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#LadengeCoronaSe: संकट के दौर में बेबसों का सहारा... दूसरों के आंसू पोंछना बन गया मिशन
Sat, 01 May 2021 05:45 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 01 May 2021 05:45 AM IST
सार
कुछ लोग ऐसे भी जो इस कोरोना काल में लोगों की दिल खोलकर मदद कर रहे हैं। चाहे वो भोपाल के जावेद हों जिन्होंने अपना ऑटो एंबुलेंस में बदल लिया। या नागपुर के सरदार जी हों, जो लॉकडाउन में फंसे लोगों को खाना खिला रहे है। और चाहे गुजरात के दंपती, जिन्होंने एक-दूसरे की हौसलाअफजाई और सकारात्मक रुख रखकर कोरोना को हरा दिया।
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कोरोना वायरस
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
ये वो लोग हैं, जिनसे दूसरों की तकलीफ नहीं देखी गई...दूसरों की तकलीफ में उनका दिल रोता है और ये कहानियां उनकी है जो संकट में एक दूसरे का सहारा बनकर मुश्किल का दौर काटने में मदद कर रहे हैं।
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परिजनों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दर दर भटकते लोगों की बेबसी देखकर भोपाल के जावेद ने अपने ऑटो को जीवनरक्षक एंबुलेंस बना लिया तो नागपुर के सरदारजी लॉकडाउन में फंसकर भूख से परेशान लोगों को खाना पहुंचा रहे रहे हैं। और हां एक प्रेरक प्रसंग अहमदाबाद के बुजुर्ग दंपती का , जिन्होंने गंभीर हालात में पहुंचकर भी एक दूसरे को हौसला दिया और स्वस्थ हुए।
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भोपाल: गहने बेच ऑटो को बदला एंबुलेंस में शुरू की निशुल्क सेवा
मन में अगर किसी की सेवा करने का इच्छा हो तो संसाधन कभी रुकावट नहीं बनते। ऐसी ही कहानी है भोपाल के जावेद खान की। उन्होंने अपने थ्री व्हीलर को एक एंबुलेंस में तब्दील कर लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं वो भी नि:शुल्क। खान के ऑटो में ऑक्सीजन सिलिंडर , पीपीई किट, सैनिटाइजर और ऑक्सीमीटर जैसे जरूरी उपकरणों से लैस है।
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खान ने बताया कि सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों में एंबुलेंस की कमी की वजह से लोगों को मरीजों को कंधों और ठेले में ले जाने वाली हृदय विदारक खबरों को देखकर उनके मन में लोगों की मदद करने का विचार आया। उनकी इस पहल में उन्हें पत्नी का साथ मिला। ऑटो में ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने के लिए पत्नी की सोने की चेन 5000 रुपये में बेच दी।
उन्होंने बताया कि वे इसके लिए कोई पैसे नहीं लेते। लोगों को निर्बाध मदद मिलती रहे इसके लिए वह चार से पांच घंटे लाइन में खड़े रहकर ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाते हैं। जावेद ने सोशल मीडिया में अपना नंबर 7999909494 साझा किया है ताकि वह ज्यादा सेे ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
नागपुर: सड़कों पर भूखों के मसीहा बने ‘सरदार जी’
कोरोना की दूसरी लहर में फिर से कई जगह लॉकडाउन होने से शहरों में रहने वाले बेघर और गरीब लोगों को खाना नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में कई गुमनाम हीरो इन तक रोज निवाला पहुंचा रहे हैं।
नागपुर में इन दिनों एक ‘सरदार जी’ यह भूखों के अन्नदाता के रूप में मशहूर हो गए हैं। रोज अपने स्कूटर पर शहरभर में बेघर लोगों को खाना देकर बड़ी खामोशी से अपने घर लौट जाते हैं। एक ओर कई लोग छोटी-छोटी चीजों के दान में दिखावा करते हैं, वहीं सरदार जी बिना प्रचार के लोगों की सेवा में जुटे हैं। जब लोग इनसे फोटो खिंचवाने को कहते हैं तो अनिच्छा जाहिर कर देते हैं। कहते हैं, मुझे दिखने का कोई शौक नहीं बल्कि भूखों का पेट भरना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है।
हाल ही में एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर इस मसीहा की कहानी साझा की तो लोग उन्हें सलाम करने लगे। यूजर ने लिखा कि मैं कई दिनों से सरदार जी को सेवा करते हुए देख रहा था। मैंने उनसे फोटो खिंचवाने की गुजारिश की पहले संकोच करने लगे फिर राजी हो गए। जब लोगों तक उनकी कहानी पहुंची तो उन्होंने इस अन्नदाता को निस्वार्थ सच्ची सेवा करने वाला हीरो करार दिया।
अहमदाबाद: इक दूजे का बने सहारा आईसीयू में साथ दी कोरोना को मात
परिवार में किसी को भी कोरोना हो जाए तो घर में फौरन नकारात्मक माहौल हो जाता है। लेकिन गुजरात के गांधीनगर निवासी दिनेश मोदी और उनकी पत्नी सुशीलाबेन मोदी ने आईसीयू में गंभीर स्थिति में पहुंचने के बावजूद एक-दूसरे की हौसलाअफजाई और सकारात्मक रुख रखकर कोरोना को हरा दिया। एक मोड़ पर पत्नी के 85 फीसदी फेफड़े संक्रमित हो चुके थे और ऑक्सीजन 60 पर पहुंच गई थी।
वहीं, पति के फेफड़ों में भी 65 फीसदी संक्रमण था पर दोनों ने मनोबल गिरने नहीं दिया। डॉक्टरों के परिश्रम और इन दोनों के मजबूत हौंसले के बल पर यह कोरोना को मात देने में कामयाब रहे। दिनेश बताते हैं कि जब पत्नी गंभीर हुई तो मैंने उनका ढाढस बंधाया और जब मेरी तबीयत बिगड़ी तो पत्नी ने साथ दिया।