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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sehore News ›   Five wrestlers are unable to uproot the rare plant even together the mysterious practice in Dhaboti village

MP News: पांच पहलवान मिलकर भी नहीं उखाड़ पाते दुर्लभ पौधा, धबोटी गांव में 100 वर्षों से जारी है रहस्यमयी प्रथा

Thu, 27 Oct 2022 09:27 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Thu, 27 Oct 2022 09:27 AM IST
सार

सीहोर जिले के धबोटी गांव में बीते 100 वर्षों से एक रहस्यमयी पौधे को उखाड़ने की प्रथा जारी है। हर साल ग्रामीण दिवाली के दूसरे दिन पुवाड़िया का दो फीट का पौधा जमीन से उखाड़ने की परंपरा का हिस्सा बनते हैं, लेकिन कई पहलवान मिलकर भी पौधा उखाड़ नहीं पाते।

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Five wrestlers are unable to uproot the rare plant even together the mysterious practice in Dhaboti village
पुवाड़िया का दो फीट का पौधा जमीन से उखाड़ते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीहोर जिला अंतर्गत ग्राम धबोटी में दीपावली के बाद दूसरे दिन पौधा उखाड़ने की प्रथा आज भी बेहद ही रहस्यमयी है। इसके रहस्य इतिहास के गर्त में छिपे हुए हैं। बुधवार को करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग हजारों की संख्या में इस प्रथा के साक्षी बने और यहां पर स्थित खुटियादेव के प्रति आस्था और उत्साह के साथ पूजा अर्चना की।  इस साल भी यहां पर आस्था के साथ मेले का आयोजन किया गया। इस मेले में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यहां पुवाड़िया का दो फीट का पौधा जमीन के चार इंच के करीब गाड़ते है, लेकिन कई लोग मिलकर इसे उखाड़ नहीं पाते। करीब 100 साल से चली आ रही इस परंपरा में कोई भी यह पौधा नहीं उखाड़ पाया है।
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ग्राम धबोटी के बुजुर्ग ईश्वर सिंह ने बताया कि कई दशकों से धबोटी के समीप दीपावली के बाद गोवर्धन पूजन के पावन अवसर पर हर साल हजारों की संख्या में मवेशियों के स्वास्थ्य सहित अन्य कामनाओं को लेकर लोग यहां आते हैं, जो मंदिर में मौजूद खुटियादेव की पूजा अर्चना पूरी आस्था और विश्वास के साथ करते हैं। ईश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि यहां पौधा उखाड़ने की प्रथा कई दशकों से चली आ रही है, लेकिन अभी तक कोई भी इस दुर्लभ पौधे को नहीं उखाड़ सका है।
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उन्होंने बताया कि गांव के चौकीदार पटेल जगदीश प्रसाद के मार्गदर्शन में विशेष पूजा अर्चना के साथ ग्राम में स्थित खुटियादेव के मंदिर परिसर में पुवाड़िया का दो फीट का पौधा जमीन के अंदर चार इंच के करीब गाड़ा जाता है और उसके बाद सुबह यहां पर करीब तीन घंटे तक आने वाले श्रद्धालु खुटियादेव के दर्शन करने के पश्चात इस पौधे को उखाड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन यह चार इंच जमीन में गड़ा हुआ पौधा न तो टूटता है और न ही चार-पांच लोगों के अथक प्रयास के बाद भी जमीन से टस से मस होता। हालांकि शाम को इस पौधे को बड़ी आसानी से उखाड़कर विसर्जित कर दिया जाता है। इस पौधे को जंगल से हर साल उखाड़कर लाया जाता है और गोर्वधन पूजा से पहले रोपित किया जाता है।
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ग्राम के सरपंच ईश्वर सिंह ने बताया कि हमारे बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार दीपावली के दूसरे दिन ग्राम धबोटी में छोटा बारहखंभा के नाम से इस प्रसिद्ध मेले और पौधा उखाड़ने की इस अद्भुत घटना में करीब 12 से 15 हजार श्रद्धालु हर साल साक्षी के रूप में मौजूद रहते हैं, जिसमें ग्राम धबोटी, धामनखेड़ा, शिकारपुर, काहरी, बामूलिया, बडनगर, कांकडख़ेड़ा, भाउखेड़ी, आमझिर, मोगरा, हसनाबाद, जहागीरपुरा, नयापुर और आल्हदाखेड़ी आदि के बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्रवासी श्रद्धा और विश्वास के साथ उपस्थित होते हैं, जो खुटियादेव की पूजा-अर्चना के साथ ही मेले में शामिल होते हैं।
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