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विक्रमोत्सव प्रर्दशनी: उज्जैनवासी देख रहे हजारों साल पुराने हथियार और तोप के गोले, करोड़ों साल पुराने जीवाश्म

Mon, 03 Mar 2025 10:44 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Mon, 03 Mar 2025 10:44 AM IST
सार

उज्जैन में विक्रमोत्सव प्रर्दशनी लगी है। यहां शहरवासी हजारों साल पुराने हथियार, तोप के गोले और पांच करोड़ साल पुराने जीवाश्म देख रहे हैं। 

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Vikramotsav Exhibition Ujjain residents are seeing thousands of years old weapons and cannonballs
विक्रमोत्सव में लगी ऐसी प्रर्दशनी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विक्रमोत्सव में इस बार एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। बिड़ला भवन सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर में प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों की यह प्रदर्शनी शुरू हुई है। अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर के निदेशक डॉ. आरसी ठाकुर के अनुसार, प्रदर्शनी में सैकड़ों साल पुराने शस्त्र रखे गए हैं।

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प्रदर्शनी में 1817 के एंग्लो-मराठा युद्ध से जुड़े हथियार भी प्रदर्शित किए गए हैं। महिदपुर में हुए इस युद्ध में तीन हजार मराठा सैनिकों ने 20 दिसंबर 1817 की रात बलिदान दिया था। युद्ध क्षेत्र से प्राप्त तोप के गोले, संगीन और टूटी तलवारें भी यहां रखी गई हैं। प्रदर्शनी में धातु और कछुए की पीठ से बनी ढालें भी शामिल हैं। इनका उपयोग तलवार के वार से बचाव के लिए किया जाता था। इस प्रर्दशनी का विशेष आकर्षण 80 किलोग्राम वजनी लोहे का बख्तरबंद चोगा है। यह प्रदर्शनी आने वाली पीढ़ियों को भारत के समृद्ध इतिहास और वीर योद्धाओं की गाथा से परिचित करवा रही है। प्रदर्शनी में रखी सभी वस्तुएं प्राचीन काल के युद्धों में प्रयोग की गई है।
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प्रदर्शनी में रखे ये हथियार
पुरानी लोहे व तांबे की तलवारें, बर्डी, कवच, तोप के गोले, बारूद दानी, ढाल, कंठ पट्टा, वज्र, अंकुश, खंजर, दंड पट्ट, बख्तरबंद, धनुष बाण, कुल्हाड़ी, मुरकी, पुराने समय की दूरबीन, कुकरी, शिरस्त्राण, मशालें, महिला सुरक्षा के लिए संगीन, फरसे, भाले, हाथी दांत से बनी दस्ट गन जिसमें दश्मन पर वार करने के लिए जहरीली सुईं फूंकी जाती थी। सुरक्षा के लिए संगीन, फरसे, भाले, हाथी दांत से बनी डस्ट गन जिसमें दुश्मन पर वार करने के लिए जहरीली सुई फूंकी जाती थी। पीतल से बनी दूरबीन, मशाल के साथ ही पांच करोड़ साल पुराने जीवाश्म भी प्रदर्शनी में रखे गए हैं।
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प्राचीन दुर्लभ अस्त्र शस्त्रों की प्रदर्शनी
प्रसिद्ध इतिहासकार और पुराविद डॉ. आरसी ठाकुर द्वारा स्थापित अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर द्वारा प्राचीन व दुर्लभ अस्त्र शस्त्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इस प्रदर्शनी मे विशेष रूप से 2 से 8 इंच तक के अनोखे हथियार जो लगभग साढ़े चार हजार वर्ष पुराने हैं। इन्हें प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए जाएंगे। साथ ही युद्ध में प्रयुक्त होने वाले शस्त्र जैसे बारूद दानी, चारों ओर धार वाले शस्त्र, ऐतिहासिक खंजर, आग लगाने वाले तीर, दोहरा शास्त्र अंकुश, 5 किलो वजनी तोप के गोले, सबसे प्राचीन तलवार व ढाल, तांबे से बनी कुल्हाडिय़ां, तीर के फलक, छुर, पीतल लोहे व कांच से बनी तलवार की मुठें और अष्टधातु से निर्मित कवच इस प्रदर्शनी आकर्षण के खास केंद्र है।

विक्रमोत्सव में लगी ऐसी प्रर्दशनी, जहां शहरवासी देख रहे हजारो वर्ष पुराने हथियार तोप के गोले और

प्रदर्शनी में रखी तोप

विक्रमोत्सव में लगी ऐसी प्रर्दशनी, जहां शहरवासी देख रहे हजारो वर्ष पुराने हथियार तोप के गोले और

पुराने जीवाश्म

विक्रमोत्सव में लगी ऐसी प्रर्दशनी, जहां शहरवासी देख रहे हजारो वर्ष पुराने हथियार तोप के गोले और

प्रर्दशनी

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