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बिहार: चारों ओर से परेशानियों में घिरे तेजस्वी, महागठबंधन की राह मुश्किल

Sun, 25 Nov 2018 02:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Updated Sun, 25 Nov 2018 02:46 PM IST
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Grand alliance is not easy for RJD, due to these problems of Tejashwi 
तेजस्वी यादव - फोटो : PTI

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए महागठबंधन की रफ्तार काफी धीमी दिखाई दे रही है। इस वक्त पार्टी की कमान अकेले तेजस्वी यादव संभाल रहे हैं। उन्हें एक नहीं बल्कि कई मोर्चे अकेले ही संभालने पड़ रहे हैं।फिर चाहे पिता लालू प्रसाद यादव का रेलवे टेंडर वाला मामला हो या फिर उनकी खराब होती सेहत। इसके अलावा लालू जेल की सजा भी काट रहे हैं जिसके चलते वह कुछ भी कर पाने में असक्षम हैं।  

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साथ ही बड़े भाई तेज प्रताप और उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय के बीच चल रही तलाक की बात भी पार्टी के लिए अच्छी नहीं है। तेजस्वी के लिए परिवार की परेशानियों को दूर करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा बिहार विधानसभा चुनावों की राह भी बेहद मुश्किल हो सकती है। दूसरी पार्टियां तेज प्रताप और ऐश्वर्या राय का मुद्दा चुनावों के समय उठा सकती हैं।
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तेज प्रताप के बयान भी खड़ी कर सकते हैं मुसीबत

चुनावों के समय तेजस्वी के लिए बड़े भाई तेज प्रताप के बयान भी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। हाल ही में उन्होंने पत्नी से तलाक की अर्जी कोर्ट में दाखिल की थी। उन्होंने इसके बाद कई ऐसे बयान दिए जो पार्टी के लिए खतरा बन सकते हैं। तेज प्रताप ने कहा था कि उनकी शादी राजनीतिक लाभ के लिए कराई गई थी। परिवार और पार्टी के लोगों ने अपने लाभ के लिए उन्हें फंसाया था। इससे राजद का वोट बैंक भी कम हो सकता है। 
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भाजपा-जदयू की संयुक्त ताकत से लड़ना आसान नहीं

भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) की संयुक्त ताकत से लड़ना भी राजद के लिए मुश्किल होगा। अभी परिवार के कानूनी पचड़े खत्म होना भी तेजस्वी के लिए जरूरी है। कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। वहीं कांग्रेस के नेता भी अन्य राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों के चलते व्यस्त हैं। 


वकीलों से सलाह लेने में ही गुजरा पूरा हफ्ता

रेलवे टेंडर घोटाला मामले की सुनवाई के लिए तेजस्वी बीते हफ्ते दिल्ली गए थे। अब वह पटना लौट आए हैं। लेकिन इस दौरान उनकी मुलाकात न तो अन्य दलों के किसी नेता से हुई और न ही किसी से सीट बंटवारे को लेकर कोई बात हुई। हालांकि तेलुगुदेशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा विरोधी दलों के साथ 22 नवंबर को बैठक की योजना बनाई थी। इस बैठक में तेजस्वी को भी शामिल होना था। लेकिन बाद में बैठक ही टल गई। फिलहाल तेजस्वी कानूनी परेशानियों में फंसे हुए हैं, जिनसे निपटना उनके लिए बेहद जरूरी है। तभी वह महागठबंधन पर ध्यान दे पाएंगे। 

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