अगले सत्र 2017-18 से सीबीएसई में दसवीं बोर्ड परीक्षा होगी अनिवार्य
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सीबीएसई स्कूलों के छात्रों के लिए 2017-18 के सत्र से दसवीं बोर्ड की परीक्षा अनिवार्य की जा सकती है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने यह बात कही है। जावडे़कर ने सोमवार को जयपुर में बताया कि दसवीं में अभी देश भर में करीब ढाई करोड़ बच्चे परीक्षा देते हैं। इनमें से दो करोड़ राज्यों के बोर्ड में परीक्षा देते हैं। बाकी पचास लाख सीबीएसई से जुडे़ हैं। इनके लिए बोर्ड परीक्षा अनिवार्य करने पर विचार चल रह है और इसे 2017-18 के सत्र से लागू किया जा सकता है।
जावडे़कर ने यह भी बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आठवीं तक फेल नहीं करने का प्रावधान है, लेकिन इससे शिक्षा का स्तर गिर रहा है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार इस कानून में संशोधन करेगी जो राज्य पांचवीं और आठवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा लागू करना चाहते हैं, उन्हें इसकी छूट दी जाएगी।
यह सबके लिए अनिवार्य नहीं होगा। संशोधन का प्रस्ताव केबिनेट में जाएगा और फिर इसे संसद में रखा जाएगा। इसके साथ ही पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में लर्निंग आउटकम का प्रावधान भी कानून में है, लेकिन इसे अभी तक नियमबद्ध नहीं किया गया है।
सरकार इसे नियमबद्ध कर रही है। इसके बाद हर कक्षा में बच्चे के लर्निंग आउटकम का मूल्यांकन होगा। जावडे़कर ने बताया कि नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2006 में लागू किया गया था। इसमें बदलाव के लिए सुझाव आ गए हैं, लेकिन सरकार फिलहाल इसमें बदलाव नहीं कर रही है।
सरकार का मानना है कि इसके तहत राज्यों को अपनी जरूरत के हिसाब से पाठ्यक्रम लागू करने की जो छूट मिली हुई है, वह जारी रहनी चाहिए। जावडे़कर ने बताया कि सरकार सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए इनकी गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा ताकि निजी स्कूलों की मनमानी खत्म हो सके।
आईआईटी पाल पोर्टल होगा शुरू
कोटा सहित देश भर में इंजीनियरिंग में प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्रों की सहायता के लिए केंद्र सरकार जल्द ही आईआईटी पाल नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेगी। जावडे़कर ने पत्रकारों को बताया कि इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए कोचिंग कर रहे छात्र लाखों रुपये खर्च करते हैं। उनकी सहायता के लिए अब सरकार आईआईटी पाल के नाम से एक ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू कर रही है।
इसमें जेईई परीक्षा का पूरा पाठ्यक्रम, पीरियाडिकल टेस्ट, सवाल जवाब और वह सारी सामग्री सम्मलित की जाएगी, जो कोचिंग में पढ़ाई जाती है। इसे विषय विशेषज्ञों से तैयार कराया गया है और जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। यह पूरी तरह निशुल्क होगा। ऑनलाइन उपलब्ध होगा और कुछ चैनल्स भी इसे प्रसारित करेंगे, ताकि गांव में बैठे बच्चे भी इसकी सहायता से तैयारी कर सकें।