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MP News: 'वाहिद लाला के लिए मृत्युदंड है जरूरी', फांसी की सजा सुनाकर कोर्ट ने की टिप्पणी, क्या है पूरा मामला
Fri, 27 Jun 2025 08:48 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Fri, 27 Jun 2025 08:48 PM IST
सार
कोर्ट ने वाहिद लाला को फांसी की सजा सुनाई है। 25 मार्च 2024 को एटलस चौराहा क्षेत्र में वाहिद ने अपनी पत्नी पर तीन गोलियां चलाकर हत्या कर दी थी। वाहिद लाला पहले भी 1994 और 2008 में दो लोगों की हत्या कर चुका है। वह पत्नी के चरित्र पर शक करता था।
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वाहिद लाला को फांसी की सजा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार गुप्ता की अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसमें दोषी को फांसी की सजा दिए जाने के साथ ही फैसले में यह भी लिखा गया है कि आरोपी बार-बार ऐसी घटना को अंजाम दे रहा है, जिससे जनहानि हो रही है। अब ऐसी घटना फिर से न हो इसीलिए दोषी को मृत्युदंड देना जरूरी है।
एडीपीओ कुलदीप सिंह भदोरिया ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 25 मार्च 2024 को एटलस चौराहा क्षेत्र में संजीदा बी उर्फ रानी को उसका पति वाहिद लाला उम्र 32 वर्ष निवासी देवास रोड आदर्श नगर एटलस चौराहे पर शरीफ लाला उर्फ गुड्डू के मकान पर ले गया था। वहां उसने लाला को आवाज़ लगाई और जैसे ही घर के लोग बाहर निकले तो उसने संजीदा पर तीन फायर कर दिए। संजदी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में नागझिरी थाना पुलिस ने बेटे फरहान की रिपोर्ट पर पिता वाहिद के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसे सीहोर से गिरफ्तार कर लिया था। वाहिद खूंखार अपराधी था जिसने संजीदा के पहले भी वर्ष 1994 में तराना और वर्ष 2008 में खाराकुआं थाना क्षेत्र में दो लोगों की हत्या कर दी थी। इसीलिए पूरे मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया और नागझिरी थाना प्रभारी कमल निगवाल ने जल्द से जल्द चालान और सबूत न्यायालय में पेश कर दिए। जिसके बाद न्यायालय में पेश किए गए साक्ष्य एवं तर्कों से सहमत होकर वाहिद लाला को फांसी की सजा सुनाई गई है।
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पत्नी पर करता था चरित्र शंका
बताया जाता है कि वाहिद लाला पत्नी संजीदा बी के चरित्र पर शंका करता था। अपनी इसी शंका के चलते वह एटलस चौराहे पर रहने वाले शरीफ लाला के घर पहुंचा था, जहां उसने प्रेम प्रसंग के चलते शरीफ के घर के सामने संजीदा को गोली मार दी थी।
ऐसे सबूत जुटाए की जल्द आ गया फैसला
नागझिरी थाना प्रभारी कमल निगवाल ने 80 दिन में चालान पेश कर कोर्ट के सामने केस डायरी और सबूत पेश किए थे। इस मामले में लोक अभियोजक मिश्रीलाल चौधरी द्वारा पैरवी की गई और प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन राजेंद्र कुमार खांडेकर एवं एडीपीओ उमेश सिंह तोमर ने कैस की मजबूती के लिए विधिक अनुसंधान और सबूत संकलन में पुलिस को बारीकी से मार्गदर्शित किया था।
फास्टट्रैक कोर्ट में प्रकरण रखकर सजा दिलवाने का कर रहे प्रयास : एसपी
एसपी प्रदीप शर्मा का कहना है कि हमारा प्रयास है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से हम जल्द से जल्द अपराधियों को सजा दिलाई इस वर्ष हमने लगभग 80 प्रतिशत चिन्हित मामलों में आरोपियों को सजा दिलवाई है आगे भी हमारा यही प्रयास है।
80 दिन में चालान पेश
पुलिस ने मामले में 80 दिन के अंदर चालान पेश किया। न्यायालय ने इस मामले में जब देखा तो पाया आरोपी खूंखार अपराधी है। जिसने 1994 में अपने एक परिचित की तराना तहसील क्षेत्र में हत्या कर दी थी। दूसरी हत्या शहर के खारकुंआ क्षेत्र में की। इस मामले में दोनों के बीच समझौता कर बरी हो गया। अब तीसरी बार हत्या पत्नी की कर दी।
