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Sawan 2023: पिशाच मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन से मिलता है मोक्ष, पिंडदान विसर्जन से पूर्व पूजन का है खास महत्व

Fri, 25 Aug 2023 12:03 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 25 Aug 2023 12:03 PM IST
सार

Sawan 2023: पिशाच मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन से लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पिंडदान विसर्जन के पूर्व यदि पिशाच मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन किए जाएं तो पितरों को कभी भी पिशाच योनी नहीं मिलती।

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Sawan 2023: know interesting fact about Pishacha Mukteshwar Mahadev temple ujjain
पिशाच मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन से मिलता है मोक्ष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धार्मिक नगरी उज्जैन में मां शिप्रा के तट रामघाट पर एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जहां विराजित शिवलिंग के दर्शन करने मात्र से ही कभी भी पिशाच योनि प्राप्त नहीं होती है। साथ ही यहां पूजन अर्चन करने से वह पितृ भी पिशाच की योनि से मुक्त हो जाते हैं जो कि नर्क की यातना भोग रहे हों। रामघाट पर शिप्रा आरती द्वार के पास और धर्मराज मंदिर के सामने श्री पिशाच मुक्तेश्वर महादेव का अतिप्राचीन मंदिर स्थित है, जो कि 84 महादेव में 68वें स्थान पर आते हैं।
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मंदिर की पुजारी उषा ज्ञानेश जोशी ने बताया कि श्री पिशाच मुक्तेश्वर की महिमा अपरंपार है। मंदिर में भगवान का काले पाषाण का शिवलिंग हैं। साथ ही भगवान श्री गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय के साथ ही द्वार पर माता गंगा, माता शिप्रा और हनुमान जी की प्रतिमा भी है। गर्भग्रह में नाग की छाया के नीचे यह शिवलिंग विराजित है जहां एक और त्रिशूल और दूसरी और डमरु लगा हुआ है, जबकि जलाधारी पर दो सूर्य और चंद्रमा भी हैं। रामघाट पर पिंडदान के विसर्जन के पूर्व पिंडो को पिशाच मुक्तेश्वर के ही दर्शन करवाए जाते हैं, ताकि इन्हें पिशाच की योनि न मिले। 
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पिशाच मुक्तेश्वर महादेव की कथा
स्कंद पुराण के अवंती खंड में उल्लेखित श्री पिशाच मुक्तेश्वर की कथा बताती है कि वर्षों पूर्व सोमा नाम का एक व्यक्ति हुआ करता था जो अत्यधिक धनवान था, लेकिन वह कभी किसी देवता की पूजा अर्चना नहीं करता था। अधर्म के रास्ते पर चलने के कारण उसकी कोई संतान नहीं थी। इस जन्म में तो कई कष्टों से सोमा की मौत हुई ही लेकिन अगले जन्म मे उसे पूर्व में किए गए अत्याचार के कारण पिशाच की योनि मिली। इस जन्म में भी वह अपने स्वभाव के अनुसार ही बेकसूर लोगों को परेशान करता था, एक दिन जब वह एक ब्राह्मण की जान लेना चाहता था। उसी समय ब्राह्मण ने उसे अपनी जान ना लेने पर इस पिशाच की योनि से मुक्त होने का मार्ग बताने को कहा क्योंकि पिशाच कष्टों से परेशान हो चुका था इसीलिए उसने तुरंत ब्राह्मण की बात सुनी और महाकाल वन के रामघाट स्थित श्री पिशाच मुक्तेश्वर के दर्शन करने पहुंच गया। यहां जैसे ही पिशाच ने श्री पिशाचमुक्तेश्वर के दर्शन किए वैसे ही वह इस योनि से मुक्त हो गया और परमगति को प्राप्त हुआ। कथा बताती है कि यह एक ऐसे महादेव हैं, जिनके दर्शन करने मात्र से ही किसी को पिशाच की योनि प्राप्त नहीं होती और उनके पूर्वज जो कि किसी कारणवश इस योनि की यातना भुगत रहे हैं वह भी इस योनि से मुक्त हो जाते हैं।
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