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MP News: होली पर दहकते अंगारों से निकलते हैं श्रद्धालु, अब भी निभाई जा रही 150 साल पुरानी परंपरा, देखें वीडियो

Sat, 15 Mar 2025 01:26 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sat, 15 Mar 2025 01:26 PM IST
सार

उज्जैन जिले के गोयला बुजुर्ग समेत उन्हेल और बिछड़ोद गांव में होली के दिन अंगारों पर चलने की परंपरा है। यह परंपरा इन गांवों में 150 वर्षों से निभाई जा रही है। देखें, वीडियो..

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Years old unique tradition thousands of devotees come out from the burning embers of Holi
दहकते अंगारों से निलते लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होली का त्योहार मान्यताओं और परंपराओं का समागम है। देश के अलग-अलग हिस्सों में होली हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। कहीं, फूलों से होली खेली जाती है, तो कहीं लोग एक-दूसरे पर लट्ठ बरसाते हुए होली खेलते हैं। लेकिन, उज्जैन जिले के गोयला बुजुर्ग सहित उन्हेल और बिछड़ोद तीन गांवों में होली के दिन अंगारों पर चलने की परंपरा है। यह परंपरा इन गांवों में 150 वर्षों से चली आ रही है, जो आज के आधुनिक युग में भी जारी है।
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होलिका दहन के बाद घट्टिया तहसील के गोयला बुजुर्ग के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से आग पर से गुजरते आ रहे हैं। यहां प्रत्येक वर्ष होलिका दहन के बाद रात में ग्रामीण धधकते हुए अंगारों के बीच से नंगे पैर गुजरते हैं। गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बेधड़क होकर अंगारों पर चलते हैं। वहीं, ग्राम बिछड़ोद में भी 150 वर्षों से लोग जलते अंगारों पर से गुजरते आ रहे हैं। लेकिन, आश्चर्य की बात यह है कि अंगारों के बीच से गुजरने के बाद भी किसी भी व्यक्ति या बच्चे के पैर नहीं जलते और न ही किसी ग्रामीण को जलन होती है। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग जलते हुए अंगारों पर ऐसे चलते हैं मानो जैसे फूलों पर चल रहे हों। ग्रामीण बिना किसी हिचक के इस आस्था में भाग लेते हैं। इससे पहले यहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के पश्चात ग्रामीणों के सहयोग से होलिका दहन किया जाता है। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए आसपास के कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं।
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इसी तरह ग्राम उन्हेल में भी वर्षों से यह आयोजन हो रहा है। इस वर्ष आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे, प्रसाद चढ़ाया और दहकते अंगारों से गुजरे। बूढ़े, बच्चे, जवान और महिलाएं सभी इस परंपरा में भाग लेते हैं। उनके मन में विश्वास रहता है कि इससे प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

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होलिका दहन के धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने की यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। यह क्यों और किस उद्देश्य से शुरू हुई, इसकी सटीक जानकारी किसी भी ग्रामीण के पास नहीं है। लेकिन, आस्था इतनी गहरी है कि पर्व के कई दिन पूर्व से ही तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं और बड़ी संख्या में ग्रामीण इस आयोजन में भाग लेते हैं। लोगों का मानना है कि इससे आपदा और बीमारियों से बचाव होता है।
 

सालो पुरानी अनोखी परम्परा - आस्था या अंधविश्वास होली के दहकते अंगारो से निकलते है हजारो श्रद्धा

 

सालो पुरानी अनोखी परम्परा - आस्था या अंधविश्वास होली के दहकते अंगारो से निकलते है हजारो श्रद्धा

 

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