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Umaria News: कशेरू गांव में प्राथमिक विद्यालय का संचालन हो रहा कच्चे मकान में, जान जोखिम में डाल हो रही पढ़ाई
Mon, 13 Jan 2025 09:34 PM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2025 09:34 PM IST
सार
यहां चारो तरफ बांधवगढ़ का खूंखार जंगल है। जहां बाघ जैसे खतरनाक जानवर हैं। इन सबके बावजूद कच्चे मकान में लगभग 10 वर्षों से प्राथमिक शाला चल रही है, जहां छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
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कच्चे मकान में संचालित स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उमरिया जिले से एक अजीबो गरीब तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर सराइहा टोला कशेरू ग्राम मानपुर विकास खंड के अंतर्गत आता है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पतौर कोर एरिया की वन सीमा चारो तरफ से इसे घेरे हुए है। वन ग्राम होने के कारण अक्सर किसानों के खेत में बाघों का मूवमेंट भी होता रहता है।
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सरकारें जनता के हित की बात कहती तो हैं, लेकिन कागजी हकीकत, जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग नजर आती है। ऐसा ही नजर आ रहा है मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में। यहां की सरकार ने शिक्षा को कानूनी अधिकार तो दिया, लेकिन यहां से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो सारी पोल खोल रही हैं। आदिवासी बाहुल्य उमरिया जिले में कशेरू गांव की प्राथमिक शाला कच्चे मकान झोपड़ी में संचालित हो रही है।
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आसपास बांधवगढ़ का खूंखार जंगल
यहां चारो तरफ बांधवगढ़ का खूंखार जंगल है। जहां बाघ जैसे खतरनाक जानवर हैं। इन सबके बावजूद कच्चे मकान में लगभग 10 वर्षों से प्राथमिक शाला चल रही है। जहां छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। कशेरू में छात्रों की पढ़ाई का यह दृश्य देखकर आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की दुर्दशा किसी को भी विचलित कर सकती है। वहीं, जब पढ़ने वाले नैनीहालों से पूछा तो उन्होंने अपनी दुख भारी दस्तान बताते हुए कहा कि हम लोग कच्चे मकान में पढ़ रहे हैं। ठंडी-ठंडी हवा चलती है तो हम आंगन में बैठ जाते हैं और वर्षा के मौसम में पानी टपकता है। हमारा भी सपना है कि हम भी सर्व सुविधा युक्त भवन में पढ़ाई करें। अब सवाल उठता है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में पिछले करीब दस साल से ग्रामीणों के बच्चों को पढ़ाई के लिए एक मुकम्मल भवन नहीं मिल पाया है। गांव के एक व्यक्ति मालिक दयाराम सिंह के कच्चे मकान में 10 वर्ष के तौर पर कक्षाएं चल रही हैं और उसी में निवासरत हैं।
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सवाल उठता है कि इन मासूम बच्चों ने क्या बिगाड़ा है, जो आज तक शिक्षा की मंदिर कहे जाने वाला भवन नहीं मिला। सिस्टम की लापरवाही कहें या जिम्मेदारों की वादाखिलाफी, अब देखना होगा प्रशासन क्या कुछ कार्रवाई करता है। क्या बच्चों को भवन तक नसीब नहीं होगा। गांव के ही दमडी साहू ने बताया गया कि भवन बनाने के लिए हम कई बार विधायक सांसद कलेक्टर से मांग किए कई बार जनसुनवाई में भी आवेदन दिए। लेकिन आज तक सराईहा टोला कसेरू प्राथमिक शाला में भवन नहीं बना, बच्चे झोपड़ी कच्चे मकान में पढ़ रहे हैं।
शिक्षक योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया गया कि 10 वर्षों से दयाराम सिंह के निजी घर में विद्यालय संचालित हो रहा है। बच्चों को बैठाने एवं शिक्षा ग्रहण करने में भारी समस्या उत्पन्न हो रही है। जिला शिक्षा अधिकारी उमरिया आरयश मरावी ने कहा कि मैं अभी नया आया हूं, आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। डीपीसी से जानकारी लेकर बताऊंगा।
