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गुस्से में अन्नदाता: एमपी में गूंजा किसानों का आक्रोश, यहां 350 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ निकली विशाल रैली

Tue, 07 Oct 2025 07:04 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Tue, 07 Oct 2025 07:04 PM IST
सार

सीहोर जिले के भैरूंदा कस्बे में हजारों किसानों ने अपनी फसलों की बर्बादी और सरकार की नीतियों के खिलाफ 'किसान आक्रोश ट्रैक्टर रैली' निकाली। पढ़ें पूरी खबर

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Sehore news:Farmers’ fury erupts in Bhairunda, 350 tractors rally, memorandum submitted to Minister Shivraj
आक्रोश रैली के दौरान अपनी मांगों को लेकर किसान उतरे सड़कों पर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीहोर जिले के भैरूंदा कस्बे में किसानों ने अपनी पीड़ा और गुस्से को सड़कों पर उतार दिया। किसान स्वराज संगठन (संयुक्त किसान मोर्चा) के आह्वान पर आयोजित 'किसान आक्रोश ट्रैक्टर रैली' में 350 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां शामिल हुईं। हजारों किसानों ने खेतों से सीधे पहुंचकर भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। रैली का शुभारंभ भैरूंदा मंडी प्रांगण से हुआ और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पर समाप्त हुई। शांतिपूर्वक रैली के बाद किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
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सोयाबीन की फसल बर्बाद, सर्वे और मुआवजा नहीं
किसानों ने ज्ञापन में बताया कि भैरूंदा, आष्टा और आसपास के गांवों में कीट प्रकोप और अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक न तो सर्वे कराया और न ही मुआवजा घोषित किया। किसानों ने तत्काल सर्वे कराकर राहत राशि और बीमा भुगतान की मांग की।
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भावांतर योजना पर तीखा हमला
किसानों ने भावांतर योजना को 'किसान विरोधी' बताते हुए कहा कि यह योजना व्यापारियों को लाभ पहुंचाने का माध्यम बन गई है। किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से भावांतर योजना बंद करने और सभी फसलों की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित करने की मांग की।
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खाद संकट और बिजली विभाग की मनमानी पर नाराजगी
रैली में किसानों ने खाद की भारी कमी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। किसानों ने कहा कि पिछले चार महीनों से डीएपी और यूरिया की कमी के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने अग्रिम खाद वितरण और पारदर्शी सप्लाई व्यवस्था की मांग की। साथ ही, किसानों ने बिजली विभाग की मनमानी पर भी गुस्सा जताया। आरोप लगाया कि विभाग झूठे बिल बनाकर परेशान कर रहा है। 5 एचपी को 7 एचपी और 7 एचपी को 10 एचपी बताकर फर्जी बिल थमाए जा रहे हैं। किसानों ने इन मामलों को तुरंत निरस्त करने की मांग की।

किसानों की मांग : गेहूं का भाव ₹3000, फसलों का आयात बंद हो
किसान स्वराज संगठन ने कहा कि पिछले 10-12 साल से फसलों के दाम नहीं बढ़े, जिससे किसान परेशान हैं। उन्होंने फसलों के आयात पर रोक और देशी किसानों की सुरक्षा की मांग की। किसानों ने याद दिलाया कि सरकार ने वादा किया था कि गेहूं का समर्थन मूल्य ₹3000 प्रति क्विंटल किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, किसान आत्मनिर्भर नहीं बन सकते। इसके साथ ही किसानों ने कोलार नदी पर झोलियापुर बेराज को बड़ा डेम बनाने और सिंचाई के लिए स्थायी जल संरक्षण के कदम उठाने की मांग की। किसानों ने साफ कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप लेगा।

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चौपाल में अधिकारियों से सीधी बात
रैली के बाद किसानों ने कृषि उपज मंडी परिसर में चौपाल सभा आयोजित की। इसमें किसानों ने अपनी समस्याएँ अधिकारियों के सामने रखीं। इस चौपाल में एसडीएम सुधीर कुशवाह, थाना प्रभारी घनश्याम दांगी, तहसीलदार सौरभ शर्मा, कृषि विभाग के एसएडीओ व्ही.एस. राज और विद्युत विभाग के कार्यपालन यंत्री राजेश अग्रवाल मौजूद रहे। किसानों ने अधिकारियों से राहत राशि, खाद वितरण, बिजली मामलों और बीमा भुगतान से जुड़ी शिकायतें साझा कीं। अधिकारियों ने समस्याओं को उच्च स्तर पर भेजने का भरोसा दिया, लेकिन किसानों ने कहा, “अब वादे नहीं, कार्रवाई चाहिए।”

किसान नेताओं की चेतावनी अब आर-पार की लड़ाई होगी
सभा में किसान नेताओं गजेंद्र जाट, शंकर पटेल, भगवान सिंह यदुवंशी और विष्णु डोड ने कहा कि अब किसानों की लड़ाई आवेदन नहीं, आर-पार की होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फसल बीमा, राहत राशि और एमएसपी की समस्याएँ जल्द हल नहीं हुईं तो भोपाल का घेराव किया जाएगा।

 

 

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