कोर्ट की टिप्पणी- ऐसे खूंखार अपराधी को मृत्युदंड जरूरी
उज्जैन जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को कोट करते हुए लिखा है कि जो व्यक्ति जिस पर प्रभाव रखता हो अथवा जो उस पर विश्वास करता है, उसे मारने की धमकी देता है व मारता है तो ऐसा व्यक्ति इस तरह की घटना को दोबारा भी अंजाम दे सकता है। इस तरह का अपराध करने वालों के लिए मृत्युदंड जरूरी है।
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एडीपीओ कुलदीप सिंह भदोरिया ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 25 मार्च 2024 को एटलस चौराहा क्षेत्र में संजीदा बी उर्फ रानी को उसका पति वाहिद लाला उम्र 32 वर्ष निवासी देवास रोड आदर्श नगर एटलस चौराहे पर शरीफ लाला उर्फ गुड्डू के मकान पर ले गया था। वहां उसने लाला को आवाज़ लगाई और जैसे ही घर के लोग बाहर निकले तो उसने संजीदा पर तीन फायर कर दिए। संजदी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में नागझिरी थाना पुलिस ने बेटे फरहान की रिपोर्ट पर पिता वाहिद के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसे सीहोर से गिरफ्तार कर लिया था। वाहिद खूंखार अपराधी था जिसने संजीदा के पहले भी वर्ष 1994 में तराना और वर्ष 2008 में खाराकुआं थाना क्षेत्र में दो लोगों की हत्या कर दी थी। इसीलिए पूरे मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया और नागझिरी थाना प्रभारी कमल निगवाल ने जल्द से जल्द चालान और सबूत न्यायालय में पेश कर दिए। जिसके बाद न्यायालय में पेश किए गए साक्ष्य एवं तर्कों से सहमत होकर वाहिद लाला को फांसी की सजा सुनाई गई है।
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पत्नी पर करता था चरित्र शंका
बताया जाता है कि वाहिद लाला पत्नी संजीदा बी के चरित्र पर शंका करता था। अपनी इसी शंका के चलते वह एटलस चौराहे पर रहने वाले शरीफ लाला के घर पहुंचा था, जहां उसने प्रेम प्रसंग के चलते शरीफ के घर के सामने संजीदा को गोली मार दी थी।
ऐसे सबूत जुटाए की जल्द आ गया फैसला
नागझिरी थाना प्रभारी कमल निगवाल ने 80 दिन में चालान पेश कर कोर्ट के सामने केस डायरी और सबूत पेश किए थे। इस मामले में लोक अभियोजक मिश्रीलाल चौधरी द्वारा पैरवी की गई और प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन राजेंद्र कुमार खांडेकर एवं एडीपीओ उमेश सिंह तोमर ने कैस की मजबूती के लिए विधिक अनुसंधान और सबूत संकलन में पुलिस को बारीकी से मार्गदर्शित किया था।
फास्टट्रैक कोर्ट में प्रकरण रखकर सजा दिलवाने का कर रहे प्रयास : एसपी
एसपी प्रदीप शर्मा का कहना है कि हमारा प्रयास है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से हम जल्द से जल्द अपराधियों को सजा दिलाई इस वर्ष हमने लगभग 80 प्रतिशत चिन्हित मामलों में आरोपियों को सजा दिलवाई है आगे भी हमारा यही प्रयास है।
80 दिन में चालान पेश
पुलिस ने मामले में 80 दिन के अंदर चालान पेश किया। न्यायालय ने इस मामले में जब देखा तो पाया आरोपी खूंखार अपराधी है। जिसने 1994 में अपने एक परिचित की तराना तहसील क्षेत्र में हत्या कर दी थी। दूसरी हत्या शहर के खारकुंआ क्षेत्र में की। इस मामले में दोनों के बीच समझौता कर बरी हो गया। अब तीसरी बार हत्या पत्नी की कर दी।
कोर्ट की टिप्पणी- ऐसे खूंखार अपराधी को मृत्युदंड जरूरी
उज्जैन जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को कोट करते हुए लिखा है कि जो व्यक्ति जिस पर प्रभाव रखता हो अथवा जो उस पर विश्वास करता है, उसे मारने की धमकी देता है व मारता है तो ऐसा व्यक्ति इस तरह की घटना को दोबारा भी अंजाम दे सकता है। इस तरह का अपराध करने वालों के लिए मृत्युदंड जरूरी है।
