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सेना का अभियान धीमा करने को बच्चों को मार रहा आईएस
एजेंसी, बगदाद
Updated Fri, 23 Jun 2017 12:49 PM IST
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आईएसआईएस
- फोटो : डेमो फोटो
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खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक इस्टेट (आईएस) मोसुल में बच्चों को ढाल बनाकर स्थानीय लोगों को शहर छोड़ने से रोक रहा है। इसके लिए वह बच्चों को मार रहा है, ताकि सेना का अभियान धीमा पड़ जाए। मालूम हो कि इराकी सेना यहां से आईएस का सफाया करने में जुटी है।
यूनिसेफ के अनुसार, आईएस आतंकियों ने उनके नियंत्रण इलाके से भागने की कोशिश करने वाले परिवारों के बच्चों की हत्या की। इस मामले में संस्था के पास कई ब्योरा हैं। इराक में यूनिसेफ के प्रतिनिधि पीटर हॉकिन्स ने कहा, ‘लोगों को भागने से रोकने के लिए वे बच्चों का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के तौर पर कर रहे हैं जो इस युद्ध के विवेकहीनता और विनाशकारी रूप को दिखाता है।’
मोसुल इलाके में करीब एक लाख लोग रहते हैं। इस वजह से आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ने वाले इराकी बल के अभियान की गति धीमी पड़ गई है। यूनिसेफ ने बताया कि 2014 में इराक के एक तिहाई हिस्से पर आईएस का कब्जा होने के बाद एक हजार से अधिक बच्चों की हत्या की गई और 1,130 बच्चे घायल हुए।
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उन्होंने बताया कि पिछले छह माह में हुई 52 बच्चे मौत के घाट उतार दिए गए और 255 जख्मी हुए। सैन्य शासन या विस्थापन के कारण 10 लाख से अधिक बच्चों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी। यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है। 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए। हॉकिन्स ने कहा, ‘देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है।’
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यूनिसेफ के अनुसार, आईएस आतंकियों ने उनके नियंत्रण इलाके से भागने की कोशिश करने वाले परिवारों के बच्चों की हत्या की। इस मामले में संस्था के पास कई ब्योरा हैं। इराक में यूनिसेफ के प्रतिनिधि पीटर हॉकिन्स ने कहा, ‘लोगों को भागने से रोकने के लिए वे बच्चों का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के तौर पर कर रहे हैं जो इस युद्ध के विवेकहीनता और विनाशकारी रूप को दिखाता है।’
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मोसुल इलाके में करीब एक लाख लोग रहते हैं। इस वजह से आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ने वाले इराकी बल के अभियान की गति धीमी पड़ गई है। यूनिसेफ ने बताया कि 2014 में इराक के एक तिहाई हिस्से पर आईएस का कब्जा होने के बाद एक हजार से अधिक बच्चों की हत्या की गई और 1,130 बच्चे घायल हुए।
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उन्होंने बताया कि पिछले छह माह में हुई 52 बच्चे मौत के घाट उतार दिए गए और 255 जख्मी हुए। सैन्य शासन या विस्थापन के कारण 10 लाख से अधिक बच्चों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी। यूनिसेफ ने कहा कि बच्चों पर हिंसा में शामिल होने का भी दबाव बनाया जाता है। 18 वर्ष से कम आयु के कम से कम 231 बच्चे आईएस या अन्य सैन्य समूहों में भर्ती हुए। हॉकिन्स ने कहा, ‘देश के भविष्य की सुरक्षा एवं आर्थिक दृढ़ता इस बात से तय होती है कि बच्चों के साथ आज क्या हो रहा है।’