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राजस्थान: महिलाओं की शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए जयपुर के बस्सी गांव में एक लड़की ने खोला पुस्तकालय

Sun, 09 Jan 2022 04:37 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, जयपुर
पीटीआई, जयपुर Published by: देव कश्यप Updated Sun, 09 Jan 2022 04:37 AM IST
सार

पुस्तकालय खोलने वाली लड़की कविता सैनी ने बताया कि हमारे गांव में महिलाओं के लिए पुस्तकालय नहीं था और निकटतम पुस्तकालय 13 से 14 किमी दूर था। ऐसे में, उन्हें पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता था। और परिजनों ने छेड़छाड़ के डर से लड़कियों को बाहर जाने से मना कर दिया था। इसलिए, मैंने इस पुस्तकालय को गांव में ही खोला।

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Rajasthan Girl opens library in Jaipur Bassi village to make education easily accessible to women 
Girl opens library in Jaipur Bassi village - फोटो : ANI

विस्तार

राजस्थान के जयपुर के जस्सी गांव में एक लड़की ने सराहनीय पहल करते हुए महिलाओं की पढ़ाई को सुलभ बनाने के लिए एक पुस्तकालय खोला है। पहले राजस्थान के इस गांव के लोगों को पुस्तकालय की सुविधा के लिए 13 से 14 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, और अभिभावकों ने लड़कियों के साथ छेड़छाड़ के डर से उन्हें गांव के बाहर के पुस्तकालय में जाने से मना कर दिया था।

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अब बस्सी गांव की एक लड़की ने गांव में ही एक पुस्तकालय खोला है, जिससे अपने गांव की लड़कियों के लिए शिक्षा को सुलभ बना सके। पुस्तकालय खोलने वाली लड़की कविता सैनी ने बताया कि "हमारे गांव में महिलाओं के लिए पुस्तकालय नहीं था और निकटतम पुस्तकालय 13 से 14 किमी दूर था। ऐसे में, उन्हें पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता था। और परिजनों ने छेड़छाड़ के डर से लड़कियों को बाहर जाने से मना कर दिया था। इसलिए, मैंने इस पुस्तकालय को गांव में ही खोला।"
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कविता ने बताया कि पुस्तकालय में वर्तमान में 398 पुस्तकें हैं। उन्होंने कहा, "पुस्तकालय सुबह नौ से शाम पांच बजे तक खुला रहता है और किताबें मुफ्त में मिलती हैं।" आर्थिक आजादी के लिए बस्सी गांव की महिलाएं कढ़ाई का काम भी करती हैं। कढ़ाई के काम के अलावा, वे खिलौने भी बनाते हैं जो बाजार में 100 रुपये से 1000 रुपये के बीच बिकते हैं।
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मुख्य कार्यक्रम प्रबंधक पिंकी जैन के कहा, "कोविड-19 के मद्देनजर, गांव में कई लोगों ने अपनी नौकरी खो दी थी, ऐसे में यह हस्तशिल्प रोजगार ग्रामीणों की वित्तीय स्थिति में सुधार लाया है। हम देख रहे हैं कि इसके जरिए उनकी वित्तीय स्थिति बेहतर हो रही है।" एक पाठक ने बताया कि गांव की महिलाओं को अंग्रेजी भी सिखाई जा रही है।

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