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नियमों की अनदेखी: डीयू ने शिक्षा मंत्रालय के अनुबंध को रखा ताक पर, 5000 से ज्यादा एडहॉक शिक्षकों की नौकरियों पर संकट!

Thu, 03 Jun 2021 03:23 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 03 Jun 2021 03:23 PM IST
सार

विश्वविद्यालय में अस्थायी शिक्षकों को एडहॉक कहा जाता है। इन सभी शिक्षकों का स्तर असिस्टेंट प्रोफेसर के बराबर होता है। डीयू की कार्यकारी परिषद द्वारा बनाए गए नियम के अनुसार, कालेजों में अतिरिक्त वर्कलोड होने या किसी स्थायी शिक्षक के सेवानिवृत्त होने या उसे लंबे अवकाश पर जाने से खाली हुए पदों पर एडहॉक शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे...

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Delhi University violates the contract of the Ministry of Education, more than 5000 ad hoc teachers could lose their jobs in corona period
दिल्ली विश्वविद्यालय - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दिल्ली में एक तरफ जहां लोग कोरोना संक्रमण से परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में शुमार दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों के प्रिंसिपल एडहॉक शिक्षकों के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के साथ हुए अनुबंध की धज्जियां उड़ाते हुए एडहॉक शिक्षकों को नौकरी से भी निकाल रहे हैं। हाल ही में डीयू के अधीन आने वाले स्वामी विवेकानंद कॉलेज ने 12 एडहॉक टीचर्स को टर्मिनेट कर दिया है। इसमें आधे से ज्यादा शिक्षक कोरोना संक्रमित थे। इसे लेकर अब डीयू के टीचर्स पूरी तरह से लामबंद हो गए हैं। दो जून को DUTA के बैनर तले एक ऑनलाइन हल्ला-बोल कार्यक्रम भी हुआ। इसमें सभी टीचर्स को तत्काल पुनर्नियुक्ति देने की मांग की गई।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुबंध को नहीं मान रहे कॉलेज, विश्वविद्यालय मौन

दरअसल, दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली विवि शिक्षक संघ (डूटा) ने डीयू प्रशासन द्वारा एडहॉक शिक्षकों को पुनर्नियुक्ति नहीं दिए जाने के फैसले को लेकर 4 दिसंबर 2019 को एक बड़ा आंदोलन किया था। इसमें शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के ऑफिस का घेराव तक किया था। घंटों चले घेराव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अफसर, यूजीसी के अफसर, डीयू प्रशासन और डूटा के प्रतिनिधियों की एक बैठक 5 दिसंबर 2019 को हुई। इस बैठक में यह अनुबंध हुआ कि कॉलेजों में पढ़ा रहे एडहॉक शिक्षकों को उनके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक उनके पदों पर स्थाई नियुक्त नहीं हो जाती यानी स्थाई नियुक्ति होने तक तक एडहॉक शिक्षकों को बरकरार रखा जाएगा। वहीं आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (ई.डब्ल्यू.एस.) के तहत अतरिक्त सीटें भी आएंगी। इन अनुबंधों का एक रिकॉर्ड ऑफ डिस्कशन भी बनाया गया जिसे 5 दिसंबर 2019 को जारी किया गया।

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डीयू में पढ़ाने वाले एक एडहॉक टीचर अमर उजाला को बताते हैं कि सरकार के इन फैसलों के बाद भी एडहॉक शिक्षकों ने आंदोलन जारी रखा क्योंकि उनकी समायोजन की मांग पूरी नहीं हुई थी। 5 दिसंबर 2019 के एमएचआरडी के रिकॉर्ड ऑफ डिस्कशन का संज्ञान लेते हुए डीयू प्रशासन ने 20 दिसंबर 2019 को अपने कॉलेजों और संस्थाओ को एक पत्र जारी किया। इसमें सरकार के रिकार्ड ऑफ डिस्कशन की कुछ बातों का ही जिक्र किया गया। जबकि इस पत्र में कॉलेज और संस्थाओं के खाली पदों पर जब तक स्थाई नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक एडहॉक टीचर्स को नहीं हटाया जाएगा। इस महत्वपूर्ण बात का उल्लेख तक नहीं किया गया। इस पत्र की कई विसंगतियों को लेकर एडहॉक शिक्षकों का समायोजन आंदोलन 108 दिनों तक जारी रहा। मार्च 2020 में कोविड संक्रमण की पहली लहर के चलते ये आदोलन डूटा ने पुनः शुरू करने की बात करते हुए स्थगित कर दिया।

