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महाराष्ट्र: SIR को लेकर सियासत तेज, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने विपक्ष से पूछे कई सवाल
Sun, 04 Oct 2026 11:06 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई
अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई
Published by: Digvijay Singh
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:06 PM IST
सार
महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ठाकरे बंधुओं के ‘गर्जना मोर्चा’के बीच भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने एसआईआर का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं पर जोरदार पलटवार किया है।
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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ठाकरे बंधुओं के ‘गर्जना मोर्चा’के बीच भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने एसआईआर का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं पर जोरदार पलटवार किया है। चव्हाण ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में एसआईआर को लेकर दिए गए बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए विरोध कर रहे नेताओं से कई सवाल पूछे हैं।
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चव्हाण ने सवाल उठाया कि क्या देश के प्रधानमंत्री और किसी राज्य के मुख्यमंत्री का फैसला घुसपैठिए करेंगे? अगर ऐसा होता है तो क्या देश का लोकतंत्र सुरक्षित रह पाएगा? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एक मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में होना स्वीकार किया जा सकता है और क्या मृत लोगों के नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए?
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मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर क्यों नहीं होनी चाहिए कार्रवाई?
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने SIR का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं से पहले यह स्पष्ट करने को कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज है या मृत व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में मौजूद है, तो ऐसी विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया का विरोध क्यों किया जाना चाहिए।
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‘पहले सवालों के जवाब दें, फिर करें SIR का विरोध’
रविंद्र चव्हाण ने विरोध करने वाले नेताओं से कहा कि उन्हें पहले इन सवालों का जवाब देना चाहिए और इसके बाद ही SIR प्रक्रिया का विरोध करना चाहिए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मतदाता सूची को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। ठाकरे बंधुओं के ‘गर्जना मोर्चा’ के बीच चव्हाण के इस बयान से महाराष्ट्र में SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं। विपक्ष जहां SIR की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभावों पर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी इसे मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के तौर पर रख रही है।