Ujjain News: महाकाल मंदिर प्रांगण में नारदीय कीर्तन आज से, इस वर्ष पं. कानडकर नहीं डॉ.अपामार्जने करेंगे कीर्तन
श्री महाकालेश्वर मंदिर में 115 वर्षों से चली आ रही हरिकीर्तन परंपरा जारी है। इस वर्ष डॉ. अजय अपामार्जने कीर्तन करेंगे। वहीं, श्री महाकाल महालोक में 9 दिवसीय शिव विवाहोत्सव कला संगम का शुभारंभ हुआ, जिसमें नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
विस्तार
नौ दिवसीय कथा का आयोजन 18 फरवरी से 26 फरवरी तक किया जाएगा। श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि निमित्त वर्ष 1909 से कानडकर परिवार, इंदौर द्वारा हरिकीर्तन की सेवा दी जा रही थी। इसी परंपरा के अंतर्गत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा गत वर्षों में कथारत्न हरिभक्त परायण पं. रमेश कानडकर के शिव कथा व हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता रहा। यह आयोजन सायं 4:30 से 6:00 बजे तक मंदिर परिसर में नवग्रह मंदिर के पास संगमरमर के चबूतरे पर होता था।
इस वर्ष अधिक आयु एवं स्वास्थ्य कारणों से पं. रमेश कानडकर कथा करने में असमर्थ हैं। इस कारण मंदिर प्रबंध समिति ने इस वर्ष नौ दिवसीय नारदीय कीर्तन हेतु पुणे से राष्ट्रीय कीर्तनकार, आयुर्वेदाचार्य डॉ. अजय अपामार्जने को आमंत्रित किया है।
9 दिवसीय शिव विवाहोत्सव कला संगम का भव्य शुभारंभ
श्री महाकाल महालोक स्थित धनुष द्वार के पास ओपन ऑडिटोरियम में कला अभिव्यक्ति मंच के तत्वावधान में 9 दिवसीय शिव विवाहोत्सव कला संगम का शुभारंभ सोमवार शाम को हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कला गुरु श्रीमती पद्मजा रघुवंशी एवं डॉ. पल्लवी किशन ने दीप प्रज्वलन कर किया।
प्रमुख प्रस्तुतियां:
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नाद ब्रह्म: विनायक शर्मा के निर्देशन में 16 कलाकारों द्वारा सामूहिक रूप से गायन एवं वादन का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
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प्रतिकल्पा नृत्य संस्थान: डॉ. पल्लवी के निर्देशन में नृत्यांगनाओं ने भावमयी अभिव्यक्ति के साथ रुद्राष्टकम की प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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शिव पंचाक्षर नृत्य: श्रीमती प्रतिभा रघुवंशी एलची के निर्देशन में प्रस्तुत इस नृत्य के बाद रुद्राष्टकम का अनूठा प्रदर्शन किया गया।
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एकल कथक नृत्य: आकार सांस्कृतिक संस्थान की प्रशिक्षित शिष्या, बेंगलुरु निवासी सुश्री अंकिता पाठक रामानंद द्वारा एकल कथक नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। इसमें मृदंग संगत अदम्य रामानंद द्वारा और गायन श्रीमती रामानंदक द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम का संचालन कला गुरु एवं उद्घोषक पं. सुदर्शन अयाचित ने किया। पूरे आयोजन को दर्शकों ने अत्यंत सराहा और भव्य प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
