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किसान आंदोलन: बिहार में भारत बंद असरदार, प्रशासन के दावे हुए फेल
Wed, 09 Dec 2020 02:49 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, पटना।
अमर उजाला ब्यूरो, पटना।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 09 Dec 2020 02:49 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
कृषि बिल के विरोध में बिहार में राजनीतिक दलों के भारत बंद का असर सुबह से ही दिखने लगा था। इस दौरान प्रशासनिक तैयारियों की पूरी तरह से पोल खुल गई। प्रशासन ने बंद के मद्देनजर 11 बजे से अपनी तैयारियां की थी लेकिन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सुबह 6 बजे से ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर गए।
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राजद, भाकपा माले, सीपीआई समेत कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता सुबह 6 बजे से ही सड़क जाम करने लगे और रेल यातायात को बाधित किया। जाप कार्यकर्ताओं ने डाकबंगला चौराहा पर जमकर उत्पात मचाया।
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सुबह से ही बंद समर्थकों के सड़क पर उतरने का असर राजधानी पटना में भी दिखा। राजद कार्यकर्ता भी सुबह से ही पटना के डाकबंगला चौराहा, इनकम टैक्स चौराहा, बोरिंग रोड चौराहा और फुलवारी शरीफ में सड़कों पर उतर गए।
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सीपीआईएम, सीपीआई एमएल समेत बाकी बंद समर्थक भी सुबह में ही सड़कों पर उतर गए थे। कांग्रेस ने 11 बजे से बंद में हिस्सा लिया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा 11 बजे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ डाक बंगला चौराहा पहुंचे।
इसी के साथ कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी 11 बजे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पटना के परसा बाजार पहुंचे और लोगों से आग्रह कर दुकानें और यातायात को पूरी तरह से बंद करवाया। बंद समर्थकों ने दरभंगा के लहेरियासराय स्टेशन पर सुबह में ही गंगासागर एक्सप्रेस को रोक दिया। आरा में गाडियों के शीशे तोड़े गए।
भारत बंद के दौरान आरा में माले कार्यकर्ताओं ने आरा-मोहनिया को जाम किया। सहरसा में नंदलाल हाल्ट पर सहरसा सुपौल ट्रेन रोकी गई। वहीं बिहारशरीफ में श्रमजीवी एक्सप्रेस रोकी गई। दरभंगा में दरभंगा-नई दिल्ली बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन रोक दी गई। नालंदा, बेतिया औरंगाबाद, नवादा, सीवान, शेखपुरा, बेगूसराय, मोतिहारी सुपौल, समेत राज्य के अलग-अलग शहरों में बंद का व्यापक असर देखने को मिला।
‘भारत बंद’ में तेजस्वी रहे गायब एनडीए ने उठाए सवाल
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भारत बंद में कहीं भी नहीं दिखे। जबकि दो दिन पहले उन्होंने कहा था कि किसानों के लिए अगर सरकार मुझे फांसी पर लटका देगी तो मंजूर होगा। पटना से लेकर दिल्ली तक तेजस्वी नजर नहीं आए।
बंद के दौरान तेजस्वी के नजर नहीं आने पर एनडीए के कई नेताओं ने सवाल खड़े किए। चाहे वह कोरोना का समय हो या मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों या राजधानी में जलजमाव का समय हो। उन्हें बिहार की जनता से कोई लेना देना नहीं है।
वहीं, कृषि बिल के विरोध में कई किसान संगठनों के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भी सड़कों पर उतरे। सड़क जाम करने से लेकर रेल रोको अभियान तक चलाया गया।
महागठबंधन में शामिल भाकपा माले, भाकपा, माकपा के अलावा कई जगहों पर कांग्रेस के कार्यकर्ता भी विरोध करते नजर आए। यहां तक की जन अधिकार पार्टी के वर्कर भी काफी संख्या में हिस्सा लिया। राजद के कार्यकर्ता भी विभिन्न जिलों में भारत बंद को सफल करने के लिए सड़कों पर बंद को सफल बनाने के लिए उतरे।