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जाति प्रमाण पत्र न बनवा पाने पर की आत्महत्या

Sat, 14 Sep 2013 03:44 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 14 Sep 2013 03:44 PM IST
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सरकारी लापरवाही जीवन पर कितनी भारी पड़ सकती है भोपाल की घटना उसका उदाहरण हैं। इसी लापरवाही के चलते युवक ने आत्महत्या कर ली।

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भोपाल में एक दलित युवक पिछले 18 महीनों से जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी कार्यालय में चक्कर काट रहा था। चक्कर काट-काट कर थक गए दलित युवक ने जहर की गोलियां खा ली। युवक को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गई।

भोपाल के नरेला शंकारी में रहने वाला राजपाल कैथल 15 सितंबर को होने वाली पुलिस परीक्षा के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई महीनों से सरकारी दफ्तरों से चक्कर काट रहा था।
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जब उसे लगा कि वह इस परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएगा तो उसने जहर की गोलियां खा लीं।

जांच के दौरान दिए बयान में राजपाल के परिवार ने बताया कि वो बेरोजगार था और जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई महीनों से प्रयास कर रहा था। बार बार प्रयास के बाद भी प्रमाण पत्र न बनने के कारण वह परेशान था।
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राजपाल का दूसरा प्रयास था

जिला कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड के मुताबिक राजपाल जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए राजपाल का आवेदन पत्र पिछले महीने अगस्त की 27 तारीख को मिला था। जो संबंधित गोविंदपुरा तहसील के आगे बढ़ा दिया गया था।


राजपाल का ये प्रमाण पत्र बनवाने का दूसरा प्रयास था। इससे पहले कुछ कारणों के चलते उसका आवेदन रद्द कर दिया गया था।

मृतक राजपाल के पिता हरिराम पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक जाति प्रमाण पत्र बनने में कम से कम 30-40 दिन का समय लगता है।

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