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Bihar: समस्तीपुर और बक्सर में तेल रिजर्व की मौजूदगी के आंकलन की प्रक्रिया शुरू, ओएनजीसी ने किया है आवेदन
Mon, 30 May 2022 05:32 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 30 May 2022 05:32 PM IST
सार
बिहार के कुछ हिस्सों में पहले भी तेल भंडार की खोज की जा चुकी है, लेकिन कोई व्यावसायिक सफलता हाथ नहीं लगी थी। हालांकि, इसने आगे की खोज के लिए मूल्यवान भूवैज्ञानिक जानकारी जुटाने में मदद की थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
बिहार सरकार ने समस्तीपुर और बक्सर जिलों में तेल रिजर्व की मौजूदगी का आंकलन करने के लिए पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (पीईएल) देने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य की अतिरिक्त मुख्य सचिव सह खदान आयुक्त हरजोत कौर बम्हरा ने रविवार को यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि तेल एवं प्राकृतिक गैस निगन (ओएनजीसी) ने ओपन फील्ड लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत समस्तीपुर और बक्सर जिलों में तेल रिजर्व की मौजूदगी का आंकलन करने और उत्पादन करने के लिए पीईएल पाने के लिए आवेदन किया है।
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बम्हरा ने कहा कि गंगा बेसिन में समस्तीपुर (308.32 वर्ग किमी) और बक्सर (52.13 वर्ग किमी) में तेल भंडार की उपस्थिति का आकलन करने के लिए अन्वेषण प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू होगी। खान एवं भूविज्ञान विभाग ने इस संबंध में दोनों जिलों के प्रशासनिक प्रमुखों को अवगत करा दिया है।
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ओएनजीसी का दोनों ब्लॉक के लिए आवेदन
ओएनजीसी ने दोनों ब्लॉकों के लिए पीईएल के अनुदान के लिए क्षेत्र के मानचित्र और अनुसूची की प्रतियों के साथ आवेदन शुल्क का भुगतान किया है।
इसने खान एवं भूविज्ञान विभाग को लिए अनुरोध पत्र में कहा है कि क्षेत्र के लिए एक पीईएल पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम 1959 के नियम 5(1) के प्रावधानों के तहत दिया जा सकता है। पीईएल की अभीष्ट अवधि चार वर्ष है।
इस तरह होगा तेल भंडार की खोज का काम
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पहला चरण नवीनतम भूकंपीय डाटा रिकॉर्डिंग प्रणाली का उपयोग करके 2डी भूकंपीय सर्वेक्षण करने का होगा। इसके बाद उन्नत तकनीक का उपयोग करके भू-रासायनिक सर्वेक्षण शुरू होगा। सर्वेक्षणों को आने वाले दिनों में गुरुत्वाकर्षण चुंबकीय और मैग्नेटो-टेल्यूरिक (एमटी) सर्वेक्षणों के साथ पूरा किया जाएगा।
बिहार के कुछ हिस्सों में पहले भी तेल भंडार की खोज की जा चुकी है, लेकिन कोई व्यावसायिक सफलता हाथ नहीं लगी थी। हालांकि, इसने आगे की खोज के लिए मूल्यवान भूवैज्ञानिक जानकारी जुटाने में मदद की थी।