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महाराष्ट्रः पीएफआई को मुस्लिमों के शव सौंपने के फैसले पर उठे सवाल

Tue, 02 Jun 2020 08:29 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 02 Jun 2020 08:29 PM IST
सार

  • विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे सरकार पर बोला हमला
  • बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने 18 मई को इस संबंध में आदेश जारी किया
  • पीएफआई पर देशभर में दंगे और दंगों के लिए फंडिंग करने का आरोप

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Maharashtra: Questions raised over the decision to hand over the bodies of Muslims to PFI
पीएफआई - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त होने की आरोपी संस्था पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को मुंबई में मुस्लिम मरीजों के शव सौंपने का अधिकार दिया गया है।

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बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने 18 मई को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसको लेकर विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला है।
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पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि बीएमसी के फैसले से हैरानी हुई है। जिस संस्था पर देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त होने का ठप्पा लगा है, उसे मान्यता देना गंभीर मुद्दा है।
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उन्होंने कहा कि पीएफआई को इस प्रकार का काम सौंपना कितना सही है, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इसका जवाब देना चाहिए।

अगर मुख्यमंत्री को बीएमसी का यह फैसला मंजूर नहीं है तो क्या वे फैसला लेने वाले संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। फडणवीस ने कहा कि केरल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई चल रही है।

इससे पहले फडणवीस ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पीएफआई के चार सदस्यों की टॉस्क फोर्स टीम बनाने के आदेश का उल्लेख किया है।


पीएफआई के चार समन्वयक बनाए गए हैं। वहीं, अस्पताल प्रमुख से कहा है कि पीएफआई के समन्वयक मुस्लिमों के शवों को दफनाने में मदद करेंगे। यदि कोई विवाद होता है तो बीएमसी को अंतिम फैसला लेने का अधिकार होगा।

पीआईएफ पर देशभर में दंगे कराने का आरोप

पीएफआई पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में दंगे कराने और दंगों के लिए फंडिंग करने का आरोप है।

इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप पत्र तैयार किया है। ईडी ने पीएफआई के कुछ बैंक खातों की भी तलाश की हैं। वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पीएफआई की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की जांच शुरू की है। 

इसके बावजूद ठाकरे सरकार में पीएफआई को अहमियत मिली हुई है।


 

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