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Sehore news: हर पंचायत से राज्यपाल को पहुंचेगा भावुक पत्र, इस मांग के लिए चलेगा किसानों का आंदोलन

Wed, 11 Jun 2025 02:45 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Wed, 11 Jun 2025 02:45 PM IST
सार

भैरूंदा में मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी न होने से नाराज़ किसान 16 जून को ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। 101 ग्राम पंचायतों से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा जाएगा। किसानों को भारी नुकसान हो रहा है और वे एमएसपी पर खरीदी की मांग कर रहे हैं। आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। 

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Sehore news: Now a letter will reach the Governor from every Panchayat for purchasing moong
ग्राम पंचायत छापरी में पंचायत स्तरीय किसानों की बैठक का आयोजन किया गया और पंचायत सचिव को ज्ञापन

विस्तार

किसान स्वराज संगठन ने सरकार से आमने-सामने की लड़ाई लड़ने 16 जून को भैरूंदा तहसील मुख्यालय पर विशाल ट्रैक्टर-रैली निकाले जाने का बिगुल फूंक दिया है। दूसरी ओर किसानों द्वारा अब पंचायत स्तर से राज्यपाल के नाम चिट्ठी (ज्ञापन) पहुंचाई जाएगी। इसमें किसानों द्वारा राज्यपाल से मांग की जा रही है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर राज्य सरकार को मूंग खरीदी के लिए निर्देशित करें।

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इसी बात को लेकर भैरूंदा क्षेत्र की ग्राम पंचायत छापरी में पंचायत स्तरीय किसानों की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें बैठक के बाद ग्रामीणों ने एमएसपी पर मूंग खरीदी को लेकर एक ज्ञापन पंचायत सचिव को राज्यपाल के नाम सौंपा गया। बैठक का यह आयोजन क्षेत्र की सभी 101 ग्राम पंचायतों में होंगे और स्थानीय किसानों द्वारा अपनी मांग राज्यपाल तक पहुंचाई जाएगी। धीरे-धीरे यह आयोजन आंदोलन का रूप लेगा और विस क्षेत्र में किसानों के द्वारा एकत्रित होकर अपनी मांग स्थानीय शासन-प्रशासन व सरकार के नुमांइदो के सामने रखी जाएगी।
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मूंग फसल फायदे की जगह नुकसान का सौदा साबित हो रही
क्षेत्र का 80 फीसदी किसान मूंग कटाई से निवृत्त हो चुका है और उसे अपनी फसल बेचने की चिंता सता रही है। मंडी में मूंग के भाव 4500 से 6500 रुपए तक मिल रहे हैं, जिससे किसानों को एमएसपी की तुलना में 2200 से 4200 रुपए प्रति क्विंटल का घाटा हो रहा है। इससे मूंग की फसल किसानों के लिए फायदे की जगह नुकसान का सौदा साबित हो रही है। इसी को लेकर अब किसान एक-जुट होकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। किसानों का तर्क है कि सरकार को एमएसपी पर मूंग की खरीदी आवश्यक रूप से करना होगी। यदि सरकार अपना निर्णय नहीं बदलती है तो किसान को फिर सड़क पर आने को मजबूर होना पड़ेगा।

किसानों की चिट्ठी, राज्यपाल करे मूंग खरीदी में हस्तक्षेप
ग्राम छापरी में पंचायत की बैठक में किसान राजेश जाट, रामनिवास पटेल, राजेश पटेल, प्रदीप, रामदयाल, अमर सिंह, रामभरोस, धरम सिंह, शैतान सिंह, हरिओम उईके, जगदीश प्रसाद, मुकेश पंवार ने एक ज्ञापन राज्यपाल के नाम पंचायत सचिव को सौंपा। इसमें उन्होंने मांग की है कि भारत सरकार ने दहलन फसल मूंग का एमएसपी 8682 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन शासन द्वारा मूंग खरीदी न किए जाने से बाजार में मूंग का भाव 4500 से 6500 तक पहुंच गया है, जिससे किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है। यदि एमएसपी पर खरीदी नहीं होती है तो किसान कर्जदार हो जाएगा और आगामी फसल के लिए भी कर्ज लेना पड़ेगा। मंडी में एमएसपी से नीचे खरीदी होने पर प्रशासनिक स्तर पर भी कोई कार्रवाई व्यापारियों के विरुद्ध नहीं की जा रही है। किसानों ने अपनी पीड़ा बताते हुए राज्यपाल से निवेदन किया है कि वह हस्तक्षेप कर सरकार को निर्देशित करें कि वह एमएसपी पर मूंग खरीदी जल्द से जल्द शुरू की जाए।


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101 ग्राम पंचायतों से राज्यपाल के पास पहुंचेगी चिट्ठी
पंचायत राज्य संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश पंवार ने बताया कि लोकतंत्र में जब सरकार अपनी मनमर्जी करने लग जाए और लोक कल्याण की जगह स्वयं का फायदा देखें तो मतदाताओं का कर्तव्य हो जाता है कि वह जनप्रतिनिधियों को इस बात की याद दिलाएं कि आप मालिक नहीं बल्कि प्रतिनिधि हो। आपको वही करना है जो जन समुदाय चाहता है, लेकिन प्रतिनिधियों के द्वारा जन समुदाय की इच्छा को दरकिनार किया जा रहा है। ऐसे में किसान अपनी-अपनी पंचायतों के माध्यम से राज्यपाल के पास सामूहिक चिठ्ठी सरकार के सेवक या जनप्रतिनिधि के माध्यम से पहुंचाएंगे। इसमें किसानों की गंभीर समस्या मूंग की खरीदी जल्द से जल्द शुरू किए जाने की मांग का उल्लेख होगा।

ट्रैक्टर रैली निकालने मिल रहा किसानों का समर्थन
इधर किसान स्वराज संगठन के प्रदेश सचिव गजेन्द्र जाट ने बताया कि सरकार यदि समय रहते नहीं जागी तो इसका खामियाजा उसे हर हाल में भुगतना होगा। आगामी 16 जून को निकाली जाने वाली विशाल ट्रैक्टर रैली के लिए किसानों का अपार समर्थन प्राप्त हो रहा है। प्रदेश के साथ-साथ अब भैरूंदा की सड़कें भी किसानों के आक्रोश से पट जाएगी। इसमें होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी किसानों की नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की होगी।

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