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सेंट्रल जेल में कैदी 50 फीट ऊपर पेड़ पर चढ़ा, फिर गमछे से लटक गया, ये थी वजह
amarujala.com, Presented by: शारुख खान
Updated Tue, 03 Oct 2017 12:17 AM IST
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फाइल
- फोटो : सांकेतिक चित्र
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एक कैदी जेल के अंदर 50 फीट ऊपर पेड़ पर चढ़ा और फिर अपने गमछे का फंदा बनाकर लटक गया। जानिए उसने ऐसा क्यों किया?...
घटना उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की है। सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी कल्याण यादव की लाश सोमवार दोपहर गमछे के सहारे जामुन के पेड़ पर जमीन से करीब 50 फुट ऊपर लटकती मिली।
ढाई घंटे की जद्दोजहद के बाद फायर ब्रिगेड की मदद से शव को नीचे उतारा जा सका। कैदी पेड़ पर चढ़ता रहा और उसे किसी ने देखा नहीं, इसको लापरवाही मानते हुए बंदी रक्षक संजीव को निलंबित कर दिया गया है।
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बदायूं के कुंवरगांव निवासी कल्याण पुत्र चंद्रपाल यादव ने सितंबर 2005 को अपनी भाभी ओमवती की गला रेतकर हत्या कर दी थी और तीन साल की भतीजी क्रांति को गायब कर दिया था।
उनके शरीर बरामद नहीं हो सके थे, सिर्फ बाल मिले थे। कोर्ट ने 14 जुलाई 2009 को कल्याण यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेल अधीक्षक केदारनाथ के मुताबिक 25 मार्च 2012 को बदायूं से कल्याण सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था। सर्किल चार की बैरक नंबर चार में उसे रखा गया था।
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घटना उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की है। सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी कल्याण यादव की लाश सोमवार दोपहर गमछे के सहारे जामुन के पेड़ पर जमीन से करीब 50 फुट ऊपर लटकती मिली।
ढाई घंटे की जद्दोजहद के बाद फायर ब्रिगेड की मदद से शव को नीचे उतारा जा सका। कैदी पेड़ पर चढ़ता रहा और उसे किसी ने देखा नहीं, इसको लापरवाही मानते हुए बंदी रक्षक संजीव को निलंबित कर दिया गया है।
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बदायूं के कुंवरगांव निवासी कल्याण पुत्र चंद्रपाल यादव ने सितंबर 2005 को अपनी भाभी ओमवती की गला रेतकर हत्या कर दी थी और तीन साल की भतीजी क्रांति को गायब कर दिया था।
उनके शरीर बरामद नहीं हो सके थे, सिर्फ बाल मिले थे। कोर्ट ने 14 जुलाई 2009 को कल्याण यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेल अधीक्षक केदारनाथ के मुताबिक 25 मार्च 2012 को बदायूं से कल्याण सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था। सर्किल चार की बैरक नंबर चार में उसे रखा गया था।
फिरोजपुर की सेंट्रल जेल
दोपहर करीब 1.35 बजे उसकी लाश देखी गई। माना जा रहा है कि उसने करीब 1.20 पर आत्महत्या की होगी। इज्जतनगर थाने से इंस्पेक्टर नरेश त्यागी के पहुंचने के बाद शव उतारने की कोशिश शुरू हुई। फायर ब्रिगेड की गाड़ी मंगाई गई।
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सीढ़ी लगाकर लाश को नीचे उतारा जा सका। इस बीच डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव सहित तमाम प्रशासकीय अधिकारी भी जेल पहुंचे। जेल प्रशासन के मुताबिक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उसने अवसाद में आत्महत्या की है।
डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने कहा कि कैदी ने पेड़ पर लटककर खुदकुशी की है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सुपुर्द किया जाएगा। परिवार को सूचना भेजी गई है। प्रधान बंदी रक्षक की लापरवाही मानते हुए निलंबित किया गया है।
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सीढ़ी लगाकर लाश को नीचे उतारा जा सका। इस बीच डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव सहित तमाम प्रशासकीय अधिकारी भी जेल पहुंचे। जेल प्रशासन के मुताबिक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उसने अवसाद में आत्महत्या की है।
डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने कहा कि कैदी ने पेड़ पर लटककर खुदकुशी की है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सुपुर्द किया जाएगा। परिवार को सूचना भेजी गई है। प्रधान बंदी रक्षक की लापरवाही मानते हुए निलंबित किया गया है।