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MP News: नागदा में दोनों दलों में जोर-आजमाइश, बेटे को तैयार कर रहे हैं सुल्तानसिंह शेखावत

Thu, 15 Dec 2022 08:23 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 15 Dec 2022 08:23 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों में एक साल का समय है। हालांकि, ज्यादातर सीटों पर टिकट की जोर-आजमाइश दिखने लगी है। नागदा में तो दोनों ही पार्टियों में तगड़ी जोर-आजमाइश है। 
 

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Election stir started in Nagda, both the parties vying for ticket
Bjp flag, congress flag - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

गुजरात के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा और कांग्रेस का फोकस मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अगले साल होने वाले चुनावों पर आ गया है। इस वजह से मध्यप्रदेश की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर दावेदारों ने अपने-अपने तरीके से जोर-आजमाइश शुरू कर दी है। ऐसी ही जोर-आजमाइश इन दिनों उज्जैन जिले की नागदा विधानसभा सीट पर दिख रही है। 
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कांग्रेस में ऐनवक्त तक पाला बदलने की सियासत नहीं हुई तो चार बार के विधायक दिलीपसिंह गुर्जर के टिकट को कोई खतरा फिलहाल तो नहीं है। भाजपा में तो एक अनार सौ बीमार की स्थिति बन गई है। कुछ लोगों ने गुपचुप तो कुछ ने खुलकर दावेदारी जताना शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त असंगठित कामगार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन सुल्तानसिंह शेखावत की दावेदारी अपनी जगह है। अब उनके इंजीनियर बेटे मोतीसिंह शेखावत भी सक्रियता दिखा रहे हैं। कयास लग रहे हैं कि अगर 68 वर्ष की आयु की वजह से सुल्तानसिंह को टिकट मिलने में दिक्कत आई तो उनकी जगह उनके बेटे का नाम आगे किया जा सकता है। 
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पारंपरिक रूप से कांग्रेस की सीट
भाजपा ने अब तक आठ बार विधानसभा चुनाव लड़ा है। इसमें भी सिर्फ तीन बार उसे जीत मिली है। पार्टी ने कभी पिछड़ा वर्ग तो कभी ठाकुर कैंडिडेट पर भरोसा जताया। 1985, 1993, 2003, 2008 और 2018 में भाजपा को यहां हार ही नसीब हुई है। पांच में से तीन बार चुनाव हारे ठाकुर प्रत्याशी लालसिंह राणावत का चेहरा बदला और 2008 में दिलीपसिंह शेखावत पर भरोसा किया था। पर वे भी हार गए। हालांकि, 2013 में शेखावत ने कांग्रेस के गुर्जर का रास्ता रोका और विधानसभा पहुंच गए। 2018 में शेखावत को हार नसीब हुई। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि तीन में से दो बार हार चुके शेखावत का टिकट कट सकता है। इस वजह से नए उम्मीदवारों के नाम भी सामने आ रहे हैं। नगर पालिका चुनावों में भाजपा में बगावत हुई थी और नागदा में 29 व खाचरौद में सात भाजपा नेताओं को निलंबित किया गया था। नतीजा यह निकला कि खाचरौद में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। 
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जटिया इम्पैक्ट से इनकार नहीं 
उज्जैन के पूर्व सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया हाल ही में भाजपा संसदीय बोर्ड में शामिल किए गए हैं। यह भी नागदा में बड़ा फेक्टर साबित होगा। जिन 36 लोगों को बगावत की वजह से बाहर किया गया है, उनकी घर वापसी हो सकती है। इस समय ठाकुर, गुर्जर और ब्राह्मण निर्णायक वोटरों वाली इस सीट पर भाजपा से सुल्तानसिंह शेखावत, दिलीप सिंह शेखावत, तेजबहादुर सिंह चौहान, लालसिंह राणावत के नाम चर्चा में है। पूर्व नपा उपाध्यक्ष राजेश धाकड़ भी दावेदारी कर रहे हैं। सांसद प्रतिनिधि प्रकाश जैन खुलकर इच्छा जता चुके हैं। सिंधिया से जुड़े सूर्यप्रकाश शर्मा और राधेश्याम बंबोरिया की भी दावेदारी है। पूर्व नपा अध्यक्ष विजय कुमार सेठी तथा अनोखीलाल भंडारी की भी दावेदारी है।
 
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