पंजाब में खींचतान: राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कैप्टन की नींव हिलाना मुश्किल
कैप्टन से नाराजगी की अगुआई कर रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने इसी क्रम में मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति के सामने अपना पक्ष रखा। इस समिति में पंजाब के प्रभारी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, पूर्व सांसद जय प्रकाश अग्रवाल हैं...
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पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। इन चुनावों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह के सभी प्रतिद्वंदियों की नजर है। कैप्टन से रार थामने के अगुआ पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भले बने हैं, लेकिन सिद्धू के पीछे पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत तमाम नेता हैं। दूसरी तरफ कैप्टन खेमे को फिलहाल इसकी कोई परवाह नहीं है। पंजाब सरकार के एक मंत्री का कहना है कि कैप्टन इतने हल्के नहीं हैं कि छोटे-मोटे झटके में हिल जाएंगे। वह कहते हैं कि 2022 में राज्य विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए कुछ नेता अभी से अपनी वैल्यू बढ़ाने में लगे हैं।
कैप्टन से नाराजगी की अगुआई कर रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने इसी क्रम में मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति के सामने अपना पक्ष रखा। इस समिति में पंजाब के प्रभारी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, पूर्व सांसद जय प्रकाश अग्रवाल हैं। समिति ने नवजोत सिंह सिद्धू को ध्यान से सुना। इस समिति का मकसद कैप्टन और उनके विरोधी खेमे में एक तालमेल का वातावरण तैयार करके समस्या का हल खोजना है। इस पैनल ने सोमवार को पंजाब के नेता सुनील जाखड़ समेत अन्य कांग्रेसी नेताओं से भी मुलाकात की थी। अभी यह पैनल पंजाब के कुछ नेताओं से भी मिलेगा और उनका पक्ष सुनेगा।
क्या है नाराजगी की वजह?
पैनल से मिलने वाले नेताओं ने कैप्टन की कार्यशैली पर सवाल उठाया है। नवजोत सिंह सिद्धू समेत अन्य नाराज नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री कैप्टन से मिलना लोहे के चने चबाने जैसा है। कुछ खास किस्म के लोग ही कैप्टन को घेरे रहते हैं और पार्टी के नेता, पदाधिकारी तक उनसे नहीं मिल पाते। एक बड़ा आरोप यह भी है कि कैप्टन पंजाब की सरकार नौकरशाहों के सहारे चला रहे हैं। पार्टी नेताओं की अहमियत काफी घट गई है। पैनल से मुलाकात के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्होंने पंजाब की जनता की आवाज ऊपर तक पहुंचाई है। वह अपनी बात पर कायम हैं और उन्हें भरोसा है कि सच ही जीतेगा।
मुख्यमंत्री कैप्टन साहब अपनी चाल से चल रहे हैं
एक तरफ अंतरविरोध सतह पर आ गया है और दूसरी तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री अपनी चाल से चल रहे हैं। मुख्यमंत्री के सचिवालय में सक्रिय सूत्र की मानें तो यह हर पार्टी में चलता रहता है। सामान्य मामला है। हालांकि वह कहते हैं कि पार्टी के भीतर का अंतर विरोध चुनावों में काफी नुकसान पहुंचाता है। बताते हैं इस पूरे विरोध के पीछे पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा काफी सक्रिय हैं। इसकी वजह राज्य में कैप्टन अमरिंदर सिंह की लगातार गहराती जड़ें बताई जा रही हैं। कैप्टन खेमे के नेताओं के अनुसार राज्य सरकार का विरोध केवल अपनी अहमियत बताने के लिए हो रहा है। क्योंकि हाल में संपन्न पंचायत चुनावों में मिली सफलता ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार की मजबूती साबित कर दी है। बताते हैं किसान आंदोलन के बाद से ही पार्टी के तमाम नेताओं के भीतर एक खलबली मची है। दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में कैप्टन ने घोषणा की थी कि उन्हें केवल एक बार और अवसर दिया जाए। लेकिन पार्टी के नेताओं को राजनीति में जमे अपने मुख्यमंत्री कैप्टन ही रास नहीं आ रहे हैं।