{"_id":"59d28e214f1c1bb7538b55a9","slug":"four-people-died-due-to-train-injuries-in-allahabad","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मेले से लौट रहा था परिवार, तभी अचानक हुआ कुछ ऐसा कि हो गई चार लोगों की मौत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मेले से लौट रहा था परिवार, तभी अचानक हुआ कुछ ऐसा कि हो गई चार लोगों की मौत
amarujala.com, Presented by: शारुख खान
Updated Tue, 03 Oct 2017 12:36 AM IST
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फाइल
- फोटो : सांकेतिक चित्र
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एक परिवार देर रात को मेले से लौट रहा था। अचानक उनके साथ ऐसा हुआ कि चार लोगों की मौत हो गई। जानिए क्या हुआ उस परिवार के साथ?...
घटना इलाहाबाद की है। दशहरा मेला घूमने के बाद रविवार रात करीब साढ़े तीन बजे घर लौटने के लिए नैनी स्टेशन पर रेल लाइन पार करते वक्त दो महिलाओं समेत चार लोग तेज रफ्तार भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आ गए।
वे रेलवे लाइन पर प्लेटफार्म की दीवार से सटकर खड़े थे तभी ट्रेन उन्हें जद में लेते हुए गुजर गई। मृतकों में देवरानी-जेठानी, देवरानी की बेटी और भाई शामिल हैं। सोमवार सुबह रेलवे पुलिस ने शवों के टुकड़े सीलकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिए।
रविवार को नैनी में दशहरा मेला लगा था। छोटा चाका में रहने वाले रामबहादुर की पत्नी सुशीला देवी (45) अपनी बेटी शीलू (15), जेठानी बृजकली (58) पत्नी अमर बहादुर तथा औद्योगिक क्षेत्र में विशंभरपुर गांव से आए छोटे भाई विजय कुमार (28) के साथ मेला घूमने गई थी।
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घटना इलाहाबाद की है। दशहरा मेला घूमने के बाद रविवार रात करीब साढ़े तीन बजे घर लौटने के लिए नैनी स्टेशन पर रेल लाइन पार करते वक्त दो महिलाओं समेत चार लोग तेज रफ्तार भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आ गए।
वे रेलवे लाइन पर प्लेटफार्म की दीवार से सटकर खड़े थे तभी ट्रेन उन्हें जद में लेते हुए गुजर गई। मृतकों में देवरानी-जेठानी, देवरानी की बेटी और भाई शामिल हैं। सोमवार सुबह रेलवे पुलिस ने शवों के टुकड़े सीलकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिए।
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रविवार को नैनी में दशहरा मेला लगा था। छोटा चाका में रहने वाले रामबहादुर की पत्नी सुशीला देवी (45) अपनी बेटी शीलू (15), जेठानी बृजकली (58) पत्नी अमर बहादुर तथा औद्योगिक क्षेत्र में विशंभरपुर गांव से आए छोटे भाई विजय कुमार (28) के साथ मेला घूमने गई थी।
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फाइल
- फोटो : सांकेतिक चित्र
कई घंटे तक मेले में घूमने-फिरने के बाद वे रात करीब साढ़े तीन बजे घर के लिए रवाना हुए। वे सभी नैनी रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर पर पहुंचे तो रेलवे फुट ओवरब्रिज से जाने की बजाय जल्दबाजी में रेल पटरी पार करने लगे।
तभी मिर्जापुर की तरफ से ट्रेन आती देखी सुशीला, बेटी शीलू, जेठानी बृजकली और भाई विजय के साथ प्लेटफार्म नंबर दो से सटकर खड़ी हो गई। दरअसल, उन्हें तेज रफ्तार ट्रेन करीब आ जाने की वजह से प्लेटफार्म पर चढ़ने का मौका ही नहीं मिला।
भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस उसी ट्रैक से होकर गुजरी। सुशीला समेत चारों लोग ट्रेन की चपेट में आ गए। उनके शरीर टुकड़ों में बंट गए। मेले से लौट रहे कुछ ग्रामीणों ने देखा तो छोटा चाका जाकर मृतकों के घर में इस दुर्घटना की जानकारी दी।
पता चलते ही रामबहादुर और अमरबहादुर समेत परिवार के लोग बदहवासी में वहां पहुंचे। तब तक रेलवे पुलिस और आरपीएफ का दस्ता भी पहुंच गया था। खबर फैली तो वहां भीड़ लगने लगी। जीआरपी ने शवों के टुकड़े एकत्र किए और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
तभी मिर्जापुर की तरफ से ट्रेन आती देखी सुशीला, बेटी शीलू, जेठानी बृजकली और भाई विजय के साथ प्लेटफार्म नंबर दो से सटकर खड़ी हो गई। दरअसल, उन्हें तेज रफ्तार ट्रेन करीब आ जाने की वजह से प्लेटफार्म पर चढ़ने का मौका ही नहीं मिला।
भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस उसी ट्रैक से होकर गुजरी। सुशीला समेत चारों लोग ट्रेन की चपेट में आ गए। उनके शरीर टुकड़ों में बंट गए। मेले से लौट रहे कुछ ग्रामीणों ने देखा तो छोटा चाका जाकर मृतकों के घर में इस दुर्घटना की जानकारी दी।
पता चलते ही रामबहादुर और अमरबहादुर समेत परिवार के लोग बदहवासी में वहां पहुंचे। तब तक रेलवे पुलिस और आरपीएफ का दस्ता भी पहुंच गया था। खबर फैली तो वहां भीड़ लगने लगी। जीआरपी ने शवों के टुकड़े एकत्र किए और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।