भय्यूजी महाराज की खुदकुशी के बाद उनकी संपत्ति का वारिस कौन होगा। यह सवाल भय्यूजी महाराज के सुसाइड नोट में संपत्ति को लेकर विनायक को अधिकार सौंपने की बात से खड़ा हुआ।
इस सुसाइड नोट के दूसरे पन्ने में भय्यूजी महाराज ने लिखा है, "मैं अपनी सभी वित्तीय, संपत्ति और बैंक खाते संबंधी साइनिंग अथॉरिटी विनायक को सौंपता हूं, क्योंकि मुझे विनायक पर विश्वास है। मैं बिना किसी दबाव के लिख रहा हूं।"
सुसाइड नोट को उनकी वसीयत मानते हुए यह माना जाने लगा कि भय्यूजी महाराज की संपत्ति का मालिकाना हक विनायक के पास है। हालांकि कानूनी जानकारों की राय इससे अलग है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील सुशील टेकरीवाल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि इसे उनकी वसीयत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कई बिंदुओं में इसे समझाया।
1. इस तरह के कागज के टुकड़ों में मालिका हक सगे संबंधियों जैसे भाई, बहन, बेट, बेटी को छोड़कर अगर किसी परिवार से बाहर के व्यक्ति का नाम होता है तो यह संदेह पैदा करता है।
2. संपत्ति के उत्तराधिकारी अपना हक जता सकते हैं और कानूनी रूप से दावा ठोक सकते हैं।
3. इस तरह के मामलों में बहुत कानून पचड़े होते हैं।
4. ऐसे मामलों में आखिरकार कोर्ट ही मालिकाना हक तय कर सकती है।
वसीयत स्पष्ट शब्दों में लिखी होनी चाहिए
कानून के जानकार बताते हैं कि ऐसी कई नजीरें हैं जिससे यह साफ है कि मालिकाना हक के लिए स्पष्ट शब्दों में वसीयत होती है और किसी खास परिस्थितियों के अलावा मूल उत्तराधिकारी का हक नहीं जाता है। डायरी में लिखी गई पंक्तियों को वसीयत का दर्जा नहीं मिलता है।
2 of 8
- फोटो : Special Arrangement
शोकसभा में भी दिखी बेटी और सौतेली मां के बीच दूरी
भय्यूजी मंच की शोकसभा में उनकी बेटी कुहू और दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी मंच पर एक-दूसरे से तीन फीट की दूरी पर बैठी थीं। यह शोकसभा करीब एक घंटे तक चली जिसमें इतने करीब बैठे होने के बावजूद कुहू और डॉ. आयुषी ने एक दूसरे की ओर नहीं देखा। इस दृश्य में दोनों के बीच का तनाव स्पष्ट देखा जा सकता था। यहां तक कि शोकसभा में दोनों अलग-अलग गाड़ियों से आईं और मंच के पास दूरी बनाकर खड़ी रहीं।
3 of 8
Bhayyuji Maharaj wife Aayushi
- फोटो : Special Arrangement
पूरी शोकसभा के दौरान डॉ. आयुषी गुमसुम बैठी रहीं। शोकसभा खत्म हुई तो आयुषी तुरंत अपने दोस्तों के साथ रवाना हो गई। एक बारगी ऐसा लगा कि वह मीडिया में कुछ बात करना चाहती थी। लेकिन वह गाड़ी में बैठकर रवाना हो गईं।
4 of 8
- फोटो : Special Arrangement
कुहू शोकसभा के दौरान हाथ जोड़कर संवेदना प्रकट करने वालों का आभार जताया। उसके हाथ जोड़ने के तरीके को देखकर लोग कहते वह बिलकुल महाराज की तरह प्रणाम करती है।
महाराज के निधन के बाद कुहू और डॉ. आयुषी सुखलिया स्थित महाराज के पहले निवास शिवनेरी में ही रुकी हुई हैं। बंगले में तीन बेडरूम हैं। एक कमरा कुहू, दूसरा महाराज और तीसरा आयुषी का है। दोनों एक ही बंगले में रहकर मुंह तक नहीं देख रहीं। कुहू की देखभाल भय्यूजी महाराज के खास सेवादार विनायक कर रहे हैं तो आयुषी के साथ उनके परिजन मौजूद हैं।
5 of 8
- फोटो : Special Arrangement
नन्ही बेटी की आवाज भी गूंजती रही
भय्यूजी महाराज और डॉ. आयुषी की चार महीने की बेटी भी शोकसभा के दौरान मंच पर थी। नन्ही मासूम की आवाज हॉल में गूंजती रही। कभी वह हंसती तो कभी किसी चीज को देखकर चिल्लाती। नन्हे हाथों से वह बार-बार अपनी मां को छूने की कोशिश भी करती। भय्यूजी के जाने के दुख में आयुषी इतनी गमजदा हैं कि वह इस नन्ही बच्ची पर भी ध्यान नहीं दे पा रहीं। बच्ची को हल्की-हल्की थपकी दी तो वह मासूम खेलते-खेलते सो गई।