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MP News: अखाड़ा परिषद उज्जैन ने किया मुख्यमंत्री का अभिनंदन, CM बोले- साधु-संतों के समन्वय से ही होगा सिंहस्थ
Tue, 29 Oct 2024 09:49 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Tue, 29 Oct 2024 09:49 PM IST
सार
MP: 2028 में उज्जैन में होने वाले वैश्विक सिंहस्थ की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उज्जैन हमेशा से ही सिंहस्थ में भाग लेने के लिए देशभर से आने वाले संतों के लिए जाना जाता रहा है। इसी सिलसिले को लेकर सीएम मोहन यादव ने संतों से मुलाकात की।
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सीएम मोहन यादव संतों के साथ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरिद्वार कि तर्ज पर उज्जैन में भी सिंहस्थ मेला क्षेत्र में अखाड़ों, साधु-संतों के आश्रमों, मठों में स्थायी निर्माण कि अनुमती देने के निर्णय पर स्थानीय अखाड़ा परिषद द्वारा भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का अभिनंदन किया। शॉल-श्रीफल के साथ उन्हें गोल्ड प्लेटेड मयूर आकृति का आकर्षक स्मृति चिन्ह भेंट किया। यहां चर्चा दौरान संतों ने कहां की स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी खुद ही कई निर्णय कर लेते है, जबकी पहले संतों से सलाह-सुझाव लेना चाहिए।
इस पर सीएम ने कहा कि आगे से संतों के समन्वय-तालमैल से ही सिंहस्थ संबंधी निर्णय होंगे। करीब आधे घंटे तक सीएम-संतों के बीच सिंहस्थ को लेकर बातचीत हुई, जिसमें मुख्य रुप से शिप्रा नदी गहरीकरण, घाटों के विस्तार, मेला क्षेत्र के कार्य शीघ्रता से पूर्ण करने जैसी चर्चा रहीं। इसके उपरांत सीएम ने संतों के साथ सहभोज किया एवं शॉल-श्रीफल भेंट कर सभी से आशीर्वाद लिया।
स्थानीय अखाड़ा परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष महंत डॉ रामेश्वर दास, महामंत्री महंत रामेश्वरगिरी महाराज कि अगुवाई में स्थानीय संत समाज ने भोपाल में सीएम का अभिनंदन किया और उनका आभार माना। साथ ही अपेक्षा रखी कि पिछली बार आश्रमों में निर्माण कार्य विलंब से शुरू होने में वे अधूरे रह गए थे, इस बार ऐसा नहीं हो।
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इस पर सीएम ने कहा कि हमनें अभी से ही अधिकारियों को तेजी से काम कराने का बोल दिया है। सभी बाहरी मार्ग सहित मेला क्षेत्र की सड़कें फोरलेन हो रही है, आंतरिक मार्ग चौड़ीकरण, रेलवे कनेक्टिविटी सहित सभी काम पर हमारा फोकस है। इस दौरान महंत आनंदपुरी महाराज, जूना अखाड़ा, बड़ा उदासीन से महंत सत्यानंद, निमोर्ही से महंत भगवानदास, महानिवार्णी से महंत श्यामगिरी, महंत राजीवदास, महंत सेवागिरी, आव्हान से रामेश्वरगिरी, समुंदर गिरी, निरंजनी से सुरेशानंदपूरी, अग्नि अखाड़ें के कृष्णानंद ब्रहम्चारी, रमेशानंद ब्रहम्चारी, नया उदासीन के मंगलदार महाराज, महंत विशालदास, महंत राघवेंद्रदास, रामनुजकोट के माधव प्रपन्नाचार्य, महंत सहदेवानंद गिरी, महंत देवगिरी, आचार्य गौरव सहित स्थानीय अखाड़ा परिषद प्रबंधक गोविंद सोलंकी, समन्वयक डॉ राहुल कटारिया सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
