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MP News: 'गलती न करें... बर्दाश्त नहीं की जाएगी', सीहोर में वन विभाग पर भड़के मामा शिवराज, जानें क्या है मामला
Sun, 29 Jun 2025 08:57 AM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sun, 29 Jun 2025 08:57 AM IST
सार
शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासियों को आश्वस्त किया कि वे प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा करेंगे और फॉरेस्ट अफसरों को चेताया कि किसी तरह की गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदर्शन के बाद आदिवासी शांतिपूर्वक लौट गए। आदिवासी वन अधिकार पत्र शीघ्र बनाए जाने और प्रस्तावित अभ्यारण्य निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।
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कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों से बात करते केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीहोर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को वन विभाग के अफसरों पर भड़क गए। जिले के अनेक क्षेत्रों से जमीन की शिकायत लेकर आदिवासी उनके पास पहुंचे थे। आदिवासियों से शिवराज सिंह ने कहा- मामा तुम्हारे साथ है। उन्होंने कहा कि ये अफसर सब गड़बड़-सड़बड़ करते हैं। वन विभाग के अधिकारी सरकार की छवि बिगड़ने की कोशिश कर रहे हैं। मैं फॉरेस्ट डिपार्टमेंट वालों से कहता हूं कि गलती न करें, ये किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिले के इछावर, लाड़कुई वन परिक्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल अभ्यारण्य बनाने के प्रस्ताव के विरोध में शनिवार को क्षेत्र के आदिवासियों ने सीहोर पहुंचकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी परिसर में मौजूद थे। वे कलेक्ट्रेट के जिला पंचायत सभाकक्ष में दिशा की बैठक में शामिल होने के लिए सीहोर पहुंचे थे। इस दौरान इछावर, लाडक़ुई सहित जिलेभर के हजारों की संख्या में आदिवासियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर वहां पर नारेबाजी, प्रदर्शन शुरू कर दिया। केंद्रीय मंत्री ने आदिवासियों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान आदिवासियों द्वारा उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें इछावर, लाडक़ुई वन परिक्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल अभ्यारण के प्रस्ताव को निरस्त करने सहित तीन सूत्रीय मांगें थी। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया है कि वे इस मामले में प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा करेंगे। इसके बाद आदिवासियों ने घेराव खत्म कर किया।
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जिले के इछावर, लाड़कुई वन परिक्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल अभ्यारण्य बनाने के प्रस्ताव के विरोध में शनिवार को क्षेत्र के आदिवासियों ने सीहोर पहुंचकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी परिसर में मौजूद थे। वे कलेक्ट्रेट के जिला पंचायत सभाकक्ष में दिशा की बैठक में शामिल होने के लिए सीहोर पहुंचे थे। इस दौरान इछावर, लाडक़ुई सहित जिलेभर के हजारों की संख्या में आदिवासियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर वहां पर नारेबाजी, प्रदर्शन शुरू कर दिया। केंद्रीय मंत्री ने आदिवासियों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान आदिवासियों द्वारा उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें इछावर, लाडक़ुई वन परिक्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल अभ्यारण के प्रस्ताव को निरस्त करने सहित तीन सूत्रीय मांगें थी। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया है कि वे इस मामले में प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा करेंगे। इसके बाद आदिवासियों ने घेराव खत्म कर किया।
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कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों से बात करते केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान।
- फोटो : अमर उजाला
ये की मांग
आदिवासियों का कहना था कि जिले में हमारे जनजाति समाज के लगभग 200 गांव में 2 लाख जनसंख्या रहती है। समाज वन परिक्षेत्र में रहकर वन भूमि पर कृषि कार्य कर अपना जीवन यापन करता है। वन भूमि पर वर्षों से हमारा कब्जा है। कुछ किसानों को वन अधिकार पत्र बना दिए गए हैं। कई के नहीं बन पाए हैं। ऐसे में वन विभाग और वन विकास निगम आए दिन 25 से 30 वर्ष पुरानी कृषि भूमि पर नया अतिक्रमण बताकर कार्रवाई कर रहा है। इसलिए मांग है कि प्रस्तावित सरदार वल्लभ भाई पटेल अभयारण्य को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसी तरह आदिवासियों ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत सीहोर जिले के जितने भी वन मित्र पोर्टल पर आवेदन किए गए हैं। शीघ्र उनका निराकरण कर उनका वन अधिकार पत्र बनाया जाए। वन विभाग साक्ष्य न होने के अभाव में हमारी पुरानी कृषि भूमि को नई बताकर जो कार्रवाई कर रहा है उसे रोका जाए।
आदिवासियों का कहना था कि जिले में हमारे जनजाति समाज के लगभग 200 गांव में 2 लाख जनसंख्या रहती है। समाज वन परिक्षेत्र में रहकर वन भूमि पर कृषि कार्य कर अपना जीवन यापन करता है। वन भूमि पर वर्षों से हमारा कब्जा है। कुछ किसानों को वन अधिकार पत्र बना दिए गए हैं। कई के नहीं बन पाए हैं। ऐसे में वन विभाग और वन विकास निगम आए दिन 25 से 30 वर्ष पुरानी कृषि भूमि पर नया अतिक्रमण बताकर कार्रवाई कर रहा है। इसलिए मांग है कि प्रस्तावित सरदार वल्लभ भाई पटेल अभयारण्य को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसी तरह आदिवासियों ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत सीहोर जिले के जितने भी वन मित्र पोर्टल पर आवेदन किए गए हैं। शीघ्र उनका निराकरण कर उनका वन अधिकार पत्र बनाया जाए। वन विभाग साक्ष्य न होने के अभाव में हमारी पुरानी कृषि भूमि को नई बताकर जो कार्रवाई कर रहा है उसे रोका जाए।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात करने उमड़ा आदिवासी समाज।
- फोटो : अमर उजाला
आदिवासी नहीं चाहते अब कोई नया अभ्यारण्य
सीहोर जिले में निवासरत आदिवासी अब कोई भी नया अभ्यारण्य नहीं चाहते हैं। सीहोर-रायसेन जिले में इसी वर्ष रातापानी अभ्यारण्य भी बनाया गया है। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को भारत के 57वें बाघ रिजर्व के रूप में नामित किया गया है और अब इछावर, लाडक़ुई वन परिक्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल अभ्यारण्य का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इसके लिए यहां के आदिवासियों को भी नोटिस थमाए गए हैं। इसके अलावा उन्हें वनभूमि से भी बेदखल करने की कवायद की जा रही है। इसको लेकर आदिवासियों में आक्रोश है।
सीहोर जिले में निवासरत आदिवासी अब कोई भी नया अभ्यारण्य नहीं चाहते हैं। सीहोर-रायसेन जिले में इसी वर्ष रातापानी अभ्यारण्य भी बनाया गया है। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को भारत के 57वें बाघ रिजर्व के रूप में नामित किया गया है और अब इछावर, लाडक़ुई वन परिक्षेत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल अभ्यारण्य का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इसके लिए यहां के आदिवासियों को भी नोटिस थमाए गए हैं। इसके अलावा उन्हें वनभूमि से भी बेदखल करने की कवायद की जा रही है। इसको लेकर आदिवासियों में आक्रोश है।
