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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Three shepherds returned from the clutches of kidnappers in Sheopur, Madhya Pradesh

MP News: अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटकर लौटे तीन चरवाहे, कहा- बदमाशों ने लाठी-डंडों से पीटा, पैर के नाखून जलाए

Sun, 22 Jan 2023 07:34 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sun, 22 Jan 2023 07:34 PM IST
सार

चरवाहों ने बताया कि कूनों के जंगल में शनिवार को बदमाश दिन में सो रहे थे। उसी वक्त हम घायल साथी रामस्वरूप को कंधे पर बिठाकर चुपचाप वहां से भाग आए थे। इस मामले में पुलिस बदमाशों को ढूंढ़ने के लिए चरवाहों से पूछताछ कर रही है।

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Three shepherds returned from the clutches of kidnappers in Sheopur, Madhya Pradesh
बदमाशों के चंगुल वापस लौटे चरवाहे - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

श्योपुर जिले के धनकर गांव के जंगल से बदमाशों ने जिन तीन चरवाहों का अपहरण किया था वे शनिवार रात उनके चंगुल से छूटकर विजयपुर पहुंच गए हैं। छूटकर आए चरवाहों ने बताया कि वे बदमाशों के चंगुल से भागकर यहां आए हैं। अब पुलिस इन चरवाहों से पूछताछ कर रही है ताकि बदमाशों के बारे में पता लगाया जा सके।

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घायल रामस्वरूप को कंधे पर बिठाकर भागे चरवाहे
बदमाशों के चंगुल से छूट कर आए अपहृत गुड्डा बघेल, भरतू और रामस्वरूप यादव ने पुलिस को बताया कि आठ हथियारधारी बदमाशों ने उनका अपहरण शुक्रवार शनिवार की दरमियानी रात जंगल से किया था। सात लोगों के पास बंदूक और एक के पास लाठी और कट्टा था। उन्हीं के दम पर वे हमें मारते पीटते हुए धोरेट सरकार के जंगल से होते हुए कूनो के जंगल में लेकर गए। 
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उन्होंने बताया कि बदमाशों ने हमारी आंखों पर पट्टी बांध दी थी। जब हम थक कर रुक जाते तो वे हमें लाठी डंडों से बेरहमी से पीटते थे। हम डर के मारे दम लगा कर चलते थे। वे जहां भी रुकते हमारे हाथ पैरों को बांध देते थे। वे हमें चंबल नदी पार करवा कर राजस्थान के अरोरा के पहाड़ पर लेकर गए। वहां एक-दो दिन रहने के बाद वे हमें वापस कूनों के जंगल में ले आए थे। शनिवार को वे दिन में सो रहे थे, तब हम घायल रामस्वरूप को कंधे पर बिठाकर चुपचाप वहां से भाग आए थे। 
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खाने में बिना सब्जी के सिर्फ एक रोटी देते थे बदमाश
पुलिस ने उनसे पूछा कि वे उन्हें खाने में क्या देते थे? इस पर अपहरण से मुक्त हुए गुड्डा ने बताया कि बदमाश उन्हें रोजाना एक रोटी देते थे। सब्जी नहीं मिलती थी और एक रोटी से पेट नहीं भरता था, लेकिन उनके पास बंदूकें थीं। कुछ भी कहने पर वे हमें बेरहमी से मारते थे, इसलिए एक रोटी खाकर पानी पी लेते थे। 

तीन अपहृत चरवाहों में से रामस्वरूप यादव सबसे ज्यादा बुजुर्ग थे। वह दो दिन चलने के बाद थक हार गए तो बदमाशों ने उन्हें पहले बेरहमी से पीटा। बाद में जब मारपीट के बाद भी वह ठीक से नहीं चल पा रहे थे तो बदमाशों ने उनके पैरों की उंगलियों के नाखून जला दिए। इससे उनके पैरों में घाव हो गया। इसके अलावा उनकी आंख और नाक में भी चोटें आई हैं। रामस्वरूप को विजयपुर से गंभीर हालत में इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। घायल रामस्वरूप यादव ने बताया कि बदमाशों ने मुझे बहुत मारा, मेरी नाक से खून आ गया और आंखों में भी चोट के निशान हैं। 


'किसी ने हमें छुड़ाया नहीं'
श्योपुर पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार ने बताया कि बदमाश तीनों चरवाहों का अपहरण करके पहले मारते पीटते हुए राजस्थान लेकर गए। फिर पुलिस को चकमा देकर वापस श्योपुर जिले के कूनों इलाके के जंगल में ले आए। पुलिस बदमाशों को राजस्थान के करौली जिले के जंगल में तलाशती घूम रही थी। तभी चरवाहे बदमाशों के चंगुल से मुक्त होकर शनिवार को रात जंगल से निकलकर विजयपुर नगर के बाजार में पहुंच गए। पुलिस अधिकारी बदमाशों को तलाशने के लिए मुक्त हुए चरवाहों से पूछताछ कर रहे हैं। चरवाहे भरतू बघेल ने अपना दुख जाहिर करते हुए कहा कि वह भागकर आ गए किसी ने उन्हें छुड़ाया नहीं।

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