Ujjain News: लक्ष्मी पूजन के बाद कब उठाएं पटिया-पूजन सामग्री, जानें दुकान खोलने और गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
Ujjain News: दीपावली के बाद लक्ष्मी पूजन की पटिया उठाने का शुभ समय 22 अक्तूबर को विभिन्न मुहूर्तों में रहेगा। इसी दिन गोवर्धन पूजा भी की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सुबह 6:26 से 8:42 तक और शाम 3:29 से 5:44 तक पूजा सर्वश्रेष्ठ रहेगी।
विस्तार
दीपावली पर्व के मुख्य अनुष्ठान लक्ष्मी पूजन के बाद पटिया (पूजन सामग्री) उठाने का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास (पंचांगकर्ता एवं पारंपरिक तीर्थ पुरोहित) के अनुसार, पूजन सामग्री को पूजन के तुरंत बाद नहीं हटाना चाहिए, बल्कि कुछ समय तक उसी स्थान पर रहने देना चाहिए ताकि देवी लक्ष्मी की कृपा स्थायी बनी रहे।
उन्होंने बताया कि पटिया को रात्रि में नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से पूजन का फल प्रभावित हो सकता है। पूजन सामग्री को सावधानीपूर्वक और श्रद्धा के साथ ही उठाना चाहिए ताकि कोई अपवित्रता न हो।
लक्ष्मी पूजन के बाद पटिया उठाने के शुभ मुहूर्त (22 अक्तूबर 2025, बुधवार)
- प्रातः 6:26 से 7:52 — लाभ मुहूर्त
- प्रातः 7:52 से 9:19 — अमृत मुहूर्त
- प्रातः 10:45 से 12:10 — शुभ मुहूर्त
- शाम 4:29 से 5:55 — लाभ मुहूर्त
- शाम 7:29 से 9:03 — शुभ मुहूर्त
- रात 9:03 से 10:37 — अमृत मुहूर्त
प्रतिपदा तिथि बुधवार रात्रि 8:18 बजे तक रहेगी। इस अवधि में गोवर्धन पूजा करना शुभ रहेगा।
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गोवर्धन पूजा 2025- तिथि और महत्व
पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि इस वर्ष 21 अक्तूबर की शाम 5:54 से शुरू होकर 22 अक्तूबर की रात 8:16 तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्तूबर 2025 (बुधवार) को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाता है, जो प्रकृति संरक्षण और गोसेवा का प्रतीक है।
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
- प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 6:26 से 8:42 तक
- सायंकालीन मुहूर्त: दोपहर 3:29 से शाम 5:44 तक
इन दोनों समयावधियों में पूजन करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक पूजा गाय के गोबर, फूल और नैवेद्य से की जाती है।
गोवर्धन पूजा की आवश्यक सामग्री
रोली, अक्षत, चावल, बताशा, नैवेद्य, मिठाई, गंगाजल, पान, फूल, खीर, सरसों के तेल का दीपक, गाय का गोबर, गोवर्धन पर्वत की तस्वीर, दही, शहद, धूप-दीप, कलश, केसर फूल की माला, कृष्ण जी की प्रतिमा या तस्वीर और गोवर्धन पूजा कथा की पुस्तक आवश्यक मानी गई है।
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