विज्ञापन

Coronavirus: वीरान हुई मुंबई की सड़कें, घरों में कैद हुए लोग

सुरेंद्र मिश्र, मुंबई Updated Thu, 26 Mar 2020 11:39 AM IST
विज्ञापन
Mumbai Lockdown
Mumbai Lockdown - फोटो : Social Media
ख़बर सुनें

सार

  • अरसे बाद परिवारिक जीवन का अहसास हुआ, तो कईयों को खटक रही है अपनों से दूरी
  • डिजिटल युग में बस मोबाइल और टेलीविजन ही बना जीने का सहारा

विस्तार

चौबीस घंटे सरपट दौड़नेवाली देश की आर्थिक राजधानी मुंबई वीरान हो गई है। लोग अपने घरों में कैद हैं। रोजमर्रा की दौड़भाग की जिंदगी थम गई है। ऐसा लग रहा है मानों मुंबई बदल गई है। घरों में कैद कई लोग अरसे बाद पारिवारिक जीवन जीने का आनंद ले रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं, मायानगरी में रहने वाले कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनों से दूर यादों में जीने को मजबूर हैं। डिजिटल युग में बस मोबाइल और टेलीविजन ही जीने का सहारा है। उसमें भी इंटरनेट की लुका छिपी हैरान करने वाली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से 14 अप्रैल तक लॉकडाउन की घोषणा की है, तब से स्थिति सुधरने तक घर में कैद रहना मजबूरी हो गई है। मुंबई में कर्फ्यू जैसी स्थिति के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रभाव दिखाई दिए हैं। नौकरीपेशा लोग पारिवारिक सुख की अनुभूति कर रहे हैं। लेकिन घर मे कैद रहने की विवशता उन्हें परेशान कर रही है।

वहीं, दिहाड़ी मजदूरी करने वाले या यूं कहें टैक्सी, ऑटोरिक्शा चलनेवाले और फेरीवालों को आजीविका की चिंता है। व्यापारी वर्ग जल्द कर्फ्यू हटने की प्रार्थना कर रहा है। नौकरीपेशा प्रज्ञा नाईक कर्फ्यू लगने से घर मे कैद हैं लेकिन वह खुश हैं। नरीमन प्वाइंट स्थित मंत्रालय में कार्यरत प्रज्ञा अरसे बाद पारिवार के बीच निश्चिंत जीवन जी रही हैं।

वैसे, आमदिनों में रोजाना प्रातः साढ़े चार बजे उनके घर में प्रेशर कूकर की सीटी बोलती थी और तब से वह कार्यालय पहुंचने की उधेड़बुन में लग जाती थीं। तमाम देशवासियों की तरह 22 मार्च को प्रज्ञा भी 24 घंटे के लिए जनता कर्फ्यू के अधीन रही। उस दिन तड़के न प्रेशर  कूकर की सीटी बजी और न ही उन्हें दफ्तर जाने की जल्दबाजी।

ज्वाइंडिस से पीड़ित प्रज्ञा बताती हैं कि बहुत दिनों के बाद उन्होंने मुंबई की यह नई सुबह देखी। परिवार के साथ जीने का अहसास हुआ। अब 14 अप्रैल तक बिना अखबार, इंटरनेट की समस्या और लोगों से दूर रहकर जीने की कोशिश करूंगी।

लंबे अरसे बाद मिली सुकून की जिंदगी...

बांबे हाईकोर्ट के कर्मचारी संतोष तवटे उन्हीं लोगों में से एक हैं, जो इस समय भागदौड़ की जिंदगी से मुक्त होकर अपने परिवार के साथ घर में हैं। पश्चिमी उपनगर मीरा रोड में रहने वाले संतोष कहते हैं कि हर दिन सुबह हाईकोर्ट जाने की जद्दोजहाद और फिर ट्रेन के तकलीफदेह सफर से आराम मिला है और परिवारिक जीवन जीने का मौका भी।

पहली बार लोकल ट्रेन बंद है और लोग घरों में कैद हुए हैं। संतोष बताते हैं कि चीन में रहने वाले उनके मित्र फोन पर बताते हैं कि उनके कांप्लेक्स में कोई एक कोरोना वायरस का मामला आया और पूरा कांप्लेक्स ईंट और पत्थर से ढक दिया गया। लोग घुट-घुटकर रहने को मजबूर हो गए।

इसलिए ऐसी नौबत आने से पहले एहतियात बरतना न सिर्फ मजबूरी, बल्कि जरूरी भी है।

मुंबई में रहना बना मजबूरी

बांबे हाईकोर्ट के कर्मचारी बीड जिला निवासी अनूप जोशी की पत्नी गर्भवती हैं। अप्रैल के पहले महीने में उनकी डिलिवरी हो सकती है। लेकिन कोरोना वायरस ने उन्हें मुंबई में कैद कर रखा है। न घर जा पा रहे हैं और न ही मुंबई में ही चैन से रह पा रहे हैं।

इसी तरह लातूर निवासी शंकर तानावड़े के बूढ़े पिता लकवा के शिकार हैं। गांव में तीन साल की एक बच्ची है। शंकर की पत्नी पिता की देखभाल के साथ ही बच्ची को भी संभाल रही है। कोरोना वायरस की इस आपदा में शंकर अपने परिवार के साथ रहना चाहते हैं। लेकिन मजबूरी है कि वे मुंबई से घर नहीं जा सकते।

दरअसल, अनूप और शंकर की स्थिति एक जैसी है। दोनों की नई नौकरी है। इसलिए वेतन भी इतना अधिक नहीं है कि मुंबई जैसै महानगर में परिवार के साथ रह सकें। अब पिता और पत्नी व बेटी की यादों में ही जीवन कट रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Election
  • Downloads

Follow Us