{"_id":"5a50f2104f1c1baa268b7f4d","slug":"false-gangrape-case-police-filed-case-against-woman-in-aligarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महिला ने कराया था गैंगरेप का मुकदमा, जांच में खुला ऐसा राज हैरान रह गई पुलिस","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
महिला ने कराया था गैंगरेप का मुकदमा, जांच में खुला ऐसा राज हैरान रह गई पुलिस
क्राइम डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 06 Jan 2018 09:28 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक महिला ने गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मामला उत्तर प्रदेश अलीगढ़ जिले का है। गैंगरेप के एक झूठे मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए शिकायतकर्ता महिला और मुकदमे के गवाहों के खिलाफ परिवाद दर्ज कर लिया है।
इस गैंगरेप में एक बैंक मैनेजर को झूठा आरोपी बना दिया गया था। बता दें कि महिला की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता पर कोर्ट के आदेश पर पहले भी केस दर्ज हो चुका है। इसके अलावा जेल भी जा चुका है।
पढ़ें:- राजकीय महिला शरणालय में गैंगरेप के बाद युवती की हत्या, नाजुक अंग पर मिले पुरुष के बाल
विज्ञापन
आपको बता दें कि गभाना इलाके के एक गांव की महिला ने 25 मई 2010 को अपने समधी और तीन अन्य लोगों के खिलाफ गैंगरेप और लूटपाट का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे को झूठा पाए जाने पर पुलिस ने विवेचना के बाद इसमें एफआर लगा दी।
इसके बाद इस मुकदमे में उस समय नया मोड़ आ गया, जब एक अज्ञात अभियुक्त की पहचान बैंक मैनेजर प्रेमप्रकाश के रूप में कर दी गई। बाद में विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता महिला ने यह शपथपत्र दिया कि वह बैंक मैनेजर को नहीं जानती।
विज्ञापन
इस गैंगरेप में एक बैंक मैनेजर को झूठा आरोपी बना दिया गया था। बता दें कि महिला की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता पर कोर्ट के आदेश पर पहले भी केस दर्ज हो चुका है। इसके अलावा जेल भी जा चुका है।
विज्ञापन
पढ़ें:- राजकीय महिला शरणालय में गैंगरेप के बाद युवती की हत्या, नाजुक अंग पर मिले पुरुष के बाल
विज्ञापन
आपको बता दें कि गभाना इलाके के एक गांव की महिला ने 25 मई 2010 को अपने समधी और तीन अन्य लोगों के खिलाफ गैंगरेप और लूटपाट का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे को झूठा पाए जाने पर पुलिस ने विवेचना के बाद इसमें एफआर लगा दी।
इसके बाद इस मुकदमे में उस समय नया मोड़ आ गया, जब एक अज्ञात अभियुक्त की पहचान बैंक मैनेजर प्रेमप्रकाश के रूप में कर दी गई। बाद में विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता महिला ने यह शपथपत्र दिया कि वह बैंक मैनेजर को नहीं जानती।
उसका नाम तो उसके अधिवक्ता शिवकुमार शर्मा ने अपनी रंजिश के तहत लिखाया है। इस आधार पर पुलिस ने इस मुकदमे में फिर अंतिम रिपोर्ट लगा दी। मैनेजर प्रेमप्रकाश की तरफ से झूठा मुकदमा लिखाए जाने पर कोर्ट में उक्त महिला और अन्य के खिलाफ परिवाद पेश किया गया।
पढ़ें:- मार्कशीट लेने आई दलित छात्रा का अपहरण कर चार दबंगों ने किया रेप का प्रयास
एसीजेएम कोर्ट संख्या छह ने इस पर उक्त मामले में उक्त महिला और मुकदमे के गवाहों समेत चार के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया है।
पढ़ें:- मार्कशीट लेने आई दलित छात्रा का अपहरण कर चार दबंगों ने किया रेप का प्रयास
एसीजेएम कोर्ट संख्या छह ने इस पर उक्त मामले में उक्त महिला और मुकदमे के गवाहों समेत चार के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया है।