथ धाम भी बन रहा है। अब मथुरा-वृंदावन को कैसे छोड़ा जा सकता है? वहां भी काम शुरू हो गया है।'
फिर सांसद से श्रीकृष्ण ने पत्र लिखने के लिए बोल दिया
राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सीएम योगी के मथुरा का जिक्र किए हुए एक हफ्ते भी नहीं हुए थे कि दो जनवरी को भाजपा के राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह का बयान सामने आ गया। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा, इसमें कहा, 'मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि जहां से पार्टी चाहेगी, मैं वहां से चुनाव लड़ूंगा। वैसे तो हर विधानसभा क्षेत्र की जनता चाहेगी की योगी आदित्यनाथ उनके यहां से चुनाव लड़ें। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि ब्रज क्षेत्र की जनता चाहती है कि सीएम योगी मथुरा से चुनाव लड़ें। यह पत्र लिखने के लिए मुझसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है।'
फिर अखिलेश के सपने में भी आए श्री कृष्ण
डिप्टी सीएम केशव मौर्य, सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह समेत भाजपा के कई नेताओं के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी श्रीकृष्ण का जिक्र कर दिया। तीन जनवरी को लखनऊ में प्रेस से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'रात में हमारे सपने में आए थे भगवान श्रीकृष्ण जी। कह रहे थे आपकी सरकार बनने जा रही है। एक बार नहीं आए, हर दिन आते हैं। कोई ऐसा दिन नहीं है, जब हमारे सपने में आकर यह नहीं कहें कि आपकी सरकार बनने जा रही है।'
अखिलेश को सीएम योगी ने जवाब दिया
अखिलेश ने सपने में श्री कृष्ण के आने का जिक्र क्या किया, योगी आदित्यनाथ ने फिर से पलटवार कर दिया। उन्होंने अलीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'आज जब मैं खुद इस पॉवर प्रोजेक्ट का लोकार्पण करने आया हूं तो लखनऊ में कुछ लोगों को सपने आ रहे होंगे। भगवान श्री कृष्ण उनसे बोल रहे होंगे कि अब तो अपनी नाकामयाबियों पर रो लो। जो काम तुम नहीं कर पाए वो भाजपा की सरकार ने कर दिखाया। भगवान श्री कृष्ण इनको जरूर कोस रहे होंगे। उन्होंने इनसे बोला होगा कि जब तुम्हारी सरकार थी, तब तुमने मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना के लिए कुछ नहीं किया। वहां कंस को पैदा करवाकर जवाहर बाग जरूर करवा करवा दिया।'
फिर अखिलेश के सपने में भी आए श्री कृष्ण
डिप्टी सीएम केशव मौर्य, सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह समेत भाजपा के कई नेताओं के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी श्रीकृष्ण का जिक्र कर दिया। तीन जनवरी को लखनऊ में प्रेस से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'रात में हमारे सपने में आए थे भगवान श्रीकृष्ण जी। कह रहे थे आपकी सरकार बनने जा रही है। एक बार नहीं आए, हर दिन आते हैं। कोई ऐसा दिन नहीं है, जब हमारे सपने में आकर यह नहीं कहें कि आपकी सरकार बनने जा रही है।'
अखिलेश को सीएम योगी ने जवाब दिया
अखिलेश ने सपने में श्री कृष्ण के आने का जिक्र क्या किया, योगी आदित्यनाथ ने फिर से पलटवार कर दिया। उन्होंने अलीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'आज जब मैं खुद इस पॉवर प्रोजेक्ट का लोकार्पण करने आया हूं तो लखनऊ में कुछ लोगों को सपने आ रहे होंगे। भगवान श्री कृष्ण उनसे बोल रहे होंगे कि अब तो अपनी नाकामयाबियों पर रो लो। जो काम तुम नहीं कर पाए वो भाजपा की सरकार ने कर दिखाया। भगवान श्री कृष्ण इनको जरूर कोस रहे होंगे। उन्होंने इनसे बोला होगा कि जब तुम्हारी सरकार थी, तब तुमने मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना के लिए कुछ नहीं किया। वहां कंस को पैदा करवाकर जवाहर बाग जरूर करवा करवा दिया।'
क्यों श्री कृष्ण बने हैं राजनीतिक मुद्दा?
भगवान श्रीकृष्ण
- फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. एमपी सिंह कहते हैं, 'बार-बार चुनावी मंचों से श्रीकृष्ण के नाम का जिक्र होने से यह तो साफ है कि श्रीराम के बाद श्रीकृष्ण भी राजनीतिक मुद्दा बन चुके हैं। अब यह जानना चाहिए कि इसके सियासी मायने क्या हैं?'
प्रो. सिंह के मुताबिक, 'यूपी चुनाव में अखिलेश यादव के बयान से सबसे पहले ध्रुवीकरण का मुद्दा उठा। एक नवंबर को उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का नाम लिया। कहा कि जिन्ना भी स्वतंत्रता के नायक थे। जाहिर बात है कि उनका यह बयान मुस्लिम वोटों के लिए था। इसके बाद से भाजपा को भी मुद्दा मिल गया।'
वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव कहते हैं, 'उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों के लिए लगभग सभी राजनीतिक दल जोर आजमाइश कर रहे हैं। सपा, बसपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम समेत सभी विपक्षी पार्टियां मुस्लिम वोटर्स पर अपना हक जताती हैं। इस बीच, जो छूट जाता है वह बहुसंख्यक हिंदू वोटर्स है। मथुरा में श्रीकृष्ण, अयोध्या में श्रीराम और काशी में काशी विश्वनाथ हिंदुओं के आस्था का विषय हैं। भाजपा यह अच्छे से जानती है। यही कारण है कि सपा ने जहां जिन्ना का मुद्दा उठाया, वहीं भाजपा ने श्रीकृष्ण का जिक्र कर दिया।'
प्रो. सिंह के मुताबिक, 'यूपी चुनाव में अखिलेश यादव के बयान से सबसे पहले ध्रुवीकरण का मुद्दा उठा। एक नवंबर को उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का नाम लिया। कहा कि जिन्ना भी स्वतंत्रता के नायक थे। जाहिर बात है कि उनका यह बयान मुस्लिम वोटों के लिए था। इसके बाद से भाजपा को भी मुद्दा मिल गया।'
वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव कहते हैं, 'उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों के लिए लगभग सभी राजनीतिक दल जोर आजमाइश कर रहे हैं। सपा, बसपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम समेत सभी विपक्षी पार्टियां मुस्लिम वोटर्स पर अपना हक जताती हैं। इस बीच, जो छूट जाता है वह बहुसंख्यक हिंदू वोटर्स है। मथुरा में श्रीकृष्ण, अयोध्या में श्रीराम और काशी में काशी विश्वनाथ हिंदुओं के आस्था का विषय हैं। भाजपा यह अच्छे से जानती है। यही कारण है कि सपा ने जहां जिन्ना का मुद्दा उठाया, वहीं भाजपा ने श्रीकृष्ण का जिक्र कर दिया।'