पेट्रोल डालकर दोस्त को जिंदा जलाया, पुलिस की लापरवाही उजागर
- आग की लपटों झुलता हुआ आया था घर
- मरने से पहले घरवालों को बताई पूरी बात
- मामूली विवाद पर रंजिशन दिया वारदात को अंजाम
- इलाज के दौरान बयान दर्ज करने में पुलिस ने बरती कोताही
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यूपी के झांसी के सदर बाजार थानांतर्गत भट्टागांव में दोस्तों ने ही एक युवक को पेट्रोल डालकर जला दिया, जिसकी पांच दिन बाद मेडिकल कालेज में मौत हो गई। पुलिस की लापरवाही से इस युवक के उपचार के दौरान मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज नहीं हो सके। इस पर आक्रोशित परिजनों ने हत्यारोपी दोस्तों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सदर बाजार थानांतर्गत भट्टागांव निवासी मनोज ने पोस्टमार्टम हाउस पर पुलिस को बताया कि उसका भाई कपिल (18) पुत्र जगदीश 29 मार्च की रात दुकान बंद करके घर पहुंचा था। कुछ देर बाद उसके तीन दोस्त घर पर आए और घूमने के बहाने बुलाकर अपने साथ ले गए। रात करीब 11 बजे कपिल आग की लपटों से जलता हुआ चीखता-चिल्लाता घर आया।
कपिल को आग से जलता देख परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में आग बुझाकर परिजन कपिल को मेडिकल कॉलेज लेकर आए। उसकी हालत देख चिकित्सकों ने भर्ती कर लिया और इसकी सूचना मीमो पुलिस को भेज दी गई। इसी के साथ शुरू हुई पुलिस की घोर लापरवाही। पुलिस ने मीमो पर मेडिकल कालेज जाना जरूरी नहीं समझा और इस दौरान इस युवक की हालत निरंतर बिगड़ती रही, लेकिन पुलिस ने पहुंचकर उसके मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज नहीं कराए।
इलाज के दौरान बयान दर्ज करने में पुलिस ने बरती कोताही
पुलिस को मनोज ने यह भी बताया कि उसके भाई कपिल ने मरने से पहले बताया था कि उसे घर से ले जाने वाले तीनों दोस्तों से उसका करीब 10 दिन पहले मामूली विवाद हुआ था, जिसकी रंजिश के चलते तीनों दोस्त योजना बनाकर उसको घुमाने के नाम पर घर से ले गए।
पहले तीनों ने उसके साथ मारपीट की, फिर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। वारदात को अंजाम देकर तीनों दोस्त भाग गए और वह आग की लपटो में जलता हुआ भागकर घर पर आया।
वहीं, थाना प्रभारी निरीक्षक आशीष मिश्रा ने पूछे जाने पर बताया कि यह बात सही है कि कपिल आग की लपटों से जलता हुआ घर पर आया था। परिजनों ने थाने पर कोई लिखित शिकायत नहीं की, जिसकी वजह से उसके बयान दर्ज नहीं करवाए जा सके।
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस कार्रवाई करेगी।