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मुंबई: भाजपा के वर्चस्व वाले मीरा-भायंदर में चरम पर पहुंची नेताओं की गुटबाजी

Wed, 10 Nov 2021 04:02 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 10 Nov 2021 04:02 PM IST
सार

महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने गुटबाजी खत्म करने के लिए जिलाध्यक्ष और प्रभारी बदल दिया। फिर भी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यही नहीं, मेहता ने मीरा-भायंदर जिला कार्यालय तक को पार्टी का कार्यालय स्वीकार नहीं किया है...

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Maharashtra: dispute arises in Mira-Bhayandar BJP of Mumbai Metropolitan Region
चंद्रकांत पाटिल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

मुंबई महानगर प्रदेश के मीरा-भायंदर शहर में भाजपा दो फाड़ हो गई है। यहां भाजपा नेताओं के बीच गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है, जिससे कार्यकर्ता हताश हैं। इसलिए इनमें से कई दूसरे दलों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। आलम यह है कि प्रदेश नेतृत्व भी इस गुटबाजी के आगे लाचार है।

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पिछले विधानसभा चुनाव में अपने ही लोगों से शिकस्त खाए पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता अब तक हार हजम नहीं कर पा रहे हैं। वह पार्टी पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। हालांकि शहर में भाजपा को इस मुकाम तक लाने में नरेंद्र मेहता की बड़ी भूमिका रही है। बहुत ही कम समय में मेहता ने कारोबार और यहां की राजनीति में लंबी छलांग लगाई है। लेकिन, विधानसभा चुनाव में भाजपा की ही पूर्व महापौर रह चुकीं और निर्दलीय मैदान में उतरीं गीता जैन से मिली शिकस्त के बाद से उनके दुर्दिन शुरू हो गए। भाजपा की ही एक पार्षद मूलरूप से आगरा की निवासी नीला सोंस ने मेहता की अश्लील फोटो वायरल कर दी जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई। उसके बाद उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और कुछ समय के लिए राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा कर दी।
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लेकिन अपने जन्मदिन पर जब फिर से पार्टी में वापसी की तब से मीरा-भायंदर में भाजपा गुटों में बंट गई। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने गुटबाजी खत्म करने के लिए जिलाध्यक्ष और प्रभारी बदल दिया। फिर भी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यही नहीं, मेहता ने मीरा-भायंदर जिला कार्यालय तक को पार्टी का कार्यालय स्वीकार नहीं किया है। मुंबई महानगर में सात महानगरपालिकाएं हैं जिसमें से मीरा-भायंदर एक मात्र नगर निकाय है जहां भाजपा पूरे बहुमत में है। इसलिए मुख्यमंत्री रहते हुए देवेंद्र  फडणवीस मीरा-भायंदर पर विशेष नजर रखते थे।

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मेहता को बनाया प्रदेश सचिव लेकिन नहीं स्वीकार किया पद

महाराष्ट्र भाजपा ने गुटबाजी खत्म करने के लिए पार्षद रवि व्यास को मीरा-भायंदर भाजपा अध्यक्ष और नरेंद्र मेहता को प्रदेश भाजपा सचिव नियुक्त कर दिया। लेकिन मेहता ने यह पद स्वीकार नहीं किया। सोशल मीडिया में यह मामला बेहद चर्चित रहा। इतना ही नहीं, मेहता ने अपने समर्थक, महापौर, उपमहापौर और पार्षदों समेत अपने समर्थकों के साथ इस्तीफा देने की धमकी दे दी। इससे प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल और देवेंद्र फडणवीस को नरेंद्र मेहता के सामने झुकना पड़ा। अब पार्टी ने स्थिति को संभालने के लिए श्रीकांत भारतीय, रविंद्र चव्हाण और मिहिर कोटेचा की तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

समानांतर चल रही है भाजपा की सत्ता

मीरा-भायंदर में अब भाजपा में नरेंद्र मेहता और रवि व्यास की समानांतर सत्ता चल रही है। स्थिति यह है कि मेहता समर्थक पार्षद व पदाधिकारी पार्टी अध्यक्ष व्यास और जिला कार्यालय से दूरी बना चुके हैं। पार्टी में इस तनातनी से कार्यकर्ता परेशान हैं। इसके चलते रवि व्यास अपनी नई कार्यकारिणी का गठन भी नहीं कर पा रहे हैं।

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