संतों ने सीएम से रखी यह प्रमुख मांगें
1- मुख्य रूप से दो भाग पहला मंगलनाथ क्षेत्र एवं दुसरा दत्त अखाड़ा क्षेत्र, मंगलनाथ क्षेत्र में वैष्णव संप्रदाय के रामानंदाचार्य द्वार एवं शैव संप्रदाय में शंकराचार्य द्वार का निर्माण तथा उदासीन संप्रदाय के इष्ट देव आचार्य श्री चंद्रदेव द्वार का निर्माण रामानुजकोट पर होना चाहिए।
2- देवास की फेक्ट्रीयों का जहरीला पानी गदईपीपलीया गांव के पास क्षिप्रा में मिलता है, इससे क्षिप्रा प्रदुषित हो रही है इस पानी को तत्काल बंद किया जाए। यहां जहरीले पानी से जलचर जीव मर रहे है।
3- शहर में मौजूद सप्त सागरों के सीमांकन गहरीकरण सौंदर्यीकरण के साथ ही इन्हें अतिक्रमण से मुक्त किया जाना चाहिए। प्रत्येक तालाब 25 फीट का पक्का कुआं भी बनाना चाहिए, ताकि उसके स्वच्छ जल से पुरूषोत्तम मास में पूजा पाठ हो सके।
4- शहर के दो लघु पौराणिक तालाब गयाकोठा व नीलगंगा का गहरी व सौंदर्यीकरण हो। नीलगंगा को अंजनी सरोवर भी कहा जाता है, यहां अंजनी माता की मूर्ति स्थापित हो। साथ ही उज्जैन में चारों दिशाओं में भव्य धार्मिक द्वार बनाना चाहिए।
5- 84 महादेव मंदिरों के जिर्णोद्धार, जो मंदिर निजी भूमि में स्थित है, वहां आधा बीघा जमीन अधिग्रहित कर वहां एक शेड व हैंडपंप स्थापित हो ताकि श्रावण मास में श्रद्धालु पूजन अभिषेक कर सके एवं मंदिर पहुंच मार्ग पक्के हो। शहर के मध्य पुष्कर सागर को अतिक्रमण से मुक्त करवाया जाए, इस सागर की 3.5 बीघा जमीन अधिकृत है।
रामादल के संतों की पेशवाई मार्ग जो कि खाकचैक से प्रारंभ होता है, जो शहर के आंतरिक मार्गों से होकर रामघाट पहुंचता है। साथ ही सिंहस्थ पड़ाव स्थल नीलगंगा से शैव अखाड़ों की पेशवाई का मार्ग, इन समूचे मार्ग का चैड़ीकरण किया जाना अति आवश्यक है।
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इस पर सीएम ने कहा कि आगे से संतों के समन्वय-तालमैल से ही सिंहस्थ संबंधी निर्णय होंगे। करीब आधे घंटे तक सीएम-संतों के बीच सिंहस्थ को लेकर बातचीत हुई, जिसमें मुख्य रुप से शिप्रा नदी गहरीकरण, घाटों के विस्तार, मेला क्षेत्र के कार्य शीघ्रता से पूर्ण करने जैसी चर्चा रहीं। इसके उपरांत सीएम ने संतों के साथ सहभोज किया एवं शॉल-श्रीफल भेंट कर सभी से आशीर्वाद लिया।
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स्थानीय अखाड़ा परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष महंत डॉ रामेश्वर दास, महामंत्री महंत रामेश्वरगिरी महाराज कि अगुवाई में स्थानीय संत समाज ने भोपाल में सीएम का अभिनंदन किया और उनका आभार माना। साथ ही अपेक्षा रखी कि पिछली बार आश्रमों में निर्माण कार्य विलंब से शुरू होने में वे अधूरे रह गए थे, इस बार ऐसा नहीं हो।