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एडहॉक शिक्षकों के रिन्यूअल के लिए नहीं माना जा रहा आदेश

दिल्ली विश्वविद्यालय के एडहॉक शिक्षकों की मांग है कि वह तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जारी 5 दिसंबर 2019 के अनुबंध के मुताबिक कॉलेज उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान करें। जिसके तहत विश्वविद्यालय में काम करने वाले सभी तदर्थ शिक्षक, स्थाई शिक्षक की भर्ती तक अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। एडहॉक शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि सभी को नए सिरे से नियुक्ति पत्र दिए जाएं, जिसमें 5 दिसंबर 2019 के एमएचआरडी के रिकॉर्ड ऑफ डिस्कशन का लिखित उल्लेख हो।

अमर उजाला से चर्चा करते हुए दिल्ली विवि शिक्षक संघ (डूटा) के अध्यक्ष राजीब रे ने कहा, कोरोना के इस कालखंड में डीयू के कॉलेजों और संस्थाओं से एडहॉक टीचर्स को जॉब से निकालना बहुत ही ग़लत है। इस मामले में हम डीयू प्रशासन को भी अवगत करवा चुके हैं लेकिन किसी ने टीचर्स के लिए कदम नही उठाया। सरकार के पत्र के बाद भी अभी तक टीचर्स को रिन्यूअल का पत्र नहीं दिया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य डॉ. सुधांशु कुमार ने अमर उजाला को बताया कि भारत सरकार ने दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ जो समझौता किया था आज डीयू उसका पालन नहीं कर रहा है। आज गलती पूरी तरह से एडमिनिस्ट्रेशन की है और उसकी सजा एडहॉक शिक्षक भुगत रहे हैं। इस मामले को कई बार काउंसिल की बैठक में उठा चुके है और आगे भी उठाएंगे।

अमर उजाला से चर्चा करते हुए विवेकानंद कॉलेज के निकाले हुए एडहॉक शिक्षकों ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय सरेआम केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के 5 दिसंबर 2019 के प्रावधान का उल्लंघन कर रहा है। पहले की तरह ही सभी एडहॉक शिक्षकों को प्राचार्य की दया दृष्टि पर छोड़ दिया गया है जिससे आए दिन किसी ना किसी कॉलेज में एडहॉक शिक्षकों को निकाला जा रहा है या उनका उत्पीड़न हो रहा है। एडहॉक टीचर डॉ. संत प्रकाश ने बताया कि हमारी मांग है कि हमें जल्द से जल्द समायोजित किया जाए। दिल्ली विश्वविद्यालय में एक दशक से ज्यादा समय से सही तरीके से नियुक्तियां नहीं हुई हैं, जबकि पढ़ाने वाले हर एडहॉक शिक्षक ने कई बार फॉर्म भरे हैं लेकिन हर बार इंटरव्यू नहीं हुए।

उन्होंने बताया कि हमारी नौकरियों की कोई सुरक्षा नहीं है। हर चार महीने पर रिचार्ज कूपन की तरह एक पत्र मिलता है, जिसके जरिए हमें रिन्यू किया जाता है, अगले चार महीने बाद पुनर्नियुक्ती मिलेगी भी कि नहीं, इसे लेकर भी डर बना रहता है, न जॉब की सिक्योरिटी है और न ही छुट्टियों का ही कोई उचित प्रावधान है। इस सिस्टम में एडहॉक शिक्षकों का उत्पीड़न हो रहा है। एडहॉक शिक्षक डॉ. विशाल पांडेय ने बताया कि हम लोगों की सैलरी में कभी इंक्रीमेंट नहीं होता न कोई मेडिकल सुविधा है। एडहॉक महिला साथियों को मैटरनिटी लीव नहीं मिलती। हर परिस्थितियों में एडहॉक शिक्षक काम करते हैं। हमारा मानना है कि सामान्य प्रक्रिया से एडहॉक शिक्षकों को स्थायी नहीं किया जा सकता क्योंकि किसी न किसी कारणवश या बहाने से यहां नियमों में बदलाव किया जाता है। कभी रोस्टर प्रणाली में बदलाव, तो कभी किसी तरह का संशोधन। देश के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश में एडहॉक शिक्षकों को स्थायी किया जा गया है तो दिल्ली विश्वविद्यालय में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

