नौ दिन बाद आखिरकार मेधा पाटकर ने खत्म किया अनशन
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अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठीं नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने नौ दिन बाद आखिरकार अनशन खत्म कर दिया है। साथी आंदोलनकारियों के साथ सभी की सहमति के बाद मेधा पाटकर ने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। जानकारी के मुताबिक इससे पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य के पूर्व मुख्य सचिव शरदचंद्र बेहार को अपने दूत के रूप में मेधा पाटकर से चर्चा के बड़वानी जिले में भेजा था।
Madhya Pradesh: Medha Patkar ends her indefinite fast after 9 days in Barwani. She was protesting against Gujarat Government's move to close the shutters of Sardar Sarovar Dam & raise water level to 138.68 metres. pic.twitter.com/6J4rp1RKNU
— ANI (@ANI) September 2, 2019
बता दें कि नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर पिछले नौ दिन से अनिश्चितकालीन अनशन कर रही हैं और उनकी तबीयत ठीक नहीं बताई जा रही है। मेधा पाटकर नर्मदा नदी पर गुजरात में निर्मित सरदार सरोवर बांध एसएसडी के मध्यप्रदेश के विस्थापितों के उचित पुनर्वास और ग्रामीणों को डूब से राहत के लिये बांध के गेट खोल पानी छोड़ने की मांग को लेकर बड़वानी जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर छोटा बड़दा गांव में 26 अगस्त से अनिश्चितकालीन ‘सत्याग्रह’ आंदोलन कर रही हैं। यह गांव एसएसडी के बैकवाटर के जलमग्न क्षेत्र में पड़ता है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने सोमवार को यहां बताया कि अनशन कर रहीं पाटकर से चर्चा के लिये मुख्यमंत्री के दूत के तौर पर पूर्व मुख्य सचिव शरदचंद्र बेहार वहां पहुंच रहे हैं।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले में जारी बयान में कहा कि मेधा पाटकर और एनबीए के समस्त साथियों को यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि मेरी सरकार डूब प्रभावितों के पूर्ण पुनर्वास के लिये प्रतिबद्ध है।
डूब प्रभावितों के समस्त दावों और मुद्दों का संपूर्ण निराकरण, नर्मदा घाटी के गांव-गांव में शिविर लगाकर किया जायेगा। मैं मेधा पाटकर जी से पुन: विनम्र आग्रह करता हूं कि वे अपना अनशन समाप्त करें और डूब प्रभावितों के मुद्दों के त्वरित निराकरण में हमारा सहयोग करें।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन का पूरा प्रयास होगा कि बांध के गेट खोले जावें एवं पूर्ण स्तर तक जल भराव वर्तमान में स्थगित रखा जावे।
अपने वक्तव्य में उन्होंने बताया कि सरकार ने पुर्नवास कार्यो में विस्थापितों की जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिये प्रत्येक डूब ग्राम की ग्राम स्तरीय पुनर्वास समिति एवं जिला स्तरीय पुनर्वास समिति गठित की है। इन समितियों में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विस्थापितगण शामिल गये गये हैं।
इसबीच, सोमवार सुबह को प्रदेश की कैबिनेट मंत्री विजयलक्ष्मी साघौ ने अनशन स्थल पर मेधा पाटकर से मिलकर उनसे अपना अनशन समाप्त करने का आग्रह किया और मुख्यमंत्री कमलनाथ से फोन पर उनकी बात भी करवाई। इसके बावजूद पाटकर ने अपना आंदोलन खत्म करने से इंकार कर दिया।
छोटा बड़दा गांव के प्रदर्शनकारियों रोहित एवं हर्षित ने रविवार रात को बताया कि मेधा की तबीयत बिगड़ गई है। हालांकि, बड़वानी जिले के कलेक्टर अमित तोमर ने रविवार को बताया कि ‘मैं उनकी तबीयत के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बता सकता हूं, क्योंकि वह प्रशासन के लगातार प्रयास के बाद भी डॉक्टरों एवं मेडिकल दल को अपने मेडिकल जांच कराने की अनुमति नहीं दे रहीं हैं।’
मालूम हो कि वर्तमान में एसएसडी में 134 मीटर स्तर तक जल भराव किया गया है जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 138 मीटर है। यह बांध बनने के बाद पहली बार इतने अधिक स्तर पर इसमें जल भराव होने से मध्यप्रदेश का बड़ा इलाका इसके बैकवॉटर से जलमग्न हो गया है।
