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Uniform Civil Code: मुस्लिम मंच की मांग- समान नागरिक संहिता लागू हो, वक्फ बोर्ड और मदरसों पर लगाम जरूरी
Mon, 19 Sep 2022 10:26 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 19 Sep 2022 10:26 PM IST
सार
'भारत फर्स्ट' के राष्ट्रीय संयोजक शिराज कुरैशी ने बताया कि बैठक में समान नागरिक संहिता या एक राष्ट्र-एक कानून की आवश्यकता और सामाजिक महत्व के ऐसे अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई और इसे वक्त की जरूरत बताया गया।
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Uniform Civil Code
- फोटो : Istock
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विस्तार
मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों के मंच 'भारत फर्स्ट' के राष्ट्रीय कोर के सदस्यों की एक अहम बैठक हुई। इसमें समान नागरिक संहिता, मदरसों के सर्वे, जनसंख्या नियंत्रण कानून और वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर चिंतन किया गया। बैठक में देशभर से शामिल हुए कार्यकर्ताओं ने सरकार के कदमों का समर्थन किया और इसे राष्ट्रहित में बताया।
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'भारत फर्स्ट' के राष्ट्रीय संयोजक शिराज कुरैशी ने बताया कि बैठक में समान नागरिक संहिता या एक राष्ट्र-एक कानून की आवश्यकता और सामाजिक महत्व के ऐसे अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई और इसे वक्त की जरूरत बताया गया।
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दूसरी ओर, 'भारत फर्स्ट' ने उत्तर प्रदेश में मदरसा सर्वेक्षण के कदम का समर्थन किया और इसे देशभर में लागू करने की जरूरत बताया। इस मंच का यह भी मानना है कि बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना देश की प्रमुख चिंताओं में से एक है।
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मंच के सह-संयोजक इमरान चौधरी और मिर्जा साजिद बेग ने बताया कि वक्फ बोर्ड ने हाल ही में तमिलनाडु के थिरुचेंदुरई के सात गावों की पूरी जमीन पर अपना दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इसे जल्द से जल्द हल करने की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत सदियों से विभिन्न धर्मों और धर्मों की भूमि रही है। लेकिन विविधताओं के बावजूद इसने 'एक राष्ट्र-एक लोग' के सिद्धांत का पालन और अभ्यास किया है। सामान्य नागरिक संहिता की शुरूआत स्वतंत्रता के बाद से ही दृढ़ता से महसूस की जाती है। लेकिन राजनीतिक कारणों से यह अभी तक अमल में नहीं लायी जा सकी है।
'भारत फर्स्ट' के मुफ्ती जाहिद खान और मोहम्मद अब्बास का मानना है कि यह सोचना गलत होगा कि सामान्य नागरिक संहिता व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करेगी। गोवा में कॉमन सिविल कोड पहले से ही लागू है और अब उत्तराखंड इसे लागू करने की योजना बना रहा है। इसलिए कानून और न्याय के हित में भारत फर्स्ट की यह बैठक भारत के सभी नागरिकों के लिए 'एक राष्ट्र एक कानून' सिद्धांत की शुरूआत का पुरजोर समर्थन करता है और केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि इसे पूरी तरह लागू किया जाए।
'भारत फर्स्ट' का मदरसों के सर्वे के बारे में विचार है कि इस तरह के अभ्यास से इस्लाम के छात्रों के बीच 'कट्टरता' को रोकने में मदद मिलेगी और उनके शैक्षिक मानकों में बदलाव आएगा। ऐसे सर्वेक्षण उन मामलों में किए जा रहे हैं जहां संस्थान बौद्ध, ईसाई और यहां तक कि आर्य समाज द्वारा चलाए जा रहे हैं। मदरसों की शिक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलाव लाने के लिए इस तरह का सर्वेक्षण करने में कुछ भी गलत नहीं है।
मंच ने बयान में आगे कहा कि कुछ अपंजीकृत मदरसों में छात्रों की स्थिति अधिक दयनीय होती है और उन्हें बाहर की बदलती दुनिया को देखने की भी अनुमति नहीं है, जो कि चिंता का सबसे बड़ा कारण है और यह कट्टरता की ओर ले जाता है। बयान में कहा गया कि मदरसे के छात्रों को देश की मुख्यधारा में शामिल होने और समय के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए इसकी जांच करने करने की आवश्यकता है।
भारत फर्स्ट के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका यह भी विचार है कि मदरसों के छात्रों को तकनीकी, पेशेवर और कौशल प्रशिक्षण देने की जरूरत है ताकि वे अपने दम पर खड़े हो सकें। इसलिए, इन शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम और शिक्षण पैटर्न का पता लगाने के लिए सर्वे आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे मदरसे हैं जो अपंजीकृत हैं और शिक्षा विभागों द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं करते हैं। इस दौरान भारत फर्स्ट के पदाधिकारियों ने देश की जनसंख्या को नियंत्रण करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को सख्त मानदंड पेश करने चाहिए और उन्हें सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य रूप से लागू करना चाहिए। साथ ही, मंच का मानना है कि पूरे देश में वक्फ के स्वामित्व वाली संपत्तियों के साथ राजनीति की जा रही है। तमिलनाडु की घटना वक्फ अधिनियम की तत्काल समीक्षा की भारत फर्स्ट मांग करता है और मुस्लिम समुदाय के लिए इसे और अधिक उपयोगी बनाने की जरूरत है।