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Umaria News: गेहूं की नरवाई तथा धान के पैरा को जलाने पर कलेक्टर ने लगाया प्रतिबंध, जानें और क्या कहा

Fri, 22 Nov 2024 06:39 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया Published by: उमरिया ब्यूरो Updated Fri, 22 Nov 2024 06:39 PM IST
सार

गेहूं और धान की फसल कटाई उपरांत बचे हुए गेहूं के डंठलो यानी नरवाई तथा धान के पैरा को जलाने पर उमरिया कलेक्टर ने प्रतिबंध लगाया है।

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Umaria News Collector imposed ban on burning wheat stubble and paddy straw know what else he said
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उमरिया कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी धरणेंद्र कुमार जैन ने बताया कि वर्तमान में गेहूं एवं धान की फसल कटाई अधिकांशतः कंबाइन हार्वेस्टर से की जाती है। कटाई उपरांत बचे हुए गेहूं के डंठलो (नरवाई) से भूसा न बनाकर जला देने तथा धान के पैरा को जला देने से धान का पैरा एवं भूसे की आवश्यकता पशु आहार के साथ ही अन्य वैकल्पिक रूप में एकत्रित भूसा ईंट-भट्टा एवं अन्य उद्योग भी प्रभावित होते हैं। भूसे एवं धान के पैरा की मांग प्रदेश के अन्य जिलों के साथ अनेक प्रदेशों में भी होती है।

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एकत्रित भूसा रुपये 4-5 प्रति किलोग्राम की दर पर विक्रय किया जा सकता है। इसी तरह धान का पैरा भी बहु उपयोगी है। पर्याप्त मात्रा में भूसा/पैरा उपलब्ध न होने के कारण पशु, अन्य हानिकारक पदार्थ जैसे पालिथीन आदि खाते हैं, जिससे वे बीमार होते हैं तथा अनेक बार उनकी मृत्यु हो जाने से पशुधन की हानि होती है।
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पर्यावरण की दृष्टि से है हानिकारक
नरवाई का भूसा नवंबर से दो तीन माह बाद दोगनी दर पर विक्रय होता है तथा कृषकों को यही भूसा बढ़ी हुई दरों पर क्रय करना पड़ता है। इसके साथ ही नरवाई एवं धान के पैरा में आग लगाना कृषि के लिए नुकसानदायक होने के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी हानिकारक है। इसके कारण विगत वर्षों में गंभीर अग्नि दुर्घटनाएं घटित होने से व्यापक संपति की हानि हुई है। ग्रीष्म ऋतु में बढ़ते जल संकट में बढ़ोतरी के साथ ही कानून व्यवस्था के विपरीत परिस्थितियां निर्मित होती है। खेत की आग के अनियंत्रित होने पर जन धन, संपत्ति, प्राकृतिक वनस्पति एव जीव जंतु आदि नष्ट होने से व्यापक नुकसान होने के साथ खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं के नष्ट होने से खेत की उर्वरा शक्ति शैनः शैनः घट रही है और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। खेत में पड़ा कचरा भूसा डंठल सड़ने पर भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते है, जिन्हे जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करना है। आग लगाने से हानिकारक गैसो के उत्सर्जन से पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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ऐसी स्थिति में गेहूं एवं धान की फसल कटाई उपरांत बचे हुए गेंहू के डंठलो (नरवाई) तथा धान के पैरा को जलाना प्रतिबंधित करने के लिये भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करना आवश्यक है। अत्यावश्यक परिस्थितियां निर्मित होने व समयाभाव के कारण सार्वजनिक रूप से जनसामान्य को सूचना देकर आपत्तियों को सुना जाना संभव नहीं है।


धारा-223 के अंतर्गत होगी कारवाई
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत जन सामान्य के हित सार्वजनिक संपति की सुरक्षा पर्यावरण की हानि रोकने एंव लोक व्यवस्था बनाये रखने हेतु प्रत्येक कंबाइन हार्वेस्टर के साथ भूसा तैयार करने हेतु स्ट्रा रीपर अनिवार्य करते हुये संपूर्ण उमरिया जिले की राजस्व सीमा क्षेत्र में गेहूं एव धान की फसल कटाई उपरांत बचे हुए गेहू के डंठलो (नरवाई) तथा धान के पैरा को जलाने (आग लगाये जाने) को एकपक्षीय रूप से प्रतिबंधित किया है। आदेश का उल्लंघन भा.न्या.सं. की धारा 223 के अंतर्गत दंडनीय होगा।

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