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पंजाब में बीजेपी-अकाली दल के बीच नहीं बैठ रहा तालमेल

Tue, 17 Jan 2017 09:24 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 17 Jan 2017 09:24 AM IST
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Differences between akali dal and BJP in Punjab
फाइलः अमित शाह - फोटो : ANI
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन लगातार तीसरी बार सत्ता संभालने के लिए विधानसभा चुनाव में उतरा है। शिअद ने जहां अपना चुनाव अभियान कई महीने पहले ही शुरू दिया और अपने आधे से ज्यादा प्रत्याशियों का ऐलान भी दिसंबर तक कर दिया था, वहीं भाजपा की स्थिति अभी तक डावांडोल बनी हुई थी। हालांकि पार्टी ने सोमवार को अपने हिस्से की शेष बची छह सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए। भाजपा सूबे में 23 सीटों में चुनाव लड़ रही है। 
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भाजपा की छवि विधानसभा चुनाव को लेकर उदासीन दिखाई दे रही है, जिससे शिअद का रवैया भी अपनी सहयोगी पार्टी को लेकर उदासीन दिखने लगा है। गठबंधन के तहत शिअद इस बार भी 94 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इन सीटों के लिए पार्टी ने लगभग अपने सभी प्रत्याशियों का एलान भी कर दिया है। 
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इसके अलावा चुनाव आयोग को अपने स्टार कैंपेनरों की सूची भी सौंप दी है। वहीं, पंजाब भाजपा अब तक यह दावा ही कर रही है कि पार्टी प्रत्याशियों के प्रचार के लिए केंद्र सरकार के कई बड़े नेता पंजाब का दौरा करेंगे। जाहिर है, भाजपा को 16 दिन में ही सबकुछ करना है। भाजपा के हिस्से की सीटों पर भी पिछले हफ्ते तक भाजपा वर्कर परेशान रहे क्योंकि उन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि उनके इलाके से प्रत्याशी कौन है? 
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पिछले हफ्ते भाजपा ने 17 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए, लेकिन पंजाब में पार्टी का चेहरा माने जाने वाले नेताओं के नामों पर फैसला नहीं लिया था। नतीजतन बाकी 6 सीटों के एलान से पहले ही पार्टी बगावत में भी उलझ गई थी। मान-मनौव्वल का दौर चलता रहा, जिससे पार्टी वर्कर हतोत्साहित होते रहे।

 

शिअद प्रत्याशियों की रैलियों से नदारद बीजेपी

Differences between akali dal and BJP in Punjab
पिछले दो विधानसभा चुनाव के दौरान शिअद और भाजपा में सीटों बंटवारे के दौरान कई सीटों पर प्रत्याशियों की अदला-बदली का सिलसिला चलता रहा है। इस बार भी भाजपा की ओर से यह बयान आते रहे कि पार्टी शिअद से कुछ सीटों की अदलाबदली करेगी। शिअद ने भी इस पर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन लंबे समय तक भाजपा का इंतजार करने के बाद शिअद ने अपने हिस्से की सीटों पर प्रत्याशियों का एलान भी कर दिया।

इसी बीच, भाजपा प्रदेश प्रधान के इस बयान ने भी गठबंधन के दोनों दलों में दूरी का संकेत दे दिया कि भाजपा नेता शिअद प्रत्याशियों के लिए प्रचार नहीं करेंगे। इसके जवाब में शिअद की ओर से बयान तो कोई नहीं आया, लेकिन शिअद जिस तरह अपना चुनाव अभियान चला रही है, उससे साफ है कि पार्टी यह मानकर चल रही है कि उसे फिर से सत्तारूढ़ होने के लिए अपने बूते पर ही चुनाव जीतना होगा। 

इन दिनों चुनाव प्रचार में जुटे शिअद प्रत्याशी अपने हलकों में भाषणों के दौरान न तो भाजपा का जिक्र करते हैं और भाजपा के वर्कर भी शिअद प्रत्याशियों की रैलियों से नदारद हैं।
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