कौन है एडहॉक टीचर्स

विश्वविद्यालय में अस्थायी शिक्षकों को एडहॉक कहा जाता है। इन सभी शिक्षकों का स्तर असिस्टेंट प्रोफेसर के बराबर होता है। डीयू की कार्यकारी परिषद द्वारा बनाए गए नियम के अनुसार, कालेजों में अतिरिक्त वर्कलोड होने या किसी स्थायी शिक्षक के सेवानिवृत्त होने या उसे लंबे अवकाश पर जाने से खाली हुए पदों पर एडहॉक शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। डीयू का नियम कहता है कि एडहॉक शिक्षक की नियुक्ति अधिकतम चार महीने यानी 120 दिन के लिए की जाएगी। इनकी संख्या विश्वविद्यालय के कुल शिक्षकों के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होगी और विश्वविद्यालय प्रशासन इन्हीं 120 दिनों में रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति कर देगा। लेकिन डीयू प्रशासन ने इन रिक्त पदों पर सालों से स्थाई नियुक्ति नहीं की। इन पदों पर एडहॉक शिक्षकों से 120 दिन के रिचार्ज कूपन से सालों से पढ़वाया जा रहा है जो कि अवैधानिक है। इस अवैधानिक प्रक्रिया के चलते आज डीयू में एडहॉक शिक्षकों की संख्या लगभग पांच हज़ार से ज्यादा है जो कि डीयू के कुल शिक्षकों की संख्या के 50 फीसदी से भी अधिक है।

57 कॉलेजों में पढ़ाई की जिम्मेदारी 3500 से ज्यादा एडहॉक टीचर्स पर: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय

हाल ही में फ़रवरी माह के बजट सत्र में सांसद विश्वम्भर प्रसाद निषाद, चौधरी सुखराम सिंह यादव और अन्य सांसदों ने एडहॉक शिक्षकों की लगातार बढ़ती संख्या औऱ दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थायी शिक्षकों को नियुक्त नहीं किए जाने के कारण और इन कारणों के समाधान का प्रश्न केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल से सवाल पूछा था। इसके जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने सूचित किया है कि डीयू के विभागों में अकादमिक वर्ष 2020- 21 में लगभग 56 तदर्थ शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। रिक्त पदों को भरना एक सतत और निरंतर प्रक्रिया है। संसद के अधिनियम के तहत सृजित एक स्वायत्त निकाय होने के नाते, पदों को भरने का अधिकार विश्वविद्यालय का है। यूजीसी विनियमों के अनुसार विश्वविद्यालय प्रणाली में सभी स्वीकृत, अनुमोदित पदों के तत्काल आधार पर भरा जाना है। यूजीसी के साथ-साथ मंत्रालय इस प्रक्रिया की निरंतर निगरानी कर रहा है।

फरवरी 2021 को संसद में को दिए अपने जवाब में मंत्रालय ने यह भी कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में 60 से 70 फीसदी शिक्षकों के पदों पर लंबे समय से एडहॉक शिक्षक कार्य कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने 57 ऐसे कॉलेजों के आंकड़े दिए हैं जहां बड़ी तादाद में एडहॉक शिक्षक हैं। इनमें कई कॉलेज देशभर में छात्रों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के मुताबिक दौलतराम कॉलेज में 135 एडहॉक शिक्षक, रामजस कॉलेज में 134, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में 126, कालिंदी कॉलेज में 114, देशबंधु कॉलेज में 110, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में 109, दयालसिंह कॉलेज में 104, शहीद राजगुरू कॉलेज में 96, माता सुंदरी कॉलेज में 99, गार्गी कॉलेज में 87, कमला नेहरू कॉलेज में 84, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में 84, किरोड़ीमल कॉलेज में 81, इंद्रप्रस्थ कॉलेज में 79, श्री अरबिंदो कॉलेज में 75, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में 75 एडहॉक शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

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