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2019 में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी CPM
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Updated Mon, 22 Jan 2018 06:09 AM IST
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माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक के तीसरे व आखिरी दिन भारी हंगामे के बीच राजनीतिक मसौदे पर हुए मतदान में पूर्व महासचिव प्रकाश कारत गुट की ओर से पेश प्रस्तावों को हरी झंडी मिल गई। इससे तय हो गया है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी कांग्रेस के साथ कोई तालमेल नहीं करेगी। महासचिव सीताराम येचुरी की ओर से पेश मसौदे में भाजपा के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस समेत तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों को साथ लेकर एक वाम लोकतांत्रिक मोर्चा बनाने की बात कही गई थी।
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केंद्रीय समिति की बैठक में अपने मसौदे पर मुहर नहीं लगने से नाराज येचुरी ने बाद में पोलित ब्यूरो की बैठक में अपने पद से इस्तीफा देने की भी पेशकश की। लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं ने यह कह कर फिलहाल उनको मना लिया कि इससे पार्टी के मतभेद सार्वजनिक हो जाएंगे और लोगों में गलत संदेश जाएगा। केंद्रीय समिति की बैठक के पहले दो दिनों के दौरान येचुरी गुट की तमाम कोशिशों के बावजूद जब मसौदे पर सहमति नहीं बनी तो तीसरे दिन इस पर मतदान का फैसला किया गया।
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भारी हंगामे के बीच हुए मतदान में समिति के सदस्यों ने कारत गुट के मसौदे पर मुहर लगा दी। कांग्रेस के साथ तालमेल के मुद्दे पर येचुरी व कारत के बीच उभरे मतभेदों की वजह से ही इस बार बैठक में दो अलग-अलग राजनीतिक मसौदे पेश किए गए थे। इससे पहले वर्ष 1964 में ही वामपंथी पार्टी की बैठक में दो अलग-अलग मसौदे पेश किए गए थे। तब उसका नतीजा इस पार्टी के विभाजन और भाकपा के जन्म के तौर पर सामने आया था।
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ध्यान रहे कि कारत गुट वर्ष 2016 के बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भी यहां कांग्रेस के साथ तालमेल के खिलाफ था। लेकिन प्रदेश माकपा नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी करते हुए कांग्रेस के साथ अनौपचारिक तालमेल किया था। उसके बाद राज्य में होने वाले विभिन्न चुनावों व उपचुनावों में भाजपा वामपंथी दलों से दूसरे नंबर की पार्टी होने का तमगा छीनती रही है।