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पूर्व मंत्री के करीबी के हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा, निशाना शशि नहीं कोई और था
amarujala.com, Presented by: शारुख खान
Updated Mon, 27 Nov 2017 11:02 PM IST
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निशाना कोई और था लेकिन मारा शशि गया। जब पुलिस ने गिरफ्तार नामजद आरोपियों से पूछताछ की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। घटना उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ठा. जयवीर सिंह के करीबी रहे शशि चौहान की हत्या के मूल में जो बातें छनकर आई हैं, वह चौंकाने वाली हैं। हत्याकांड में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों से पूछताछ और अब तक की जांच पर गौर करें तो शशी व अर्शी दोस्त थे।
अर्शी के निशाने पर शशि चौहान था ही नहीं। वह तो अपने सगे भाई शकील द्वारा बसपा प्रत्याशी को सपोर्ट व वोट देने पर नाराज था। इसी बात पर उसने पोलिंग बूथ पर ही भाई को गोली मारने तक की धमकी दे दी थी और शाम को भाई पर हमला भी बोला था।
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मगर साथ बैठे दबंग छवि के शशि ने जब उसे रोकना चाहा तो अर्शी ने दूसरी गोली शशि को मार दी, जो उसकी पीठ पर लगकर सीने के पार निकल गई। पुलिस ने यह तथ्य सामने आने के बाद दोनों को जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार रविवार देर रात हुई घटना के बाद अर्शी तो मौके से भाग गया था।
मगर मौके पर मौजूद शकील निवासी धोबी वाली गली नई बस्ती और साजिद पुत्र चमन खां निवासी लोहिया नगर बन्नादेवी घायल शशी को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां मौत होने के बाद भी उन्होंने पुलिस को खबर नहीं दी।
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अर्शी के निशाने पर शशि चौहान था ही नहीं। वह तो अपने सगे भाई शकील द्वारा बसपा प्रत्याशी को सपोर्ट व वोट देने पर नाराज था। इसी बात पर उसने पोलिंग बूथ पर ही भाई को गोली मारने तक की धमकी दे दी थी और शाम को भाई पर हमला भी बोला था।
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मगर साथ बैठे दबंग छवि के शशि ने जब उसे रोकना चाहा तो अर्शी ने दूसरी गोली शशि को मार दी, जो उसकी पीठ पर लगकर सीने के पार निकल गई। पुलिस ने यह तथ्य सामने आने के बाद दोनों को जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार रविवार देर रात हुई घटना के बाद अर्शी तो मौके से भाग गया था।
मगर मौके पर मौजूद शकील निवासी धोबी वाली गली नई बस्ती और साजिद पुत्र चमन खां निवासी लोहिया नगर बन्नादेवी घायल शशी को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां मौत होने के बाद भी उन्होंने पुलिस को खबर नहीं दी।
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- फोटो : FILE PHOTO
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ही पुलिस को सूचना दी। तब परिवार व सत्तन सिंह आदि को सूचना मिली। इस दौरान दोनों डॉक्टरों के सवालों का जवाब देने से भी बचते रहे। मगर जब पुलिस वहां पहुंची और यह सवाल उठाया कि इन्हें कौन यहां लाया और इतनी देर में सूचना क्यों दी, तब यह दोनों सामने आए।
जब पुलिस के सवालों में दोनों उलझे तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। बाद में परिजनों की तहरीर पर यह दोनों मुकदमे में नामजद हुए और रात में जब इनसे परिजनों आदि के सामने ही पूछताछ हुई तो उन्होंने बताया कि शशी व अर्शी दोनों अच्छे दोस्त थे।
पढ़ें:- अवैध संबंधों में प्रेमी से कराई पति की हत्या, सच जानकर पुलिस भी रह गई हैरान
शहर विधानसभा से जुड़े बसपा के बड़े नेता की मदद से अर्शी पार्षद का टिकट मांग रहा था। मगर यह टिकट दूसरे को मिल गया। इस पर अर्शी ने उसके विरोध में कांग्रेस प्रत्याशी का सपोर्ट शुरू कर दिया। मगर परिवार बसपा प्रत्याशी को ही सपोर्ट कर रहा था।
उसके विरोध पर परिजनों ने समझाया था और खुद शशी ने भी यह कहकर समझाया था कि जब परिवार बसपा को सपोर्ट कर रहा है तो तू भी साथ हो जा। इस बात पर दोनों में विवाद भी हुआ। अर्शी को लगा कि शशी भी उसका विरोध कर रहा है, इसलिए वह उससे भी खफा हो गया था।
जब पुलिस के सवालों में दोनों उलझे तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। बाद में परिजनों की तहरीर पर यह दोनों मुकदमे में नामजद हुए और रात में जब इनसे परिजनों आदि के सामने ही पूछताछ हुई तो उन्होंने बताया कि शशी व अर्शी दोनों अच्छे दोस्त थे।
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शहर विधानसभा से जुड़े बसपा के बड़े नेता की मदद से अर्शी पार्षद का टिकट मांग रहा था। मगर यह टिकट दूसरे को मिल गया। इस पर अर्शी ने उसके विरोध में कांग्रेस प्रत्याशी का सपोर्ट शुरू कर दिया। मगर परिवार बसपा प्रत्याशी को ही सपोर्ट कर रहा था।
उसके विरोध पर परिजनों ने समझाया था और खुद शशी ने भी यह कहकर समझाया था कि जब परिवार बसपा को सपोर्ट कर रहा है तो तू भी साथ हो जा। इस बात पर दोनों में विवाद भी हुआ। अर्शी को लगा कि शशी भी उसका विरोध कर रहा है, इसलिए वह उससे भी खफा हो गया था।