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इस पर सीएम ने कहा कि हमनें अभी से ही अधिकारियों को तेजी से काम कराने का बोल दिया है। सभी बाहरी मार्ग सहित मेला क्षेत्र की सड़कें फोरलेन हो रही है, आंतरिक मार्ग चौड़ीकरण, रेलवे कनेक्टिविटी सहित सभी काम पर हमारा फोकस है। इस दौरान महंत आनंदपुरी महाराज, जूना अखाड़ा, बड़ा उदासीन से महंत सत्यानंद, निमोर्ही से महंत भगवानदास, महानिवार्णी से महंत श्यामगिरी, महंत राजीवदास, महंत सेवागिरी, आव्हान से रामेश्वरगिरी, समुंदर गिरी, निरंजनी से सुरेशानंदपूरी, अग्नि अखाड़ें के कृष्णानंद ब्रहम्चारी, रमेशानंद ब्रहम्चारी, नया उदासीन के मंगलदार महाराज, महंत विशालदास, महंत राघवेंद्रदास, रामनुजकोट के माधव प्रपन्नाचार्य, महंत सहदेवानंद गिरी, महंत देवगिरी, आचार्य गौरव सहित स्थानीय अखाड़ा परिषद प्रबंधक गोविंद सोलंकी, समन्वयक डॉ राहुल कटारिया सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
संतों ने सीएम से रखी यह प्रमुख मांगें
1- मुख्य रूप से दो भाग पहला मंगलनाथ क्षेत्र एवं दुसरा दत्त अखाड़ा क्षेत्र, मंगलनाथ क्षेत्र में वैष्णव संप्रदाय के रामानंदाचार्य द्वार एवं शैव संप्रदाय में शंकराचार्य द्वार का निर्माण तथा उदासीन संप्रदाय के इष्ट देव आचार्य श्री चंद्रदेव द्वार का निर्माण रामानुजकोट पर होना चाहिए।
2- देवास की फेक्ट्रीयों का जहरीला पानी गदईपीपलीया गांव के पास क्षिप्रा में मिलता है, इससे क्षिप्रा प्रदुषित हो रही है इस पानी को तत्काल बंद किया जाए। यहां जहरीले पानी से जलचर जीव मर रहे है।
3- शहर में मौजूद सप्त सागरों के सीमांकन गहरीकरण सौंदर्यीकरण के साथ ही इन्हें अतिक्रमण से मुक्त किया जाना चाहिए। प्रत्येक तालाब 25 फीट का पक्का कुआं भी बनाना चाहिए, ताकि उसके स्वच्छ जल से पुरूषोत्तम मास में पूजा पाठ हो सके।
4- शहर के दो लघु पौराणिक तालाब गयाकोठा व नीलगंगा का गहरी व सौंदर्यीकरण हो। नीलगंगा को अंजनी सरोवर भी कहा जाता है, यहां अंजनी माता की मूर्ति स्थापित हो। साथ ही उज्जैन में चारों दिशाओं में भव्य धार्मिक द्वार बनाना चाहिए।
5- 84 महादेव मंदिरों के जिर्णोद्धार, जो मंदिर निजी भूमि में स्थित है, वहां आधा बीघा जमीन अधिग्रहित कर वहां एक शेड व हैंडपंप स्थापित हो ताकि श्रावण मास में श्रद्धालु पूजन अभिषेक कर सके एवं मंदिर पहुंच मार्ग पक्के हो। शहर के मध्य पुष्कर सागर को अतिक्रमण से मुक्त करवाया जाए, इस सागर की 3.5 बीघा जमीन अधिकृत है।
रामादल के संतों की पेशवाई मार्ग जो कि खाकचैक से प्रारंभ होता है, जो शहर के आंतरिक मार्गों से होकर रामघाट पहुंचता है। साथ ही सिंहस्थ पड़ाव स्थल नीलगंगा से शैव अखाड़ों की पेशवाई का मार्ग, इन समूचे मार्ग का चैड़ीकरण किया जाना अति आवश्यक है।
